मेरा बिलासपुर

शैलजा के आने से कुछ नहीं बदलने वाला है कांग्रेस में

(रवि भोई) कहा जा रहा है पी एल पुनिया को हटाकर कुमारी शैलजा को छत्तीसगढ़ का प्रभारी महासचिव बनाया जाना पुरानी बोतल में नई शराब जैसा है। छत्तीसगढ़ कांग्रेस में कुछ नहीं बदलने वाला है और मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के सामने प्रभारी महासचिव की कुछ ज्यादा चलने वाली नहीं है। हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस की शानदार जीत के बाद से तो मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का कद कांग्रेस की राजनीति में काफी बढ़ गया है। पी एल पुनिया 2017 में छत्तीसगढ़ के प्रभारी महासचिव बनाए गए थे। पांच साल हो गए थे, इसलिए उनका बदला जाना तो तय था। पुनिया को बदले जाने की चर्चा महीनों से थी।लंबा कार्यकाल होने के कारण छत्तीसगढ़ में पुनिया जी का एक गुट जैसा बना गया था। कुमारी शैलजा के आने से पुनिया का कथित गुट कमजोर हो जाएगा, क्योंकि पुनिया और शैलजा के काम करने के तरीके में अंतर होगा ही। शैलजा संगठन से हैं, जबकि पुनिया ब्यूरोक्रेट रहे हैं। शैलजा भी पुनिया की तरह कांग्रेस के दलित चेहरे हैं। कुमारी शैलजा हरियाणा कांग्रेस की अध्यक्ष रह चुकी हैं और केंद्र में मंत्री भी रही हैं। इस कारण उनका काम करने का तरीका अलग हो सकता है। शैलजा गाँधी परिवार की करीबी हैं, लेकिन उनको छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से मिलकर चलना होगा। शैलजा के जिम्मे 2023 में छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार की वापसी भी कराना है।

ईडी के निशाने पर डाक्टर

कहते हैं ईडी के निशाने पर रायपुर के एक प्रतिष्ठित डाक्टर भी आ गए हैं।ये डाक्टर एक अस्पताल के मालिक भी हैं। चर्चा है कि डाक्टर साहब के अस्पताल में कुछ नेताओं ने इन्वेस्टमेंट किया है। खबर है कि ईडी के अफसर डाक्टर साहब को तलब कर एकाधबार पूछताछ भी कर चुके हैं । कहा जा रहा है कि एक दशक पहले तक डाक्टर साहब कुछ नहीं थे। कुछ डाक्टरों के साथ मिलकर एक छोटा अस्पताल चलाते थे। लेकिन अपना अलग अस्पताल बनाते ही डाक्टर साहब खूब फले- फूले। डाक्टर साहब कई क्षेत्रों में किस्मत आजमा रहे हैं। उन्होंने कई नए वेंचर भी खड़े कर लिए हैं। सूचना है कि नेताओं के इन्वेस्टमेंट को लेकर ईडी डाक्टर साहब से जानकारी ली है।

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अफसर का पैसा अखबार में भी

चर्चा है कि ईडी की गिरफ्त में आए छत्तीसगढ़ के एक अफसर ने अख़बार में भी पैसा लगाया है। यह अफसर मनी लांड्रिग मामले में ईडी की गिरफ्त में हैं। कहते हैं कि घाटे में चल रहे एक अखबार को खरीदकर अफसर ने एक व्यक्ति को चलाने के लिए दे दिया है। अफसर ने अख़बार को खरीदने में धन लगाने के साथ संचालन के लिए हर महीने फंड की व्यवस्था करता रहा है। ईडी अब उसकी जाँच में भी जुट गई है।

मंत्री जयसिंह के निशाने पर कोरबा जिला प्रशासन

भूपेश बघेल सरकार के राजस्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल के निशाने पर कोरबा जिला प्रशासन आ गया है । मंत्री जयसिंह का एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें वे जिले के अफसरों के तौर-तरीके को लेकर नाराजगी व्यक्त करते दिख रहे हैं। मंत्री जयसिंह अग्रवाल कोरबा से विधायक हैं। कोरबा में कोयला की खुदाई और परिवहन हमेशा से चर्चा में रहा है। ईडी की सक्रियता से अब कुछ ज्यादा ही सुर्ख़ियों में है। मंत्री जयसिंह ने कुछ महीने पहले कोरबा की तत्कालीन कलेक्टर रानू साहू को लेकर तीखी और आक्रामक टिप्पणी की थी और उनके खिलाफ मुख्य सचिव को पत्र लिखा था। मंत्री जयसिंह के पत्र को आधार बनाकर भाजपा नेता नरेश गुप्ता ने प्रधानमंत्री कार्यालय को पत्र भी लिखा। बाद में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने रानू साहू को कोरबा से हटाकर रायगढ़ का कलेक्टर बना दिया। रानू साहू की जगह कोरबा संजीव झा को भेजा। वीडियो से तो लगता है कि नए कलेक्टर से भी मंत्री जी की पटरी नहीं बैठ रही है।

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भानुप्रतापपुर में भी पिटी भाजपा

दंतेवाड़ा, चित्रकोट, मरवाही और खैरागढ़ की तरह भानुप्रतापपुर विधानसभा उपचुनाव में भी भाजपा पिट गई। भाजपा भानुप्रतापपुर को सेमीफाइनल मुकाबला मानकर चल रही थी। इस चुनाव को जीतने के लिए दमखम तो लगाया, लेकिन उसकी रणनीति फेल हो गई। भाजपा को 2023 का मुकाबला जीतने के लिए नए सिरे से मंथन करना होगा। वैसे 2023 के लिए भाजपा हाईकमान पर ज्यादा निर्भर दिख रही है। कहा जा रहा है कि 2023 में छत्तीसगढ़ में भी गुजरात का फार्मूला लागू होगा। बड़े -बड़े दिग्गजों को चलता कर नए और युवाओं को टिकट दिया जाएगा। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की छत्तीसगढ़िया छवि और गांवों में पकड़ के चलते भाजपा के लिए छत्तीसगढ़ में जीत कठिन दिखाई पड़ रही है। माना जा रहा है कि गुजरात और हिमाचल चुनाव निपटने के बाद भाजपा का शीर्ष नेतृत्व छत्तीसगढ़ पर ही फोकस करेगा। नेताओं का जमावड़ा बढ़ेगा। संभावना है कि भाजपा छत्तीसगढ़ में भ्रष्टाचार को बड़ा अस्त्र बनाकर भूपेश सरकार पर हमला करेगी। इस कारण आने वाले दिनों में राज्य में ईडी की कार्रवाई और तेज हो सकती है।
सर्व आदिवासी समाज की दस्तक

भानुप्रतापपुर विधानसभा उपचुनाव में सर्व आदिवासी समाज के प्रत्याशी को 21 हजार से अधिक वोट मिले हैं। सर्व आदिवासी समाज पहली बार अपना प्रत्याशी मैदान में उतारा था। इसके बाद भी भाजपा उम्मीदवार से करीब आधे वोट हासिल कर लेना बड़ी बात है। निश्चित तौर से सर्व आदिवासी समाज का प्रत्याशी मैदान में नहीं होता तो यह वोट कांग्रेस और भाजपा के प्रत्याशी को मिलते। ऐसे में सर्व आदिवासी समाज की दस्तक 2023 के चुनाव को देखते हुए कांग्रेस और भाजपा के लिए शुभ संकेत नहीं है। छत्तीसगढ़ में आदिवासियों के लिए 29 सीटें सुरक्षित हैं। 2023 में 29 सीटों पर ही सर्व आदिवासी समाज के प्रत्याशी खड़े हो गए तो राजनीतिक समीकरण प्रभावित हो सकता है। 2023 के विधानसभा चुनाव के लिए आम आदमी पार्टी भी तैयारी में जुटी है।

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मोहन मरकाम के भविष्य पर कयासबाजी

छत्तीसगढ़ से प्रदेश प्रभारी पी एल पुनिया की विदाई के बाद अब प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मोहन मरकाम के भविष्य को लेकर अटकलें लगाईं जाने लगी है। मोहन मरकाम को प्रदेश अध्यक्ष बने करीब साढ़े तीन साल हो गए हैं। प्रदेश अध्यक्ष का कार्यकाल तीन साल का होता है। माना जा रहा है कि मरकाम को बदला भी गया तो किसी आदिवासी नेता को ही प्रदेश अध्यक्ष बनाया जाएगा। लेकिन वर्तमान राजनीतिक माहौल और फ़रवरी में कांग्रेस के राष्ट्रीय अधिवेशन को देखते हुए उम्मीद की जा रही है कि मोहन मरकाम फिलहाल तो चलते रहेंगे।

डीएमएफ भी ईडी के टारगेट में

कहते हैं जिला खनिज निधि के तहत आबंटित राशि की जांच भी अब ईडी करेगा। कहा जा रहा है कि ईडी ने डीएमएफ की जांच प्रक्रिया शुरू करने के लिए अपने यहाँ प्रकरण पंजीबद्ध कर लिया है। माना जा रहा है कि डीएमएफ जाँच से राज्य के कई आईएएस ईडी के लपेटे में आ जाएंगे। खासकर कई कलेक्टर ईडी के निशाने पर होंगे। जिला खनिज निधि के अध्यक्ष कलेक्टर ही होते हैं। इस कारण फंड के इस्तेमाल के लिए वे ही जवाबदेह होते हैं। यह अलग बात है कि मंत्री-विधायक और सांसदों की सिफारिश पर वे कार्य आवंटित करते हैं। छत्तीसगढ़ में डीएमएफ के दुरुपयोग की शिकायतें लगातार हो रही थी।

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