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CG School-मुख्यमंत्री ने की अपील,कहा-सभी विद्यालय अपनी सहमति प्रदान करें

विगत चार वर्षों में 6 नए जिले, 19 अनुविभाग और 83 तहसीलों का गठन

CG School- छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने कहा कि आज गणतंत्र दिवस के पावन अवसर पर मैं सबसे पहले छत्तीसगढ़ महतारी के महान सपूतों अमर शहीद गैंदसिंह, शहीद वीर नारायण सिंह, वीर गुण्डाधूर का सादर स्मरण करता हूं जो हमारे आदिवासी समाज से आते हैं। इन वीर जवानों का बहुत बड़ा योगदान हमारे राष्ट्रीय आंदोलन में रहा, जिन्होंने छत्तीसगढ़ के दुर्गम अंचलों में रहकर छत्तीसगढ़ महतारी के मान को भारत माता के सम्मान के साथ जोड़ा। भारत माता के लाखों सपूतों और सुपुत्रियों की शहादत को याद करना हमारा परम कर्त्तव्य है। मंगल पाण्डे, भगत सिंह, चन्द्रशेखर आजाद, रामप्रसाद बिस्मिल, अशफाकउल्ला खां, रानी लक्ष्मीबाई, रानी अवंतीबाई लोधी, नेताजी सुभाष चन्द्र बोस, लाल-बाल-पाल और उनके सहमार्गियों से देश कभी उऋण नहीं हो सकता।

CG School-बहनों और भाइयों, हमें गर्व है कि हम महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों और संविधान निर्माताओं के वंशज हैं। हमारे पुरखों ने आजादी की लड़ाई में, देश की एकता और अखण्डता को बनाए रखने के लिए, देश में समरसता के मूल्यों और संस्कारों को बचाए रखने के लिए कुर्बानियां दी हैं। जो लोग इस भावधारा से जुड़कर अपने आप को देखते हैं, वे लोग ही हमारी विरासत के महत्व को समझ सकते हैं। इसलिए मैं चाहूंगा कि आप सब नई पीढ़ी को स्वतंत्रता संग्राम और संविधान के मूल्यों से अवगत कराएं। जब तक देश, इस संविधान के अनुसार चलता रहेगा, तभी तक हम सबकी और देश की आजादी सुरक्षित रहेगी। हमारे संविधान की बदौलत ही हमारा देश, लोकतंत्रात्मक गणराज्य कहलाता है। इससे नागरिकों को न्याय, स्वतंत्रता, समता, गरिमा, और बंधुता का वरदान मिलता है।

आधुनिक भारत के संस्कार और स्वरूप को गढ़ने में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद, प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू, प्रथम विधि मंत्री बाबा साहब डॉ. भीमराव अम्बेडकर, प्रथम उप प्रधानमंत्री तथा गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल, प्रथम शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम आजाद, लाल बहादुर शास्त्री, श्रीमती इंदिरा गांधी, राजीव गांधी जैसी विभूतियों के योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता।

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हमने शासन-प्रशासन की सेवाएं आम जनता तक पहुंचाने के लिए जो घोषणाएं की थीं, उन सबको पूरा कर दिया है। विगत चार वर्षों में 6 नए जिले, 19 अनुविभाग और 83 तहसीलों का गठन किया है। शासकीय सेवकों को पुरानी पेंशन योजना, छत्तीसगढ़ सामान्य भविष्य निधि योजना का लाभ देने हेतु हम अपने निर्णय पर अडिग हैं और इसके लिए समुचित कदम उठाए जा चुके हैं। आम जनता को ऑनलाइन सेवाएं देने के लिए हमने लोक सेवा केन्द्रों को सशक्त बनाया, जिसके कारण विगत चार वर्षों में लगभग एक करोड़ 14 लाख आवेदनों का निराकरण इस प्रणाली से किया गया। इसके अलावा परिवहन, नगरीय निकायों तथा विभिन्न शासकीय सेवाओं में पारदर्शिता के लिए ऑनलाइन प्रणालियों को बढ़ावा दिया गया है, जिसका लाभ लाखों लोगों को हो रहा है। ‘मुख्यमंत्री मितान योजना’ के तहत सभी 14 नगर निगमों में जनता को घर में जाकर प्रमाण-पत्र, लाइसेंस जैसे दस्तावेज उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिसका लाभ 40 हजार से अधिक लोगों को मिला है।

चार वर्ष पूर्व तक प्रदेश के विभिन्न अंचलों में जिस तरह से बीमारियां और महामारी फैली थी उसे तत्काल प्रभाव से रोकने में हमें बड़ी सफलता मिली है। मलेरियामुक्त छत्तीसगढ़ अभियान से प्रदेश में परजीवी सूचकांक 5.31 प्रतिशत से घटकर 0.92 प्रतिशत रह गया है। हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि नवा छत्तीसगढ़, स्वस्थ छत्तीसगढ़ के रूप में भी अपनी नई पहचान बनाए।
हमने शिक्षा के माध्यम से राज्य की नई पीढ़ी को सक्षम बनाने की दिशा में भी क्रांतिकारी उपाय किए हैं। पहली कक्षा की पढ़ाई मातृभाषा से शुरू करने के लिए राज्यव्यापी भाषाई सर्वे करने वाले हम पहले राज्य हैं। बस्तर के गांव-गांव में कहानी-उत्सव के माध्यम से मातृभाषा में शिक्षा देने के अभियान को गति दी गई है। सरकारी शालाओं के बच्चों का आत्म-बल बढ़ाने और उनकी प्रतिभा को संवारने हेतु पब्लिक स्कूलों से बेहतर अधोसंरचना विकसित करने की दिशा में हम तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। ‘स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम’ की 247 शालाओं और हिन्दी
माध्यम की 32 शालाओं का संचालन किया जा रहा है, जिनमें 2 लाख 15 हजार बच्चों को प्रवेश मिला है। आगामी सत्र से 422 नई शालाओं को उत्कृष्टता के इस अभियान में शामिल करने की तैयारी की जा रही है।

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‘सुघ्घर पढ़वैया’ योजना भी शुरू की गई है, जिसमें विद्यालयों को ही शैक्षिक उन्नयन में भागीदार बनाकर पुरस्कारों की घोषणा की गई है। अल्प समय में ही 22 हजार से अधिक अर्थात् 51 प्रतिशत विद्यालयों ने इस योजना में शामिल होने की अनुमति देकर बड़े सुधार की दिशा में कदम उठा लिया है। मैं अपील करता हूं कि सभी विद्यालय अपनी सहमति प्रदान करें। लंबे समय से जिन शासकीय शाला भवनों की मरम्मत अथवा जीर्णोद्धार नहीं किया जा सका था, इसके लिए हमने 780 करोड़ रुपए का प्रावधान किया है, ताकि तत्काल यह कार्य हो सके।

उच्च शिक्षा को हमने युवाओं के अनुशासन, संस्कार और उनके रोजगार की क्षमता बढ़ाने के नजरिए से देखा और समुचित कदम उठाए हैं। आवश्यकता के अनुरूप हमने सह-शिक्षा और बालिकाओं के लिए विशेष महाविद्यालय शुरू किए तथा सीटों में भी बड़े पैमाने पर बढ़ोतरी की। मुझे यह कहते हुए खुशी है कि महाविद्यालयों में सकल नामांकन अनुपात पांच गुना बढ़ गया है। वहीं छात्राओं की संख्या दोगुनी से अधिक हो गई है। इस तरह उच्च शिक्षा के क्षेत्र में बेटियों का आगे बढ़ना एक बड़ी उपलब्धि है। मैं बेटियों को उनके उत्साह, जागरुकता और आगे बढ़ने की दृढ़ इच्छा-शक्ति के लिए सलाम करता हूं। ‘स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालयों’ की तर्ज पर महाविद्यालय खोलने का निर्णय भी लिया गया है, जो उच्च शिक्षा के उत्कृष्टता केन्द्र के रूप में नए प्रतिमान बनेंगे।

स्वास्थ्य अधोसंरचना के लिए कोरोना काल में ‘राज्य आपदा मोचन निधि’ तथा अन्य मदों से समुचित राशि दी गई। जब नगरीय निकायों को जरूरत थी तब उन्हें एकमुश्त बड़ी आर्थिक सहायता दी गई। जब अस्पताल और स्कूलों को जरूरत थी, तब उनके लिए एकमुश्त सहायता राशि की घोषणा की गई, वैसे ही बरसात के बाद में जब सड़कों पर गड्ढे उभरे तो अभियान चलाकर 6 हजार किलोमीटर सड़कों की मरम्मत हेतु घोषणा की गई कि इसमें बजट की कोई कमी नहीं होगी। समय पर कार्य पूरा होना ही प्राथमिकता होगी।

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