दशरथ हत्याकाण़्ड में पुलिस को फटकार…

बिलासपुर— मंगला चौक स्थित व्यवसायी दशरथ लाल खण्डेलवाल और उनकी पत्नी विमला देवी पर चाकू से हमला करने वाले दो संदेहियो को पुलिस की जांच में हुई लापरवाही के चलते कोर्ट ने दोष मुक्त कर दिया है। मामले में आईजी ने संज्ञान लेने की बात कही है। दशरथ खण्डेलवाल की हत्या 22 नवम्बर 13 को दिन दहाडे घर में घुसकर हुई थी।

                       मंगला चौक से चंद कदम दूर बिलासपुर के प्रसिद्ध व्यवसायी दशरथ लाल खण्डेलवाल और उनकी पत्नी को दो अज्ञात नकाबपोशों ने घर में घुसकर हत्या कर दी थी। चाकू हुए हमले में दशरथ लाल खण्डेलवाल ने मौके पर ही दम तोड़ दिया था। पत्नी विमला देवी को गंभीर हालत में उपचार के लिए अस्पताल में दाखिल कराया गया था।  छः माह जांच के बाद पुलिस ने मामले का खुलासा करते हुए दो लोगो के साथ एक नाबालिग पर हत्या का प्रकरण दर्ज किया।

                   पुलिस ने उस दौरान अपनी पीठ थपथपाते हुए दयालबंद नरियल कोठी निवासी मनोहर सिंह उर्फ विक्की 20 साल और टिकरापारा निवासी विजय चौधरी के अलावा महासमुंद के एक नाबालिग को हिरासत में लिया था।  पुलिस ने खुलासे में बताया था कि पुराने हाईकोर्ट बिल्डिंग के सामने स्थित मीनाक्षी सेल्स में काम करने वाले मनोहर ने साल भर पहले दशरथ लाल खण्डेलवाल के घर चिमनी मरमत करने गया था।इसी दौरान कर्मचारियों ने विमाल देवी को लॉकर में मोटी रकम रखते देख लिया। 22 नवम्बर 13 को अपने साथी विजय के साथ दशरथ लाल के घर पहुचा और दरवाजा खोलते ही चाकू से ताबडतोड हमला कर घायल कर दिया।

                        आरोपियों ने घर अंदर घुसकर बगल के कमरे में विमला देवी को बंद कर दिया। गमछे से चेहरा छुपाये दोनो आरोपियो को विमला देवी नही पहचान पायी थी। मामले में सिविल लाइन पुलिस ने मौसाजी उर्फ दशरथ खण्डेलवाल के मोबाइल को महासमुंद के जंगलो से टूटी अवस्था में जब्त किया। खुलासे के समय दावे और वादे बहुत हुए। पुलिस ने अंधे कत्ल की गुत्थी को सुलझाते हुए दो आरोपियो को 25 मार्च 14 को गिरफ्तार किया।

                             जिला एवं सत्र न्यायालय में एडीजे गीता नवारे की न्यायालय में पेशी के दौरान पुलिस ने लम्बे समय तक एक भी साक्ष्य और सबूत पेश नही किया। संदेहिया को संदेह का लाभ देते हुए कोर्ट ने दोष मुक्त कर दिया। पुलिस को फटकार लगाते हुए उचित साक्ष्य के साथ मामला कोर्ट रूम तक लाने की सलाह दी है।

                                मालूम हो की हत्या लूट या अन्य गंभीर मामलो में पुलिस उचित समय पर साक्ष्य रिपोर्ट और गवाह पेश नही कर पाती है। जिसके चलते न्यायालय से आरोपी बरी हो जाते हैं। सुप्रीम कोर्ट से लेकर हाईकार्ट तक पुलिस को शर्मिंदा होना पड़ता है।

                          दशरथ लाल खण्डेलवाल हत्याकांड मामले में संदेहीयो के कोर्ट से दोष मुक्त होने के मामले में जब पुलिस महानिरीक्षक पवन देव ने बताया कि जांच में क्या खामिया रह गयी मुझे जानकारी नही है। मेरे पास मामला आने के बाद किन किन बिन्दुओ में जांच के दौरान लापरवाही की गयी है। इस पर गौर किया जाएगा। बहरहाल उन तक रिपोर्ट नहीं पहुंची है।

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