आत्महत्याःकांग्रेस ने कहा किसान…प्रशासन का इंकार

IMG-20151212-WA0006बिलासपुर—मस्तुरी विधानसभा के बेलटुकारी गांव में किसान ने कर्ज से परेशान होकर मौत को गले लगा लिया। सूखे की मार झेल रहे किसान के परिजनो की माने तो मोहन ने खेती के लिए कर्ज लिया था। उसके पास डेढ़ एक़ड़ निजी और बाकी पांच एकड़ अधिया की खेती थी। कर्ज के डर से उसने फांसी को गले लगा लिया।

                   मोहन चंद्राकर पिता हीरालाल चंद्राकर ने खेती किसानी के लिए कुछ लोगो से  कर्ज लिया था। उसके पास मात्र डेढ़ एकड़ पुस्तैनी जमीन थी। इसके अलावा वह 5 एकड़ पर अधिया काम करता था। जिससे वह अपने परिवार का बेहत्तर पालन-पोषण कर सके । कम बारिश होने की वजह खेती में काफी नुकसान हो गया। इसके बाद वह कर्ज को लेकर  काफी परेशान था। कर्ज कैसे पटायेगा इसी बात को लेकर चिंतित था। मोहन ने गुरूवार की रात को फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली ।

                  मामले की जानकारी लगते ही मस्तुरी विधायक दिलीप लहरिया और जिला कांग्रेस अध्यक्ष राजेन्द्र शुक्ला अपने समर्थको के साथ पीडित परिवार से मिलने बेलटुकरी पहुचे ।दिलीप लहरिया ने बताया कि युवा किसान की मौत सरकार की नाकामी है। तीन महीने से सूखा सूखा की रट सरकार लगा रही है। लेकिन राहत अभी तक नहीं पहुंची। यदि समय रहते सूखे के खिलाफ वर्क प्लान कर लिया जाता तो आज मोहन लाल हमारे बीच में होता। लहरिया ने् कहा कि मोहन के घर की हालत काफी नाजुक है। तीन मासूम बच्चे हैं। जिनमे एक बच्चे की हालत बहुत नाजुक है। घर में खाने के लिए दाने नहीं है। आखिर ऐसा कब तक चलेगा। उन्होने कहा कि इस मसले को मै विधानसभा में उठाउंगा।

                         सीजी वाल से राजेन्द्र शुक्ला ने कहा कि मोहन की मौत ने यह साबित कर दिया कि किसान कितना हताश और परेशान है। एक तरफ उसके घर में खाने को दाने नहीं है। ऊपर से ऋण वसूली समझ से परे हैं। शुक्ला ने बताया कि किसान न्याय यात्रा के समय ही बेलटुकरी क्षेत्र की हालत अच्छी नहीं देखने मिली। खेत से धान नहीं केवल पशुओं के लिए चारा निकल रहा है। बावजूद इसके सरकार ने किसानों के दुख को ओर ध्यान ना देते हुए कर्ज वसूली का एलान कर दिया। ऐसी सरकार को सत्ता में रहने का अधिकार नहीं है।

अनुविभागयी रिपोर्ट

                    मस्तूरी एसडीएम मस्तूरी टेकचंद अग्रवाल ने बताया कि पीड़ित परिवार ने कहा कि मोहन लाल की मौत भूख और सूखे से नहीं हुई है। अनुविभागीय अधिकारी जांच के अनुसार मृतक आंशिक रूप से विकलांग था। नियमित रूप से पेंशन मिलता था।जयरामनगर पोस्ट आफिस में जमा होता था। दो माह पहले यहां से 12000 रूपये की निकासी कर किराना दुकान खोला था। मृतक के परिवार के नाम पर मनरेगा जाब कार्ड है। मृतक के परिवार को गरीबी रेखा राशन कार्ड से 28 किलो प्रति माह राशन मिलता था। मृतक परिवार ने 6 दिसंबर को पी.डी.एस. से चावल, शक्कर तथा मिट्टी तेल का उठाव किया है। मृतक के पास 19 कृषकों के खेत का फसल सर्वें रिपोर्ट लिया गया। जिसमें मात्र 3 किसानों का फसल क्षति 50 प्रतिशत से अधिक है। मृतक के परिवार के बोये गये फसल की क्षति 33 प्रतिशत से अधिक नहीं है। कृषि का कार्य उनका मंझला भाई नरेन्द्र करता था। मृतक खेती का कार्य नहीं करता था। वह किराने दुकान और परिवार की आर्थिक स्थिति को लेकर चिंतित रहता था।

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