धन नहीं योग्यता का होता है सम्मान…शैलेष पाण्डेय

IMG_20151101_183535बिलासपुर– नवयुवक  कान्यकुब्ज विकास समिति   का आज इमलीपारा स्थित सामुदायिक भवन में भव्य कार्यक्रम का आयोजन हुआ। कार्यक्रम में कान्यकुब्ज समाज के आम और खास सभी दिग्गज उपस्थित हुए। इस मौके पर समाज की पत्रिका “मार्ग” का विमोचन पूर्व विधायक वित्त आयोग के पूर्व अध्यक्ष  विरेन्द्र पाण्डेय, सीवी रमन विश्वविद्यालय के कुल सचिव शैलेष पाण्डेय, बिलासपुर वन मण्डलाधिकारी अमिताभ वाजपेयी,फिल्मकार प्रकाश अवस्थी, वरिष्ठ पत्रकार रूद्र अवस्थी, समाज के अध्यक्ष रघुनाथ दुबे ने किया। इस मौके बार सभी वक्ताओं ने बारी बारी से कान्यकुब्ज समाज के विकास और दशा पर विचार रखे।

                                 नव युवक कान्यकुब्ज विकास समिति   की पत्रिका “मार्ग” का विमोचन समाज के अपने क्षेत्र के दिग्गज लोगों ने एक साथ किया। पत्रिका विमोचन से पूर्व वरिष्ठ पत्रकार और संपादक रूद्र अवस्थी ने पत्रिका के उद्देश्यों को सबके सामने रखा। उन्होने  कहा कि यह समाज के लिए मार्ग पत्रिका मील का पत्थर साबित होगी। ऐसा मुझे विश्वास है। उन्होंने टीम के सभी सदस्यों को धन्यवाद भी दिया। रूद्र अवस्थी ने कहा कि भविष्य में समय के साथ पत्रिका में कान्यकुब्ज समाज की सभी गतिविधियों को ना केवल शामिल किया जाएगा। बल्कि लोगों के उम्मीद के अनुरूप इसे ढाला भी जाएगा। उन्होने कहा परिवार के बाद समाज ही हमारी पहचान है। जो देश और विश्व की तमाम गतिविधियों से हमें दो चार कराता है। अवस्थी ने कहा  कि समय के साथ हमें नए आय़ाम तय करना है पुरानी लकीरों को पीटने से कुछ हासिल नहीं होना है।

IMG_20151101_175742                                           कार्यक्रम को संबोधित करते हुए रमन विश्वविद्यालय के कुल सचिव शैलेष पाण्डेय ने कहा कि विप्र समाज  हमेशा से दृढ़ इरादों वाला रहा है। उसने जहां चाहा. जब चाहा, जैसा चाहा, रास्ता बना लिया। वह हमेशा से प्रणम्य रहा है। आगे भी रहेगा। पाण्डेय ने उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि हो सकता है कि अन्य समाज में पद और धन का महत्व हो…लेकिन विप्र समाज में ऐसा नहीं होता। इसके विपरीत विप्र समाज वरिष्ठता और योग्यता को हमेशा महत्व दिया जाता है। यह परम्परा कोई पालन करे या ना करे हम हमेशा पालन करते हैं। उन्होंने कहा कि विप्र समाज ने देश और विश्व को नई दिशा दी है। आज हर जगह उन्हें प्राथिमकता के साथ लिया जाता है। कुल सचिव ने कहा कि मेरे गुरू विप्र से नहीं थे। लेकिन विप्र समाज के सानिध्य का ही असर है कि आज मेरे गुरू बनने का अवसर किसी को मिला। जो भी व्यक्ति, चाहे वह किसी भी धर्म या जाति का हो यदि वह सर्वजन हिताय की बातें करता है तो उसका श्रेय विप्र को ही जाता है। हमें अपनी पठन पाठन की परम्परा को ना केवल बनाए रखना है बल्कि इसका विस्तार भी करना है।

                                      उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए वन मण्डलाधिकारी अमिताभ वाजपेयी ने कहा कि मुझे अपने समाज पर गर्व है। मुझे आमंत्रित किया गया। इसके लिए समाज के वरिष्ठों का शुक्रगुजार हूं। वाजपेयी ने बताया कि समाज को मिलजुल कर आगे बढ़ना होगा। कार्यक्रम को प्रसिद्ध फिल्मकार प्रकाश अवस्थी ने भी संबोधित किया। उन्होंने कहा कि जमाना तेजी से बदल रहा है। हमें भी इस बदलाव में अपनी विशिष्टता के साथ चलना होगा। अन्यथा हम बहुत पीछे हो जाएंगे। प्रकाश अवस्थी ने बताया कि मेरा ग्राउण्ड फिल्म से है लेकिन यह कह सकता हूं कि मेरी ऊंचाई मेरे अपने समाज से है। इसके बिना मैं अपने आप को कहीं नहीं पाता हूं। अवस्थी ने कहा समय के साथ चलने की जरूरत है। मार्ग पत्रिका के विमोचन का जिक्र करते हुए प्रकाश ने  कहा कि इस पत्रिका से हमारा मार्ग आसान होगा। पत्रिका के संपादन के लिए उन्होंने रूद्र अवस्थी को विशेष रूप से धन्यवाद दिया।

IMG_20151101_175724                                  कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वित्त आयोग के पूर्व अध्यक्ष विरेन्द्र पाण्डेय ने व्यवस्था और जटिल परंपराओं पर जोरदार प्रहार किया। उन्होंने कहा कि हमारे त्याग और व्यवहार में मिलावट ने घर कर लिया है। हम परंपराओं का अर्थ गलत निकालने लगे हैं। गेरूआ कपड़े का अर्थ समझे या ना समझें लेकिन उसका अंधानुकरण कर रहे हैं। अंधानुकरण किसी भी समाज के लिए हितकर नहीं होता है। उन्होंने कहा कि विप्र हमेशा से बौद्धिक रहा है। ज्ञान बांटकर सभी समाज को दिशा देने का काम किया है।  आज यदि वह कमजोर है तो इसके कारण भी हम हैं। पाण्डेय ने बताया कि ज्ञान की सीमा को धन और एश्वर्य से तौलना बेवकूफी है। यदि सच्चे मन और बिना किसी पूर्वाग्रह से विप्र समाज अपना काम करता रहे तो उसे कोई हिला नहीं सकता है। कई कथाओं और उदाहरणों के जरिए उपस्थित लोगों को प्रेरक और रोचक जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि यदि हम अपनी प्रगति के कारक हैं तो गिरावट के भी कारक हैं।।इसलिए विप्र समाज को एक होने के साथ नेक भी होना होगा। मार्ग पत्रिका निश्चित रूप से इस अभियान में सहायक होगी।

                            कार्यक्रम को कान्यकुब्ज समाज राजनांदगाँव के अध्यक्ष राजेन्द्र कुमार दीक्षित  ने भी संबोधित किया। उन्होंने कहा कि जब भी ऊंचाई पर किसी विप्र को देखता हूं तो मन गदगद हो जाता है। अब पत्रिका हमारे बच्चों की अपलब्धियों को सबके सामने लाएगा। हम बेशक कहीं दूर हों लेकिन मार्ग के जरिए हमेशा एक दूसरे की बातें पहुचती रहेंगी। कान्यकुब्ज समाज भिलाई के राधेश्याम गोविंद बाजपेयी और महिला समिति की उषा किरण बाजपेयी ने भी सम्बोधित किया। नवयुवक कान्यकुब्ज विकास समिति के अध्यक्ष पं. रघुनाथ दुबे ने  स्वागत भाषण दिया और समाज की गतिविधियों के बारे में बताया।  मनोज तिवारी ने आभार प्रदर्शन किया और संचालन अनिल तिवारी कर रहे थे।कार्यक्रम को सफल बनाने में अरविंद दीक्षित, मनोज तिवारी, चन्द्र प्रकाश बाजपेयी, शिवा मिश्रा, रीतेश शुक्ला,मनोज शुक्ला, डा. आरती पाण्डेय,स्वपनिल शुक्ला,गोपाल मिश्रा, डॉ. राजीव अवस्थी,रामप्रसाद शुक्ला,अशोक त्रिवेदी, शैलेष बाजपेयी,राजकुमार बाजपेयी, प्रकाश तिवारी,राजेन्द्र तिवारी आदि सदस्यों की सक्रिय भूमिका रही।कार्यक्रम में समाज की प्रतिभाओँ का सम्मान किया गया। इस अवसर पर शहर के जाने-माने कलाकार जी. उमा महेश ने संगीत निशा में गीत प्रस्तुत कर सभी को भाव-विभोर कर दिया।

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