मेधा के पीछे किसकी थी मेधा..दोनो टॉपर बच्चियों ने क्यों किया याद?.. स्कूल शिक्षा विभाग ने क्यों की चर्चा..?

बिलासपुर–जब लोगों का काम बोलने लगे तो समझो उसने कुछ अच्छा किया है। और साथ मे चर्चा होने लगे तो समझो उसने कुछ अलग हटकर किया है। जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता है। कुछ अधिकारी ऐसे ही होते हैं। कड़क.. लेकिन मिलनसार, बिलासपुर के तात्कालीन कलेक्टर पी.दयानन्द कुछ ऐसी ही व्यक्ति हैं। आज वह बिलासपुर के कलेक्टर नहीं है। लेकिन दोनों बच्चों के परिजनों के अलावा जब संस्था की प्राचार्या ने बताया कि तनु और नीलू प्रिया उइके की सफलता में  पी.दयानन्द का अहम योगदान है..सुनकर आश्चर्य हुआ। शिक्षकों और विभाग के कर्मचारियों ने जानकारी दी कि मेधा कोचिंग के पीछे दयानन्द की मेधा थी..तो समझते देर नहीं लगी कि बिलासपुर की नाक बचाने में दयानन्द की भूमिका निश्चित रूप से बहुत बड़ी है।

                                      यूं तो कलेक्टर दयानन्द का स्वभाव सख्त प्रशासक के साथ मिलनसार व्यक्तित्व के रूप में बिलासपुर की जनता ने देखा है। लेकिन 12 वीं परीक्षा परिणाम निकलने के बाद लोगों ने यह भी देखा कि तत्कालीन कलेक्टर ने ऐसा प्लेटफार्म तैयार किया जिसे भूलना.. आर्थिक रूप से कमजोर परिवार के होनहार मेधावी बच्चों के लिए बहुत मुश्किल होगा।

              बिलासपुर कलेक्टर रहते हुए पी.दयानन्द को शासकीय विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों के बीच जब तब पहुंचने का अवसर मिला। क्योंकि उन्हें छात्र छात्राओं और पढ़ने वाले बच्चो से बहुत लगाव था। खासकर ऐसे बच्चों से उन्हें बात करने में बहुत ही अच्छा लगता था जो पढ़ने में तेज लेकिन आर्थिक रूप से बहुत गरीब परिवार से थे।

             इन तमाम बातों को देखते हुए तत्कालीन कलेक्टर ने प्रतिभावान छात्र-छात्राओं को मेडिकल एवं इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी कराने का सपना देखा। जिला शिक्षा विभाग के अधिकारियों और एक्सपर्ट लोगों से चर्चा कर कोचिंग संस्थान खोलने का फैसला किया। नाम दिया मेधा… यानि मेडिकल एन्ड इंजीनियरिंग डायरेक्टे़ड हानिंग अकेदमी । पी दयानन्द ने निर्देश दिया कि जिला स्तर पर प्रवेश परीक्षा आयोजित कर आर्थिक रूप से कमजोर छात्र छात्राओं को मेधा कोचिंग में भर्ती किया जाए। खर्च जिला प्रशासन वहन करेगा।  यहां स्कूली शिक्षा के अलावा विषयों के पठन पाठन के साथ मेडिकल और इंजीनियरिंग में प्रवेश के लिए तैयारी भी करायी जाए।

              अभियान के तहत स्कूल का चुनाव उस्लापुर हायरसेकेन्डरी किया गया। यहां जिला स्तर पर प्रवेश परीक्षा में चयनित बच्चों को रखा गया। विषय विशेषज्ञों के मार्ददर्शन में मेडिकल और इंजीनियरिंग की चाहत रखने वाले बच्चों को कोचिंग दिया जाने लगा।  एक साल बाद जब 12 वीं बोर्ड परीक्षा का परिणाम सामने आया तो.. इसी स्कूल के दो बच्चियों ने टापर सूची में नाम दर्ज कर  बिलासपुर का नाक कटने से बचा लिया।   

                                     कुमारी तनु यादव ने मेधा कोचिंग में रहकर बायलोजी से 12 की पढ़ाई की। तनु यादव ने 96.60 प्रतिशत अंको के साथ 12 वीं की मेरिट सूची में तीसरा रैंक बनाया। लिम्हा की रहने वाली कुमारी .नीलूप्रिया उईके ने 95.40 प्रतिशत अंकों के साथ 8वां स्थान हासिल किया। और दयानन्द की सोच को साकार किया।

कैसी होती है तेयारी

              साल 2017-18 में तत्कालीन कलेक्टर पी दयानंद के प्रयास मेधा एकेडमी की स्थापना हुई। कोचिंग में मेडिकल एवं इंजीनियरिंग के क्षेत्र में जाने के इच्छुक ऐसे बच्चे जो महंगे कोचिंग में प्रवेश नहीं ले सकते, उन्हें कोचिंग दिया जाने लगा। विभिन्न शासकीय विद्यालयों से 10 वीं बोर्ड परीक्षा में अच्छे अंक से उत्तीर्ण छात्र-छात्राओं का चयन, प्रवेश परीक्षा के माध्यम से साल  2018-19 के लिए किया गया।  मेधा कोचिंग का केन्द्र शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय उस्लापुर को बनाया गया।

              स्कूल में चयनित सभी बच्चों को सेलेबस के साथ-साथ मेडिकल एवं इंजीनियरिंग में प्रवेश के लिये कोचिंग दिया गया। संस्था में पढने वाले छात्र-छात्राओं की लगन, परिश्रम और बेहतर प्रदर्शन को देखते हुए स्कूल प्राचार्य शकुंतला ठाकुर ने आवश्यक संसाधन एवं वातावरण उपलब्ध कराया।

संस्था के 18 बच्चों को मिला 12 वीं 80 प्रतिशत अंक

            प्राचार्या शकुंता ठाकुर ने बताया कि संस्था में 36 छात्राएं और 6 छात्र वर्तमान में अध्ययनरत हैं। इनमें से 18 बच्चों ने 12वीं बोर्ड परीक्षा में 80 प्रतिशत से ज्यादा अंक हासिल किया है। यहां मेडिकल एवं इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी के साथ-साथ बोर्ड परीक्षा के लिए समय-समय पर विषय विशेषज्ञों के माध्यम से छात्र-छात्राओं को विशेष तैयारी करायी गयी है।

तनु और नीलू ने अभियान को सफल बनाया

       प्राचार्य ने बताया कि नीलू और तनु ने तात्कालीन कलेक्टर के सपनों को सच कर दिखाया। यदि इन्हें सही मार्गदर्शन नही मिलता तो शायद टापर की सूची में स्थान बनाना मुश्किल था। लेकिन इन बच्चों ने मेधा की स्थापना को सही साबित किया। प्रावीण्य सूची में तीसरा स्थान लाने वाली कु.तनु यादव के पिता टेलरिंग का काम करते हैं। जबकि नीलू उइके पिता गरीब किसान हैं।

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