सरकारी जमीन बेचने वाले पटवारियों पर खतरा…कलेक्टर ने तैयार की लिस्ट

collector dwara masturi me baithak (3)बिलासपुर—बिल्डरों और जमीन माफियों की तालुकदारी करने वालों की खैैर नहीं। सूत्रों के अनुसार ऐसे पटवारी, आरआई पर कभी भी कार्रवाई हो सकती है। जिन्होने लम्बे समय से सरकार से वेतन लेकर बिल्डरों की सेवा की है…उन पर कभी भी पी.दयानन्द की गाज गिर सकती है। कलेक्टर दयानन्द की नजर जमीन माफिया परस्त बिल्डरों और जमीन दलालों की जी हुजूरी करने वाले पटवारी और आरआई पर है।

                      सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार किसी भी समय बिल्डर और जमीन माफियों की सेवा करने वाले पटवारियों के खिलाफ कलेक्टर एक्शन ले सकते हैं। कलेक्टर को जिले के सभी पटवारियों की फीड बैक मिल चुकी है। जानकारी के अनुसार कुछ स्व-नामधन्य पटवारियों ने एकड़ों और हेक्टेयरों सरकारी जमीन का पट्टा फर्जीवाड़ा कर जमीन माफियों के नाम किया है। इसमें लिंगियाडीह, बिरकोना, बेलतरा,रमतला और अमेरी हल्का क्षेत्र प्रमुख है।

                                       सूत्रों ने बताया है कि कलेक्टर ने जांच पड़ताल के बाद दो एक पटवारियों के खिलाफ सख्त कदम उठाने का फैसला कर लिया है। इसमें विशेष तौर पर लिंगियाडीह,बिरकोना और अमेरी के दो एक पटवारियों के नाम है। उन पटवारियों पर भी गाज गिर सकती है जिन्होने कभी अपने हल्के में रहकर सरकारी जमीन का पट्टा नम्बरी जमीन बनाकर दिया है। इनमें कोनी और बिरकोना पटवारी का नाम प्रमुख है। सकरी का एक पटवारी की शिकायत कलेक्टर को लगातार मिल रही है। संभावना जाहिर की जा रही है कि उस पटवारी पर भी गाज गिर सकती है। बिरकोना में भी ऐसा ही कुछ है..बताया जा रहा है किसी पटवारी ने कई एकड़ सरकारी जमीन का पट्टा बनाया है।

                सूत्रों की माने तो इस बात की भनक पटवारियों को लग गयी है। जिन्होने बिल्डरों औऱ जमीन दलालों के लिए पहले और बाद में सरकारी जमीन को नम्बरी बताकर पट्टा बनाया। सभी पटवारियों की दिल की धड़कनें तेज हो गयी है। बताया जा रहा है कि कलेक्टर की हिट लिस्ट में नजुल विभाग का एक बाबू कम आरआई का भी नाम है। जिसनें रमतला में अपनी बेटी के नाम सरकारी जमीन को हथिया लिया है। जानकारी तो यह भी है कि नजूल के बाबू ने आदिवासी जमीन को फर्जीवाड़ा कर किसी राजपूत को बेचा है। यह जानते हुए भी कि आदिवासी फौजी था। बावजूद इसके आदिवासी जमीन को बाबू ने आधा हथिया लिया है। बाकी आधी जमीन को किसी सामान्य जाति को बेच दिया है। रजिस्ट्री के समय बाबू ने फर्जी आदिवासी भी खड़ा किया था। तहसील से जमीन बेदखली का भी आदेश हुआ लेकिन आज तक आदेश का पालन नहीं किया गया।

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