छठ पूजा के लिए जंगल उजाड़कर पार्किंग बनाई गई

_20171023_215126(राजेश अग्रवाल,दैनिक छत्तीसगढ़ में प्रकाशित)बिलासपुर।कल हो रही छठ पूजा की पार्किंग के लिए पाटलीपुत्र सांस्कृतिक विकास मंच ने स्मृति वन के एक बड़े हिस्से से छोटे झाड़ के जंगल को काटकर समतल कर दिया है। नगर-निगम की एक बड़ी जमीन को उन्होंने तार से घेर रखा है। उन्होंने अरपा नदी के किनारे के हिस्सों पर कब्जा लगातार बढ़ाया है। पर्यावरण प्रेमियों ने इसकी आलोचना करते हुए उन्होंने आरोप लगाया है कि यह सब बिना किसी अनुमति के सिर्फ अधिकारियों और नेताओं का संरक्षण मिलने के कारण हो रहा है।

                      पर्यावरण प्रेमी और छायाकार वीवी रमण किरण ने इससे जुड़ी तस्वीरें भेजते हुए बताया है कि छठ घाट पूजा के नाम पर नदी के किनारों पर धीरे-धीरे पाटलीपुत्र विकास मंच द्वारा कब्जा बढ़ाया जा रहा है। इतना ही नहीं अरपा नदी के नैसर्गिक स्त्रोतों के किनारे बिना पर्यावरण मंजूरी के कोई निर्माण नहीं हो सकता, पर मंच ने बड़े हिस्से पर कब्जा कर अवैध निर्माण करा लिए हैं।

                       पिछले साल से उन्होंने एक बड़े हिस्से को पौधरोपण कराने के नाम पर घेर रखा है, जबकि कुछ बड़े पेड़ लाकर लगाए गए और उन में बड़े –बड़े चबूतरे बनाए गए हैं। इस सार्वजनिक जगह को समिति ने फेंसिंग तार से घेर दिया है। अपने बचाव के लिए उन्होंने इन पौधों को रोपने के लिए जिले के अधिकारियों और नेताओं को बुलाया।

                   इस साल उन्होंने सीधे स्मृति वन के पीछे के हिस्से को मैदान बना दिया है। यह राजस्व रिकॉर्ड के अनुसार जंगल है। पार्किंग के नाम पर जंगल को काटा गया है। कई बड़े पेड़ अब भी वहां गिरे हुए हैं। इस बारे में मंच के अध्यक्ष प्रवीण झा ने सफाई दी यह सब जिला प्रशासन से अनुमति मिलने के बाद ही की गई है। कोई भी कार्य अवैधानिक तरीके से नहीं किया गया है। पेड़ नहीं काटे गए हैं। फेंसिग पेड़ों की सुरक्षा के लिए है। कुछ दिन बाद इन जगहों पर और पौधारोपण कराए जाएंगे। काम अच्छा किया जा रहा है, लेकिन कुछ लोग विरोध तो करते ही हैं।

                   उल्लेखनीय है कि पाटलीपुत्र मंच द्वारा तोरवा ब्रिज के नीचे छठ घाट बनाया गया है। छठ पूजा में लगभग सभी दलों के नेता और अनेक अधिकारियों को अतिथि के तौर पर बुलाया जाता है।मंच के कार्यों पर अनेक नेताओं, पर्यावरण प्रेमियों से विचार जानने का प्रयास किया। उन्होंने अरपा नदी के किनारे और स्मृति वन पर कब्जा होने को लेकर नाराजगी तो जताई पर अधिकृत बयान देने में असमर्थता जताई।

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