जहां लोग दर्द लेकर जाते हैं…. और राहत लेकर लौटते हैं, फ़िजियोथैरेपी कैम्प के ज़रिए बुजुर्गों ने पेश की सेवा की अद्भुत मिसाल

बिलासपुर । “इस भवन की ओर आते हुए बुज़ुर्गों – महिलाओं के चेहरे पर दर्द की झलक दिख़ाई देती है और लोग परेशान नज़र आते हैं…..। लेकिन कुछ देर बाद जब वापस लौटते हैं तो उसी चेहरे पर राहत और ख़ुशी भी लौट आती है…। इस भवन की ओर आते समय जो लोग कुछ बेहतर होने की उम्मीद के साथ आगे बढ़ रहे थे…. वही लोग वापस लौटते समय दर्द से छुटकारा पाने के बाद आशिर्वाद और दुआओं के साथ कदम बढ़ा रहे हैं…।” यह सब देख़ा ज़ा सकता है,बिलासपुर के बृहस्पति बाज़ार में बने अनुभव भवन में …। जहां पर बिलासा वरिष्ठ नागरिक मंच तथा ज्येष्ठ नागरिक संघ की ओर से चार दिवसीय फ़िजियोथैरेपी कैम्प का आयोजन किया गया है। और इस आयोजन ने बुज़ुर्गों के लिए  नगर निगम की ओर से बनाए गए अनुभव भवन के नाम को सार्थक बना दिया है।

लम्बे अनुभव के साथ उमर का लम्बा सफ़र तय कर चुके बुजुर्गों के संगठन ने घुटने – कमर – कंधे के दर्द और नसों की तक़लीफ़ से जूझ रहे लोगों के इलाज़ के लिए बहुत ही मददगार आयोज़न किया है। इस कैम्प में पहुंचने वालों के चेहरे पर राहत भरी ख़ुशी देखकर इस आयोजन की कामयाब़ी का अहसास किया ज़ा सकता है। अनुभव भवन में यह फ़िज़ियोथैरेपी कैम्प 12 नवंबर से शुरू हुआ है और यह 15 नवंबर तक चलेगा। जहां पर सुबह 9 बजे से 1 बजे तक और शाम को 4 बज़े से 7 बज़े तक इलाज़ किया जाता है। वृद्धजन सेवा संस्थान उदयपुर , राज़स्थान के विशेषज्ञ फ़िज़ियोथैरेपिस्ट पूरी सेवा भावना के साथ मरीज़ों का परीक्षण और इलाज़ कर रहे हैं। पिछले तीन दिनों में बड़ी संख़्या में लोगों ने लाभ उठाया है। बिलासा वरिष्ठ नागरिक मंच और ज्येष्ठ नागरिक संघ के सदस्य भी पूरे समर्पण के साथ सक्रिय हैं। जो वहां पहुंचने वाले लोगों का पंज़ीयन करते हैं। सिलसिलेवार चिकित्सकों तक पहुंचाते हैं और पानी वगैरह का भी इँतज़ाम करते हैं। आयोजन को सफ़ल बनाने के लिए पिछले कई द़िनों से लगातार अपना समय दे रहे वरिष्ठ नागरिकों की यह सेवा भावना प्रणम्य है।

उदयपुर , राजस्थान के वृद्धजन सेवा संस्थान से आए डॉ. कैलाश कुमार ने बताया कि उनकी संस्था में फ़िज़ियोथैरेपिस्ट की 5- 7 टीमें हैं। जो देश के तमाम हिस्सों में ज़ाकर लोगों की सेवा करते हैं। घुटना, कमर, पीठ,गर्दन,कँधे के दर्द और नसों की बीमारी से पीड़ित लोगों का फ़िज़ियोथैरेपी के ज़रिए इलाज़ करते हैं।कैम्प के बाद भी ऑडियो-वीडियो कॉल  के ज़रिए फ़ॉलोअप करते हैं। डॉ. कैलाश बताते हैं कि सामान्यतया 60 साल की उमर के बाद लोगों को इस तरह की तक़लीफ़ अधिक होती है। जिन्हे इस इलाज़ से काफ़ी अधिक फ़ायदा मिलता है। उन्होने यह भी बताया कि कोरोनाकाल और उसके बाद से ऑनलाइन कामकाज का चलन बढ़ा है और लोग मोबाइल का भी अधिक इस्तेमाल करने लगे हैं, जिससे कम उमर को लोगोँ में भी तक़लीफ़ देखी जा रही है।  पॉस्चर ठीक कर इस तक़लीफ़ को दूर किया जा सकता है। सबसे अहम् बात यह भी है कि इस तरह के कैम्प के लिए संस्था कोई मोटी फ़ीस नहीं लेती । बल्कि सिर्फ रहने – ख़ाने के इंतज़ाम की ज़रूरत पड़ती है।

सेवाभावी फ़िज़ियोथेरेपिस्ट की टीम के समर्पण का असर अनुभव भवन के कैम्प में देख़ा जा सकता है। जहां पर अपनी तक़लीफ़ लेकर पहुंच रहे लोग राहत पाकर ख़ुशी-ख़ुशी लौटते हैं। बिलासा वरिष्ठ नागरिक मंच तथा ज्येष्ठ नागरिक संघ की ओर से आयोज़ित यह कैम्प 15 नवंबर को समाप्त हो ज़ाएगा। लेकिन इस आयोजन से लोगों को ज़ो राहत मिली है,वह क़ायम रहेगी। इस उम्मीद के साथ संगठन के सर्व श्री बजरंग अग्रवाल , शशिप्रकाश मिश्रा,रमेश सोनी,व्दारिका प्रसाद गुप्ता,रविद्र मिश्रा,मोहन सिंह ठाकुर,के0के0 शर्मा,शंकर मिश्रा,श्रवण चतुर्वेदी,राजेंद्र अग्रवाल,डा० सत्यनारायण मिश्रा,बिसंभर अग्रवाल,सुनींल दुबे ,अरविंद दीक्षित,सत्यभामाअवस्थी,बालगोविंद अग्रवाल,नित्यानंद अग्रवाल,प्रभात मिश्रा,आर०के० गेंदले,हरीश मगर,आदि इस आयोजन को सफ़ल बनाने के लिए समर्पण के साथ सक्रिय हैं ।

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