आईएमए ने किया अव्यवहारिक नीतियों का विरोध..कहा-डॉक्टर.. भगवान नहीं इंसान हैं…

IMG-20170605-WA0742बिलासपुर— इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के चिकित्सकों ने 6 जून को कलमबंद हड़ताल का एलान किया है। आईएमए बिलासपुर इकाई ने पत्रवार्ता में बताया कि देश भर से आईएमए सदस्य और निजी चिकित्सक दिल्ली स्थित जंतर मंतर में मंगलवार को धरना प्रदर्शन कर सरकार की नीतियों का विरोध करेंगे। आईएमए सदस्य डॉ.रमणेश मूर्ति ने बताया कि प्रदेश से 15 आईएमए सदस्य पेनडाउन आंदोलन में शिरकत करने दिल्ली रवाना हो गये हैं।

                        आईएमए सदस्य डॉ.रमणेश मूर्ति, डॉ.आर.ए.शर्मा, डॉ.मेहता, डॉ.संतोष गेमनानी , और डॉ.नितीन जुनेजा ने पत्रकारों को बताया कि डॉ.भगवान नहीं इंसान होता है। वह चाहता है कि क्लिनिक तक पहुंचा मरीज अपने घर हंसते गाते जाए। लेकिन लोग उग्र हो जाते हैं। यह भूल जाते हैं कि डॉक्टर भी एक इंसान है। इसके चलते चिकित्सकों को शारीरिक,मानसिक और आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ता है।

                पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए डॉ.रमणेश मूर्ति ने बताया कि सरकार ने मेडिकल से जुड़ी नीतियों को इतना सख्त कर दिया है कि इससे सबसे ज्यादा नुकसान मरीजों को ही हो रहा है। इस दौरान उन्होने नीतियों में संशोधन की मांग करते हुए कहा कि संविदा नियुक्त चिकित्कों का शोषण किया जाए। रमणेश मूर्ति ने बताया कि डॉक्टरों को दवाई,जांच और उपचार की स्वायत्ता मिलनी चाहिए। इससे चिकित्सक संतोषप्रद माहौल में काम करेंगे। अधिक बंधन में  डॉक्टरों को डर के साए में काम करना होता है।

                मूर्ति ने बताया हिंसक माहौल में इलाज संभव नहीं है। देखने में आता है कि पीड़ितों की गुहार पर चिकित्सकों के खिलाफ कोर्ट से फैसला आता है। लेकिन हर्जाना तय करते समय संपत्ति को आधार बनाया जाता है। इस प्रकार का निर्णय देना चिकित्सकों के साथ अन्याय करना है। हम चाहते हैं कि चिकित्सकों को चिकित्सकीय शुल्क उपचार निर्धारण की स्वतंत्रता भी सरकार से मिले।

                आईएमए सदस्यों ने बताया कि जीजीएचएस से भुगतान में देरी के कारण अस्पताल संचालन में आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। मेडिक्लेम और टीपीए की नीतियों से मरीजों के उपचार में डाक्टर अपने आपको असमर्थ पा रहे हैं। पीएनडीटी एक्ट में संशोधन की सख्त जरूरत है। सदस्यों ने बताया कि सरकारी संस्थानों में केवल 20 प्रतिशत मरीज इलाज कराते हैं। निजी चिकित्सालयों में 80 प्रतिशत मरीजों का इलाज किया जाता है। लेकिन श्रेय हमें नहीं मिलता है।

           पत्रवार्ता के दौरान मूर्ति ने एक सवाल के जवाब में बताया कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों में निजी चिकित्सक भी सहयोग करते हैं। लेकिन ना तो सब्सिडी मिलती है और ना ही मुआवाजा। मूर्ति ने बताया कि चिकित्सकों के खिलाफ जब आरोप सिद्ध ना हो परामर्शदाता का नाम  सार्वजनिक नहीं किया जाए। उन्होने मीडिया ट्रायल पर भी लगाम की बात कही।

                आईएमए सदस्यों ने बताया कि दिल्ली में सरकार के सामने हम अपनी प्रमुख 20 बिन्दुओं के सामने रखेंगे। इसके पहले राजघाट पहुंचकर बापू की समाधि पर सभी लोग पुष्पअर्पित करेंगे।

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