सफाईकर्मियों ने ठोंकी ताल..कचरे का ढेर बना मुंगेली शहर..VIP-CMO ने किया दम…कांग्रेस नेता भी परेशान

 मुंगेली—- मुंगेली नगर पालिका सीएमओ के रसूख के आगे मुंगेली जिला प्रशासन के अधिकारी ही नहीं बल्कि आम जनता और कांग्रेस संगठन के कद्दावार नेता भी नतमस्तक हैं। अब सफाई कर्मचारियों ने भी ताल ठोंक दिया है। पिछले चार दिनों से सफाई नहीं होने चलते मुंगेली शहर कचरे के ढेर पर बैठा है। या यूं कहें कि रसूखदार सीएमओ की तानाशाही के चलते मुंगेली शहर में कचरों का अंबार लग गया है। बावजूद इसके व्हीआईपी रसूख रखने वाले सीएमओ के कान में जूं तक नहीं रेंग रहा है।

                   जानकारी हो कि पिछले तीन दिनों से मुंगेली नगर पालिका के सफाई कर्मचारी वेतन की मांग और की जा रही गड़ब़ड़ियों को लेकर हड़ताल पर हैं। जिसके चलते मुंगेली शहर की सफाई व्यवस्था बुूरी तरह से चरमरा गयी है। हर तरफ बदबू आ रही है। आम जनता और दुकानदार व्यवस्था को कोसने के साथ घर और दुकान में डीओ का उपयोग कुछ ज्यादा करने लगे हैं। बावजूद इसके गंदगी इतनी बढ़ गयी है कि शहर में सांस लेना मुश्किल हो गया है। लेकिन सीएमओ पर कोई असर पड़ता नहीं दिखाई दे रहा है। वह भी जब सफाई कर्मचारी सड़क और कार्यालय के सामने सीएमओ के खिलाफ मुर्दाबाद के नारे लगा रहे हैं।                

                हड़ताल पर गए सफाई कर्मचारियों ने बताया कि हमे हड़ताल पर जाना अच्छा नहीं लग रहा है। लेकिन सीएमओ ने हालात ऐसे पैदा कर दिए हैं कि सड़क पर उतरना पड़ा। हम जानते हैं की सीएमओ रसूखदार और मंत्री संरक्षण वाला है। लेकिन इसे कब तक बर्दास्त किया जा सकता है। हम यह भी जानते हैं कि सत्ताधारी दल के कांग्रेस नेताओं की भी दाल सीएमओ के सामने नहीं पकती है। लेकिन हम अन्याय आखिर कब तक बर्दास्त करेंगे। इसलिए पेट और परिवार के लिए सीएमओ के खिलाफ सड़क पर उतरना पड़ा है।

                     हड़ताल पर जाने की वजह बताते हुए सफाई कर्मचारी संघ के नेता मनोज कुमार और संघ के अध्यक्ष कमलेश चौहान ने बताया कि प्लेसमेंट सफाई कर्मियों को वेतन से ईपीएफ और जीपीएफ की राशि में कटौती तो की जा रही है। लेकिन हम पुख्ता जानकारी है कि खाते में पिछले 15 महीने की राशि तक जमा नहीं की गयी है। इसके अलावा राशि का कोई हिसाब-किताब भी नहीं है।

      दोनो नेता ने आरोप लगाया है कि नगर पालिका काम तीन दिन का लेता है। लेकिन 29 दिन का ही वेतन देता है। फरवरी में महीने में मात्र 15 दिन का ही वेतन दिया गया। मामले की जानकारी सीएमओ को दी गयी। लेकिन उन्होंने वही किया जिसका अनुमान था। अन्त में हमें 12 जून से काम बंद करने का अल्टीमेटम दिया गया। फिर भी सीएमओ ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया। और हमें हड़ताल पर जाने को मजबूर होना पड़ा। 

   कांग्रेसियों ने हटाने की हटाने की मांग

        नगर पालिका विभाग के कुछ अधिकारियों ने बताया कि साहब का रसूख ऊंचा है। यही कारण है कि वह अधिकारियों की सुनना तो दूर..सत्ता संगठन के नेताओं की भी नहीं सुनते है। अधिकारी ने जानकारी दी कि एक साल पहले नेवरा में गौठान लोकार्पण के दौरान राजेन्द्र पात्रे को हटाने के लिए तात्कालीन नगर पालिका परिषद महिला अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री को आवेदन दिया। लेकिन नगरीय प्रशासन मंत्री ने अपना आदमी कह कर बचा लिया।

नगरपालिका अध्यक्ष से भी शिकायत

             सफाई कर्मचारी संघ के नेता कमलेश,मनोज समेत अन्य लोगों ने बताया कि हम सबने सामुहिक हड़ताल पर जाने से पहले नगर पालिका अध्यक्ष से लिखित शिकायत की। अध्यक्ष को बताया गया कि सीएमओ राजेन्द्र पात्रे की तानाशाही में काम करना मुश्किल है। यदि पात्रे का स्थानांतरण नहीं किया जाता है तो काम करना मुश्किल होगा। लेकिन यहा भी पात्रे का रसूख काम किया। और हम लोगों को हड़ताल पर जाना पड़ा।

थाने में प्रताड़ना की शिकायत

                    हड़ताल पर गए लोगों ने बताया कि सीएमओ की प्रताड़ना से परेशान होकर सामुहिक शिकायत थाने में की। बावजूद इसके अभी तक पुलिस प्रशासन ने कोई कदम नहीं उठाया। समझने का प्रयास भी नहीं किया कि आखिर किस प्रकार की प्रताड़ना का सामना करना पड़ रहा है।

कलेक्टर से शिकायत

                सफाई कर्मचारियों ने बताया कि हम लोग तीन चार दिन से हड़ताल पर है। मामले की शिकायत कई बार जिला प्रशासन से की गयी। लेकिन जिला प्रशासन ने या तो गभीरता से नहीं लिया । या फिर जिला प्रशासन का नियम व्हीआईपी सीएमओ के सामने दम तोड़ दिया।

मांग पूरी होने पर तोड़ेंगे हड़ताल

          मनोज कुमार और चौहान ने बताया कि जब तक मांग पूरी नहीं होती है। हम लोग हड़ताल नहीं तोड़ेंगे। सीएमओ की तानाशाही को बर्दास्त करना मुश्किल हो गया है। जिला प्रशासन से मांग है कि सीएमओ को यहां से हटाया जाए। यद्यपि एसडीएम ठाकुर ने आश्वासन दिया है कि नगर पालिका अधिकारीयों से हड़ताल की वजह और समस्या दूर करने को लेकर चर्चा करेंगे।

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