शिक्षाकर्मी नेता संजय ने कहा…हरा हुआ पुराना दर्द…वादा करने वालों से फिर मिली मायूसी..शिक्षकों में आक्रोश

परीक्षा शुल्क,पर्यावरण विषय,12 वी कक्षा,प्रदेश अध्यक्ष संजय शर्मा,छत्तीसगढ़ पंचायत नगरीय निकाय शिक्षक संघ,बिलासपुर— बजट पेश होने के बाद शिक्षाकर्मियों में मायूसी और नाराजगी दोनों सामने आ रही है। छत्तीसगढ़ पंचायत नगर निकाय शिक्षक संघ प्रांताध्यक्ष

संजय शर्मा ने कहा कि एक बार फिर वादा करने वालों ने धोखा दिया है। बजट पेश होने के बाद लाखों शिक्षक मायूस हो गए हैं। इसी के शिक्षाकर्मियों का 15 साल पुराना दर्द हरा हो गया है।
               बजट पेश होने के बाद शिक्षाकर्मियों में मायूसी है। उम्मीद थी कि भूपेश सरकार वादा करने के बाद शिक्षाकर्मियों की तकलीफ को गंभीरता से लेगी। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। छत्तीसगढ़ पंंचायत नगर निकाय शिक्षक संघ प्रांताध्यक्ष संजय शर्मा ने कहा कि 2003 में शिक्षाकर्मियो के संविलियन का वादा किया गया था। लेकिन संविलियन को लटकाकर रखा गया। बाद में भाजपा सरकार ने 15 साल बाद उल्लू सीधा करने आंशिक संविलियन देकर पल्ला झाड़ ली।
        संजय शर्मा ने बताया कि  2018 में शिक्षा कर्मियो का संविलियन किया गया।  2018 में ही 2 साल  पूर्ण करने वाले शिक्षा कर्मियो का संविलियन करने कहा गया था। जो इस समय पूरा होता नही दिख रहा है।संजय ने बताया कि  कर्मचारियो की मांग एक अलग विषय है। लेकिन स्वयं से कुछ विषय को पूर्ण करने का वादा करना, आपकी दृढ़ इच्छाशक्ति को जाहिर करता है।
                   शिक्षाकर्मी नेता ने बताया कि तकलीफ ज्यादा होती है जब वादा कर निभाया नहींं जाए। क्योंकि लोगों की उम्मीद जग जाती है। शिक्षा कर्मियो का संविलियन तो वर्तमान बनाये गए नियम के अनुसार क्रमबद्ध होगा। इस बात से हम अच्छी तरह से वाकिफ हैं। लेकिन उस वादे और घोषणा का क्या…जिस पर 1 लाख 80 हजार शिक्षकों ने भरोसा किया है।
                        बहरहाल किये गए जन घोषणा का इंतजार कितना लम्बा होगा…समय बताएगा। लेकिन शिक्षाकर्मियो को 15 साल पूर्व के दर्द का अहसास होने लगा है। जख्म फिर हरा हो गया है।
सरकार घोषणाओं को करे पूरा
              संजय ने कहा कि सरकार वादे के मुताबिक शिक्षा कर्मियों से किए गए वादों को पूरा करे। उम्मीद थी कि घोषणाओं को बजट में पूरा किया जाएगा। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। शिक्षाकर्मियों को 2 साल  की सेवा के बाद सम्पूर्ण संविलियन का इंतजार है। इसके अलावा सराकर 1998 से नियुक्त और वर्तमान तक पदोन्नति से वंचित समस्त वर्ग को क्रमोन्नति वेतनमान के वादे को पूरा करे।  प्राचार्य और प्रधान पाठक पद पर शिक्षाकर्मियों को पदोन्नति दे। वर्ग 3 की वेतन विसंगति को समाप्त करे। पुरानी पेंशन योजना को लागू करे। इसके अलावा अनुकम्पा नियुक्ति के लंबित प्रकरण पर टेट और डीएड को शिथिल कर वंचित को अनुकम्पा नियुक्ति के लिए हरी झण्डी दिखाए।

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