छत्तीसगढ़ सरकार को जगाने महिलाओं ने बजाया नगाड़ा… कब याद आएगा भूला हुआ वादा..?

रायपुर । रविवार को नगाड़े की आवाज़ राजधानी रायपुर में बूढ़ातालाब मैदान से उठ रही थी…..। यह आवाज़ सरकार को ज़गाने के लिए थी….. जो छत्तीसगढ़ के तमाम ज़िलों से पहुंची आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं / सहायिकाओं की चोट से गूँज रही थी….।

आंगनबाड़ी केंद्रों में काम करने वाली कार्यकर्ता और सहायिकाओं ने राजधानी रायपुर के बूढ़ा तालाब मैदान में डेरा जमा लिया है। ज़ो अपनी कई मांगों के साथ ही प्रदेश की मौजूदा सरकार को उसका 3 साल पुराना वादा याद दिलाने के लिए दिन-रात धरना दे रही हैं। उनका यह धरना 10 दिसंबर से शुरू हुआ है और 16 दिसंबर तक चलेगा। इस आंदोलन में छत्तीसगढ़  में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के चार अलग-अलग संगठनों ने एक संयुक्त मंच बनाया है। जिसके बैनर तले सभी संगठनों से जुड़ी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं आंदोलन में हिस्सा ले रही हैं। अब तक अपनी मांगों के लिए अलग – अलग मुहिम़ चला रही ये महिलाएं अब एकजुट हो गईं हैं।  छत्तीसगढ़ के सभी जिलों  से पूरा प्रतिनिधित्व होने के कारण संयुक्त मंच की ताकत बढ़ गई है।

लगातार कई दिनों से धरना दे रही इन महिलाओं का हौसला देखकर लगता है कि वे अपनी बातों को सरकार के सामने रखने के  बाद ही अपनी मुहिम खत्म करेंगीं। महिलाओं और बच्चों के लिए संचालित हो रही महत्वपूर्ण योजनाओं को अंजाम तक पहुंचाने वाली इन महिलाओं के आंदोलन से प्रदेश के सभी हिस्सों में आंगनवाड़ी  केंद्र बंद हैं। बच्चों को पोषण आहार नहीं बंट रहा है और आंगनवाड़ी केंद्रों में सभी तरह के कामकाज़ ठप्प हैं। प्रदेश भर से राजधानी पहुंची आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं ने सरकार को सद्बुद्धि की प्रार्थना के साथ शनिवार को हनुमान चालीसा का सामूहिक पाठ किया। इतवार को महिलाओं ने नगाड़ा बजा कर सरकार को जगाने की कोशिश की।

आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं के संयुक्त मंच का कहना है कि छत्तीसगढ़ की मौजूदा सरकार ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को नर्सरी शिक्षक पद पर उन्नयन करने और कलेक्टर दर पर वेतन दिए जाने की बात कही थी। लेकिन 3 साल के बाद भी यह वादा पूरा नहीं हुआ है। जिससे इन महिलाओं में काफी आक्रोश है। उनका यह भी कहना है कि पहले की भाजपा सरकार ने भी उनकी मांगों को नजरअंदाज किया था। वे आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं को शिक्षा कर्मियों की तरह शासकीय कर्मचारी घोषित करने और मध्य प्रदेश सरकार की तर्ज पर दस हज़ार रुपए  प्रति माह वेतन देने की मांग कर रही हैं। ये महिलाएं मासिक पेंशन ,ग्रेच्युटी और समूह बीमा जैसी सुविधाओं के अलावा मोबाइल भत्ता की मांग भी कर रही हैं।

धरना आंदोलन में शामिल महिलाओं में काफी जोश नजर आ रहा है। धरना शुरू होने के बाद से अब तक आंदोलनकारी महिलाओं से बातचीत के लिए पहल नहीं की गई है। आंदोलनकारियों की ओर से कुछ विधायकों से भी संपर्क किए जाने की जानकारी मिली है। लेकिन अब तक सरकार तक बात नहीं पहुंच सकी है। आंगनबाड़ी केंद्रों की कार्यकर्ता और सहायिक़ाओं ने वैसे तो पिछले 22 सितंबर से अपनी मुहिम चला रखी है और ब्लॉक , जिले, संभाग स्तर पर धरना प्रदर्शन के साथ ही ज्ञापन भी सौंपे हैं। लेकिन जब किसी ने कोई सुध नहीं ली तो उन्हें राजधानी पहुंचकर मज़बूरन दिन – रात का धरना देना पड़ रहा है। गांव गांव से निकलकर राजधानी पहुंचीं इन महिलाओँ के नगाड़े की आवाज़ सरक़ार के कानों तक कब़ पहुंचेगी और सरकार को अपना वादा कब तक याद आएगा … इस सवाल का जवाब सामने आने में पता नहीं अभी कितना वक़्त लगेगा….। लेकिन इन महिलाओं का हौसला बता रहा है कि उन्होने अपना पूरा वक़्त लेकर राजधानी में डेरा ज़माया है…।


आंगनबाड़ी कार्यकर्त्ता सहायिकाओ के धरना और माग को छत्तीसगढ़ तृतीय वर्ग शासकीय कर्मचारी संघ के प्रान्ताध्यक्ष चन्द्रशेखर तिवारी रायपुर.उप प्रान्ताध्यक्ष. पी.आर.कौशिक.उप प्रान्ताध्यक्ष बिलासपुर द्वारा समर्थन दिया गया और उनके द्वारा यह भी कहा गया कि आंगनबाड़ी कार्यकर्त्ता सहायिकाओ की मांगे जायज है और सरकार को चाहिये कि संघ प्रतिनिधियो से बैठकर वार्त्ता के माध्यम से हल निकालना चाहिये और महिला सशक्तिकरण की सार्थकता की ओर अग्रसर होना चाहिये।जिससे अपने अपने केन्द्र मे वापस जाकर मन लगाकर शासन का काम कर सके
चन्द्रशेखर तिवारी द्वारा यह भी कहा गया कि शासन हठधर्मिता छोड़े और संघ प्रतिनिधियो से बातकरे .वार्त्ता के माध्यम से समय रहते हल निकाले अन्यथा छत्तीसगढ़ तृतीय वर्ग शासकीय कर्मचारी संघ भी कभी हड़ताल के समर्थन मे मैदान मे उतर सकता है कामरेड सौरा यादव प्रगतिशिल आंगनबाड़ी कार्यकर्त्ता सहायिका संघ.हेमा भारती .रूक्मणी सज्जन प्रान्ताध्यक्ष बस्तर सम्भाग कविता ता यादव .जिलाध्यक्ष जशपुर.भारती मिश्रा जिलाध्यक्ष बिलासपुर.गायत्री चतुर्वेदी जिलाध्यक्ष .जयश्री राजपुत रूक्मणी दुबे कांकेर.दौपती साहू महासमुन्द .सकुन्तला चक्रर्वत्ती जिलाध्यक्ष कोरया सुचिता शर्मा बलरामपुर द्वारा नगाड़ा बचाकर समर्थन दिया गया
संघ द्वारा संघर्ष के चौथा दिवस 13 दिसंबर को जब राम रावण के युध्द के समय आदित्य हृदय स्रोत का सामूहिक पाठ
किया जायेगा.जब राम रावण के युध्द के समय राम भगवान के द्वारा रावण से युध्द मे विजय प्राप्त करने हेतु अगस्त ऋषि द्वारा बताये गये इस स्रोत का पाठ भगवान राम द्वारा किया गया था जो 9 मिनट 34 सेकण्ड का है ।उसी स्रोत का सामोहिक महिलाओ के धरना स्थल मे किया जायेगा .ताकि इस संघर्ष मे विजय प्राप्त हो सके।
धरना स्थल पर थाली .शंख .घन्ट.बजाकर उसकी ध्वनी से सरकार को संदेश दिया जायेगा
उक्त जानकारी .संघ के प्रान्ताध्यक्ष सरिता पाठक रायपुर शहरी अध्यक्ष रूक्मणी साहू द्वारा प्रेस को दिया गया।

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