अरुण साव के बंगले के पास भाजपाइयों की नुमाइश क्यों है चर्चा में… ? कुछ नेताओं को ही “बेरोजगार” न कर जाए “बेरोजगारी” के ख़िलाफ़ यह प्रदर्शन..!

( गिरिजेय ) उस ख़बर की हेडलाइन तो यह होनी चाहिए थी कि….बीजेपी युवा मोर्चा ने बेरोजगारों के मुद्दे पर ज़बरदस्त प्रदर्शन किया …. और कलेक्टोरेट का घेराव किया….. । लेकिन सुर्ख़ियां कुछ ऐसी थीं … भाजपा में विवाद ,,, फ़ीका प्रदर्शन… धक्का मुक्की…। संयोग – दुर्योग से यह सब बिलासपुर में हुआ । वह भी छत्तीसगढ़ बीज़ेपी के नवनियुक्त अध्यक्ष अरुण साव के बंगले के कुछ ही दूरी पर हुआ…। अरुण साव के प्रदेश भाजपा की कमान संभालने के बाद पार्टी का यह पहला सार्वजनिक प्रदर्शन था…। इसमें अगर ख़बर की “हेडलाइन” बदल गई तो बीजेपी में हो रहे “बदलाव” के इस दौर में लग रहा है कि अभी बहुत कुछ बदलने की ज़रूरत है…। और शायद आने वाले दिनों में ज़ल्दी ही ऐसा कुछ बदलाव देखने को भी मिल सकता है..।

जैसा कि मालूम है कि बीजेपी की युवा शाखा भाजयुमो ने छत्तीसगढ़ की मौज़ूदा कांग्रेस सरकार को नौज़वानों के रोज़गार के मामले में घेरने के लिए प्रदेशव्यापी आंदोलन शुरू किया है। जिसके तहत तमाम जिलों में प्रदर्शन हो रहे हैं और 24 अगस्त को राजधानी रायपुर में सीएम हाउस के घेराव की भी तैयारी है। ज़ाहिर सी बात है कि नौज़वानों से ज़ुड़े इस मुद्दे पर भाजयुमो की ओर से चलाई जा रही इस मुहिम की पार्टी के लिए बड़ी अहमियत है।  पार्टी उम्मीद कर रही है कि इस मुहिम में क़ामयाब़ी मिलेगी और इसके ज़रिए बीजेपी को छत्तीसगढ़ के नौज़वानों से जुड़े ज्वलंत मुद्दे से सीधे जोड़ा जा सकेगा। इसके ज़रिए बीजेपी यह संदेश देने की भी कोशिश कर रही है कि देश में बेरोजगारी जैसे मुद्दे पर विपक्ष केन्द्र की बीजेपी सरकार को घेरने की कोशिश कर रहा है। लेकिन जिस प्रदेश में कांग्रेस की सरकार है , वहां हालत क्यों ख़राब है। लिहाजा एक रणनीति के तहत इस मुद्दे पर आंदोलन शुरू किया गया है।

इस दौरान कई जिलों से ख़बरे आईं हैं कि भाजयुमो कार्यकर्ताओं ने असरदार ढंग से प्रदर्शन किया है। लेकिन छत्तीसगढ़ के दूसरे सबसे बड़े शहर बिलासपुर में गुरूवार को हुए प्रदर्शन को लेकर ज़ो खबरे  आईं हैं, उससे पार्टी की इस मुहिम को गहरा धक्का लगना स्वाभाविक है। बल्कि प्रदर्शन के दौरान सामने आई कथित घटना से यह खुलकर सामने आ गया है कि बिलासपुर में पार्टी किस तरह चल रही है। बिलासपुर में नेहरू चौक पर भाजयुमो ने प्रदर्शन किया । वहीं पर एक सभा भी हुई और फ़िर कलेक्टोरेट जाकर ज्ञापन सौंपा गया । ज्ञापन देने जाते समय भाजयुमो कार्यकर्ताओं और जिला भाजपा अध्यक्ष के साथ नोंकझोंक-धक्कामुक्की की खबर सुर्ख़ियों में रही । हालांकि इस आंदोलन के दौरान मौज़ूद कई बीजेपी नेताओँ ने इस तरह की किसी घटना से इंकार किया है। लेकिन जितने मुँह-उतनी बात की तर्ज़ पर बातें ख़ूब हो रही हैं। जिससे बिलासपुर बीजेपी के अँदर चल रही ख़ींचतान भी चर्चाओं में हैं। समझ में यही आ रहा है कि भाजयुमों के इस प्रदर्शन में आयोजक नौजवानों को ही अहमियत नहीं मिलने के कारण पिछले काफ़ी समय से सुलग रहा गुस्सा फ़ूट पड़ा ।

वज़ह चाहे जो भी रही हो। लेकिन जिस तरह अरुण साव के प्रदेश भाजपा अध्यक्ष बनने के बाद किसी पहले-पहले आयोजन में पार्टी की जो किरकिरी हुई है, उससे कई सवाल भी खड़े हो रहे हैं । बीजेपी के इस ख़ींचतान  की नुमाइश से जुड़ी जिस घटना का ज़िक्र बार-बार हो रहा है, वह घटना स्थल नए प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष के बंगले के काफी नज़दीक है। जहां से पार्टी की सक्रियता और एकजुटता का संदेश जाना था , वहीं पर बिख़राव का प्रदर्शन इस सवाल की भी पैदाइश कर रहा है कि क्या ऐसा जानबूझकर तो नहीं किया गया है। जिससे अध्यक्ष की ज़िम्मेदारी संभालते ही बिलासपुर सांसद भी भी सवालों के घेरे में आ जाएं और उनके ही बंगले के सामने फ़लॉप शो सुर्ख़ियों मे आ जाए। बिलासपुर में बड़े नेताओं के दौरे के समय इस तरह  की निगेटिव्ह ख़बरें पहले भी चर्चा में रह चुकी है। हाल के दिनों में मीटिंग लेने आए बीजेपी के वरिष्ठ नेता- पूर्व मंत्री बृजमोहन अग्रवाल की मौजूदगी में भी झंडा अभियान की तैयारी को लेकर भी क़िरक़िरी हो चुकी है। अब भाजपा में चल रहे बदलाव के इस दौर में इस ताजा घटनाक्रम के बाद लग रहा है कि बीजेपी संगठन में जिला के स्तर पर भी जल्दी ही बदलाव की झलक देखने को मिल सकती है। भाजयुमो के प्रदर्शन के बाद सुर्ख़ियों मे आई इस ख़बर से यह सवाल भी तैरने लगा है कि बीजेपी के नए प्रदेश अध्यक्ष के जिले में सुर्ख़ियों मे आई इस घटना को क्या पार्टी भी संज़ीदगी से ले रही है….। और अगर ऐसा है तो क्या बेरोजगारी के नाम पर किय गया प्रदर्शन बीजेपी के कुछ ओहदेदारों को बेरोजगार कर जाएगा….  ?        

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