सिर्फ छत्तीसगढ़िया ही चलाएगा रेत खदान….समूह में होगा संचालन…दो साल का पट्टा…हर पल लटकी रहेगी तलवार

बिलासपुर—रेत खदानों का संचालन बिडिंग के आधार पर किया जाएगा। प्रत्येक रेत खदान को दो साल के पट्टे पर दिया जाएगा। शासन ने निर्देश जारी किया है कि पंजीत ट्रेडर्स ही बीडिंग में शामिल हो सकते हैं। रेत खदानों का उत्खनन समूहों में बांटकर होगा। एक जिले में एक खदान समूह होगा। रेत घाट का संचालन के लिए बोलीदार को छत्तीसगढ़ का निवासी होना अनिवार्य कर दिया गया है।

                जानकारी हो कि नए निर्देश के अनुसार शासन ने रेत उत्खनन का अधिकार अब ग्राम पंचायत,जनपद पंचायत और नगरीय निकायों से छीन लिया है। भ्रष्टाचार,मुनाफाखोरी की लगातार मिल रही शिकायत के बाद शासन ने रेत उत्खनन को लेकर नया निर्देश जारी किया है। निर्देश के मद्देनजर बिलासपुर जिले में रेत खदानों के समूह निर्माण और सीलिंग दर निर्धारण के लिए अपर कलेक्टर की अध्यक्षता में जिला स्तरीय समिति का गठन किया गया है। समित ने विचार विमर्श के बाद सर्कुलर भी जारी कर दिया है।

होगी रेत घाट की निलामी

                      समिति ने सर्कुलर जारी कर बताया है कि अब रेत खदानों की निलामी होगी। सर्वाधिक बोली लगाने वाले को ही रेत खदान का ठेका दिया जाएगा। सर्वाधिक बोली लगाने वाले को दो साल के लिए रेत खदान का पट्टा दिया जाएगा।  रेत खदान संचालक को रेत का मूल्य और अन्य करो को खदान क्षेत्र में जनता के लिए प्रदर्शित भी करना होगा।

                नई व्यवस्था में रेत परिहवन में शामिल वाहनों और ट्रेडर्स का पंजीयन होना अनिवार्य है। ठेकेदार को रायल्टी और करों का अग्रिम भुगतान  आनलाइन करना होगा। इसके बाद ही खनिज विभाग पिट पास जारी करेगा।

समूह में घाट का बंटवारा…छत्तीसगढिया होना जरूरी

               19 अगस्त को बैठक में प्रशासन ने रायपुर,बिलासपुर,जांजगीर चांपा,रायगढ़, कोरबा मुंंगेली कांकेर,बलौदाबाजार समेत अन्य जिलों में कुल 60 खदानों के लिए एनआईटी जारी किया है। निर्देश के अनुसार निलामी प्रक्रिया में शामिल होने के लिए बोलीदार को छत्तीसगढ़ का मूल निवासी होना अनिवार्य है।  नई व्यवस्था में  एकाधिकार खत्म करने का भी निर्णय लिया गया है।अब एक जिले में मात्र एक खदान समूह होगा। जबकि प्रदेश में समूहों की अधिकतम संख्या पांच होगी।

              शासन से जारी फरमान के अनुसार रेत का अवैध उत्खनन,परिवहन,भण्डारण पर लगाम लगाने का सख्त प्रयास होगा। जिला और प्रदेश स्तर पर उड़नदस्ता दल का गठन किया जाएगा। दोषी के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। अधिकतम तीन बार अवैध परिवहन करते पाए जाने पर वाहन और ट्रेडर्स का पंजीयन खत्म करने के साथ कठोर कार्रवाई भी होगी ।

रेत खनन प्रस्तावित योजना से लाभ

                         जिला खनिज विभाग से हासिल जानकारी के अनुसार नई व्यवस्था से ठेकेदारों को जवाबदेही बनेगी। लोगों को निर्धारित दर पर रेत सुगमता से मिलेगा। नदियों और जल स्र्रोतों को संरक्षण मिलेगा।  शासन को रायल्टी के् साथ डीएमएफ,पर्यावरण और अधोसंरचना का विकास नीलामी राशि के अतिरिक्त राजस्व मिलेगा। रेत खदान का पट्टा के समय अतिरिक्त राजस्व मिलेगा। पंचायतों और नगरीय निकायों को पांच साल में अधिकतम 25 प्रतिशत राजस्व का मुनाफा होगा। शासन के अनुसार बिलासपुर से अब 20 करोड़ रायल्टी वसूलने का टारगेट रखा है। बताते चलें कि अब तक शासन को बिलासपुर जिले से प्रतिवर्ष 13 करोड़ राजस्व का मुनाफा हो रहा था।

शासन के निर्देश का होगा पालन

                    जिला खनिज अधिकारी आर.मालवे ने बताया कि शासन की नई गौड़ खनिज नीति के तहत काम किया जा रहा है। नई नीति का अक्षरसः पालन किया जाएगा। नई नीति से मुनाफखोरी और ठेकेदारों की तानाशाही पर लगाम लगेगा। लोगों को शासन से निर्धारित पर रेत उपलब्ध होगा। रेत घाट संचालक और ट्रेडर्स पर शासन की नजर रहेगी। कुछ गलत पाए जाने पर नई नीति के अनुसार बोलीदार से लेकर ट्रेडर्स,और वाहनों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।

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