3500 पेड़ों पर फिलहाल नहीं चलेगी आरी…आगामी आदेश तक हाईकोर्ट की रोक…अभ्यारण्य के बाघों पर पड़ेगा प्रभाव

high_court_visualबिलासपुर— छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बाघों के संरक्षण मामले में लगाई गई जनहित याचिका पर आज सुनवाई की। कोर्ट ने पेड़ों कटाई और सड़क चौड़ीकरण से संबधित कार्यों पर आगामी आदेश तक रोक लगा दिया है। अब अगली सुनवाई 9 अक्टूबर को होगी। एक्टिविस्ट नितिन सिंघवी की याचिका पर कोर्ट ने शासन को आदेश दिया है।

                 मालूम हो कि शासन के मंशानुसार भोरमदेव अभ्यारण्य में 14 किलोमीटर सड़क चौड़ीकरण का फैसला किया है। सड़क चौड़ीकरण के लिए करीब 3500 पेड़ों को काटा जाएगा। भारी मात्रा में पेड़ काटे जाने से अभ्यारण्य वन्यजीवन पर प्रभाव पड़ेगा। मामले को लेकर एक्टिविस्ट नितिन सिंघवी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका पर आज सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने आदेश दिया है कि पेड़ों की कटाई और सड़क चौड़ीकरण से संबंधित सभी कार्यों पर लगाई गई रोक यथावत रहेगी। रोक आगामी आदेश तक जारी रहेगी। मामले में अगली सुनवाई 9 अक्टूबर को होगी।

                                   रायपुर निवासी याचिकाकर्ता नितिन सिंघवी ने बताया कि छत्तीसगढ़ सड़क विकास निगम ने चिल्पी से रेंगाखार होते हुए सालेवारा जाने वाली  60 किलोमीटर सड़क निर्माण का ठेका दिल्ली की कंपनी को दिया है। सड़क निर्माण में करीब 137 करोड़ खर्च आएंगे। 14 किलोमीटर सड़क भोरमदेव अभ्यारण से और 12 किलोमीटर रिज़र्व फॉरेस्ट से होकर निकलती है। स़ड़क चौड़ीकरण में लगभग 3500 पेड़ काटे जाएंगे। ऐसा होने पर वन्यजीवों के जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। बाघ एकांतवासी और संवेदनशील जीव है। पेड़ों के कटने से अभ्यारण्य के अन्य जीव भी प्रभावित होंगे।

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