जोगी की जातिःजांच में देरी..कारणों की होनी चाहिए जांच-नन्दकुमार साय

nand kumar saiबिलासपुर—राष्ट्रीय आदिवासी आयोग अध्यक्ष नंद कुमार साय ने कहा कि जोगी की जाति मामले में देरी क्यों हुई। इस बात की जांच होनी चाहिए। हाईपावर कमेटी का गठन बहुत पहले हो गया था। सुप्रीम कोर्ट ने जाति मामले में छानबीन का आदेश दिया था। बावजूद इसके जांच रिपोर्ट को पेश करने में पांच साल से अधिक लग गये। इसलिए जरूरी है कि जाति में मामले में जांच में क्यों देरी हुई इसकी जांच होनी चाहिए।
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                      राष्ट्रीय आदिवासी आयोग के अध्यक्ष नंद कुमार साय ने पत्रकारों से बातचीत की । उन्होने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने जोगी की जाति मामले में हाईपावर कमेटी का गठन कर जांच का आदेश दिया था। हाईपावर कमेटी भी बनी। लेकिन रिपोर्ट पेश करने में पांच साल से अधिक समय लग गया। इस देरी ने कई प्रकार के संदेह को जन्म दिया है। इसलिए जरूरी है कि जोगी की जाति मामले की रिपोर्ट पेश करने में देरी के कारणों का पता लगाया जाना चाहिए। जरूरी है कि जांच में के कारणों का पता लगाने जांच कराई जाए।

                          जाति मामले में एक सवाल के जवाब में राष्ट्रीय आदिवासी आयोग के अध्यक्ष ने कहा कि बहुत लोग हैं जो फर्जी जाति सर्टिफिकेट बनवाकर आदिवासियों के हक खा रहे हैं। जोगी जैसे कई मामले प्रदेश में है..इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है। साय ने कहा कि जोगी की जाति मामला अमेरिकी राष्ट्रपति केे वाटरगेट मामले से मिलता जुलता है। इसलिए जाति मामले को जोगी गेट काण्ड कहें तो गलत नहीं होगा। छानबीन में फर्जी जाति को लेकर बहुत से चेहरे सामने आ जाएंगे।

                      रेलवे की कार्यप्रणाली से नाराज नदकुमार साय ने कहा कि रेलमंत्रालय ने अभी तक आदिवासियों को सिस्टम में जगह नहीं दिया है।  रेल विभाग ने अब तक निर्धारित आरक्षण का फायदा आदिवासियों को नहीं दिया है। मामले को दिल्ली में मंत्रालय और बड़े नेताओं के सामने रखा जाएगा। साय ने कहा कि रेलवे के पास बेशुमार जमीन है। लेकिन उसका समुचित उपयोग नहीं किया जा रहा है। रेलवे चाहे तो खाली जमीन का उपयोग व्यवसायिक तौर पर कर सकता है। लेकिन किसी प्रकार का प्रयास अब तक नहीं किया गया।

                      रेलवे कैटरिंग पर भी उन्होंने नाराजगी जाहिर की। साय ने बताया कि खान-पीन में बहुत सुधार की जरूरत है। भोजन बनाते समय भारी अव्यवस्था और सेवा में लापरवाही की शिकायत मिलती रहती है। खाना बनाते और वितरण के समय लोगों की अभिरूची का विशेष ख्याल करने की जरूरत है। रेलवे प्रशासन पूरी तरह से इसमें फेल है।

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