आपके इनकम टैक्स रिफंड पर ब्याज नहीं मिला? ये हो सकती है वजह, जान लें कैसे होता है हिसाब

दिल्ली।इनकम टैक्स रिफंड ITR पर ब्याज मिलने का कुछ खास नियम है. हालांकि यह जरूरी नहीं कि सबको ब्याज मिले ही. लेकिन सरकार समय पर रिफंड नहीं देती है तो उसे ब्याज देना होता है. अगर आपका रिफंड समय पर नहीं मिला और ब्याज भी जुड़कर नहीं आया तो कुछ वजह हो सकती है. पहली वजह तो ये है कि टैक्स रिफंड की राशि हमेशा आपकी टैक्स देनदारी से 10 परसेंट ज्यादा होनी चाहिए. अगर 10 परसेंट से कम है तो रिफंड पर ब्याज नहीं मिलेगा. इस नियम को जान लेना इसलिए जरूरी है क्योंकि इससे आपका समय बचेगा. आप ब्याज के दायरे में आते हैं या नहीं, यह जान लेंगे तो आसानी होगी.

आइए जानते हैं कि टैक्स रिफंड पर ब्याज नहीं मिलने की क्या वजह हो सकती है. इसके लिए सबसे पहले अपनी टैक्स देनदारी को देख लें. इससे रिफंड का पता चल जाएगा. एडवांस टैक्स या सेल्फ एसेसमेंट टैक्स, टैक्स कलेक्टेड एट सोर्स या टीसीएस. टैक्स डिडक्टेड एट सोर्स या टीटीएस, फॉरेन टैक्स क्रेडिट के जरिये भरा गया टैक्स अगर आपकी टैक्स देनदारी से कम है तो रिफंड नहीं मिलेगा. दूसरे शब्दों में कहें तो टैक्स रिफंड तभी मिलेगा जब चुकाया गया टैक्स आपकी टैक्स लिमिट से ज्यादा हो.

कैसे मिलता है रिफंड

इनकम टैक्स एक्ट 1961 में रिफंड क्लेम का कोई खास नियम नहीं बताया गया है. इसके लिए आप साधारण तौर पर हाथ से एक आवेदन लिखकर टैक्स विभाग को दे सकते हैं. इसमें जिक्र करना होगा कि इनकम कितनी है और आपका डिडक्शन क्या बनता है. इसके लिए सबसे सही तरीका इनकम टैक्स रिटर्न फाइल का होता है. हमेशा ध्यान रखें कि आईटीआर सही तरीके से भरा गया हो. आपका आईटीआर इलेक्ट्रॉनिक वेरिफिकेशन कोड से भरा जाना चाहिए जो बैंक अकाउंट से जुड़ा होता है. इसमें आधार नंबर से जुड़े मोबाइल के ओटीपी का भी उपयोग होना चाहिए. आईटीआर फाइल करने के 120 दिनों के अंदर हस्ताक्षर किए गए आईटीआर-वी (एकनॉलजमेंट) को सेंट्रल प्रोसेसिंग सेंटर में भेजना होता है.

  • इतना कुछ करने के बाद ही कोई टैक्सपेयर रिफंड का हकदार हो सकता है. इसके बाद टैक्स विभाग यह देखता है कि रिफंड पर ब्याज देना है या नहीं. इसके लिए कुछ खास नियम हैं-
  • अगर रिफंड समय पर नहीं चुकाया गया है तो जिस दिन से रिफंड मंजूर हुआ और जिस दिन चुकाया गया, इस अवधि के हिसाब से ब्याज जोड़कर दिया जाता है
  • रिफंड पर ब्याज तभी दिया जाएगा जब रिफंड की राशि टैक्स देनदारी से 10 परसेंट ज्यादा हो. रेगुलर एसेसमेंट या सम्मरी एसेसमेंट में टैक्स देनदारी के बारे में पता चल जाता है
  • हर महीने 0.5 परसेंट के लिहाज से टैक्स पर ब्याज की गणना की जाएगी
  • मान लें किसी टैक्सपेयर ने 12.80 लाख रुपये का टैक्स चुकाया है जिसे टीडीएस के जरिये दिया गया है. लेकिन उसकी टैक्स लायबिलिटी 11.92 लाख रुपये बनती है. ऐसे में उसने 88,000 रुपये ज्यादा दिए हैं. टैक्सपेयर के बिना ब्याज के 88,000 रुपये ही लौटाए जाएंगे क्योंकि यह राशि कुल टैक्स देनदारी के 10 परसेंट से कम है
  • अगर रिफंड अमाउंट टैक्स देनदारी से 10 परसेंट से ज्यादा होता तो टैक्सपेयर को हर महीने 0.5 परसेंट के हिसाब से ब्याज मिलता. यह वित्तीय वर्ष की शुरुआत 1 अप्रैल से लेकर उस दिन तक जोड़ा जाता जिस तारीख को रिफंड दिया गया

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