22 अगस्त से हड़ताल क्यों..? पी आर यादव ने समझाया हर महीने कर्मचारियों को हो रहे नुकसान का पूरा गणित..

Chief Editor
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रायपुर । मध्यप्रदेश के समय से ही कर्मचारियों के लिए लगातार संघर्ष कर रहे ट्रेड यूनियन नेता और छत्तीसगढ़ प्रदेश तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ के प्रमुख संरक्षक पी.आर. यादव ने कहा है कि प्रदेश के कर्मचारी / अधिकारी अपनी सरकार से कोई अतिरिक्त लाभ की मांग नहीं कर रहे हैं। बल्कि केन्द्र के समान देय तिथि से डीए और सातवें वेतनमान के अनुसार गृह भाड़ा भत्ता मांग रहे हैं, जो कि उनका ज़ायज़ अधिकार है। यह नहीं मिलने के कारण पिछले काफ़ी समय से सरकारी कर्मचारियों/अधिकारियों को हर महीने काफ़ी नुकसान उठाना पड़ रहा है। पूरा गणित सामने रखते हुए उन्होने समझाया है कि 22 अगस्त से अनिश्चितकानीन हड़ताल की ज़रूरत क्यों पड़ रही है।


आखिर हड़ताल क्यों ?
मुद्दा (1) :-
“केंद्र के समान देय तिथि से 34 % महँगाई भत्ता”
राज्य शासन के द्वारा प्रदेश के 407862 कर्मचारी-अधिकारियों को केंद्र के समान देय तिथि से महँगाई भत्ता (डी ए) का क़िस्त स्वीकृत नहीं करने के कारण चरणबद्ध प्रतिमाह वेतन हमें कम मिला
-: पहला चरण :-
केंद्र शासन ने 1 जनवरी 2019 के 12 % महँगाई भत्ता में 5 % वृध्दि कर 1 जुलाई 2019 से 17 % घोषित किया था। लेकिन राज्य शासन ने 1 जुलाई 2021 से महँगाई भत्ता में 5 % वृध्दि किया। जिसके कारण 1 जुलाई 2019 से 30 जून 2021 तक अथार्त 2 वर्ष प्रदेश के कर्मचारी अधिकारियों को कुल वेतन भाग में 5 % कटौती किया है।
दूसरा चरण:-
केन्द्र सरकार ने 1 जनवरी 20 का 4 %,1 जुलाई 20 का 3 % तथा 1 जनवरी 21 का 3 % कुल 11 % डी ए में वृद्धि अथार्त 17% से 28 % को 1 जुलाई 21 से प्रभावशील किया था। लेकिन राज्य शासन द्वारा डी ए में 5 % का वृध्दि 1 मई 22 से करने के कारण 1 जुलाई 21 से 30 अप्रैल 22 तक कुल 10 माह में 17 % कटौती वेतन भाग में किया है।
तीसरा चरण:-
केंद्रीय कर्मचारियों को फिलहाल 34 % डी.ए. लेकिन राज्य के कर्मचारियों को 22 % डी.ए. मिल रहा है जोकि 1 मई 22 से प्रभावशील है। जिसके कारण राज्य के प्रत्येक कर्मचारी-अधिकारी के मासिक वेतन में 12 % कटौती 1मई 22 से आज पर्यन्त प्रतिमाह हो रहा है। यह सरासर अन्याय है
*डी.ए. में हुए निरंतर कटौतियों के कारण मूल वेतन
₹20000 को ₹ 65200 ;
₹30000 को ₹ 97800;
₹40000 को ₹ 130400;
₹50000 को ₹ 163000;
₹60000 को ₹ 195600 ;
₹70000 को ₹ 228200;
₹80000 को ₹ 260800;
₹90000 को ₹ 293400 ;
₹100000 को ₹ 326000 ;
₹110000 को ₹ 358600
एवं
₹120000 को ₹ 391200
का आर्थिक नुकसान 1जुलाई 2019 से 30 अप्रैल 2022 तक तथा 1 मई 2022 के स्थिति में हुआ है। उपरोक्त वेतन के आसपास वेतन पाने वाले कर्मचारी-अधिकारी अपना लगभग आर्थिक नुकसान का आंकलन कर सकते हैं।
एच आर ए का गणित ?
मुद्दा (2) :-
“सातवे वेतन में गृहभाड़ा भत्ता”
राज्य में पुराना प्रचलित दर 10 % एवं 7 % है जोकि शहर वर्गीकरण अनुसार सातवे वेतनमान में फिलहाल 18 % एवं 9 % है।
राज्य के कर्मचारियों को सातवे वेतन में गृहभाड़ा भत्ता (एच आर ए) 1 जनवरी 2016 से नहीं दिया गया है। उनको आज पर्यन्त छटवे मूलवेतन पर पुराने दर में दिया जा रहा है।
यह सरासर अन्याय है।
उदाहरण:-
7 वाँ मूलवेतन ₹25000
एच आर ए
(A) मिलना था
@ 18 % ₹ 4500
@ 9 % ₹ 2250

(B) माँग रहे हैं
@10 % ₹ 2500
@ 7 % ₹ 1750

(C) मिल रहा है
7 वाँ वेतन= ₹ 25000 का
6 वाँ वेतन =₹ 9728 पर
@ 10 % ₹ 973
@ 7 % ₹ 681

कर्मचारियों को नुकसान
अंतर की राशि (प्रतिमाह)
(B)-(C)
@ 10 %
₹ 2500 – ₹ 973 = ₹1527 (प्रतिमाह)
@ 7 %
₹ 1750 – ₹ 681= ₹1069 (प्रतिमाह)
पी आर यादव ने कहा कि राज्य शासन एच आर ए के मामले में कर्मचारियों के हक का न्यूनतम 436 करोड़ रुपए प्रतिमाह भुगतान नहीं कर रही है! अपने हक के लिए लड़ना है,फैसला आपको करना है।

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