कही-सुनी : Chhattisgarh के मंत्रियों के विभागों का बंटवारा दिल्ली से

Shri Mi
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(रवि भोई)चर्चा है कि भाजपा हाईकमान और संघ के इशारे पर ही Chhattisgarh के मंत्रियों का नाम तय हुआ। अब मंत्रियों के विभागों का बंटवारा भी दिल्ली से हरी झंडी मिलने पर होगा। कहा जा रहा है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह मंत्रियों के विभागों में मुहर लगाएंगे। मंत्रियों के विभाग बंटवारे में एक-दो दिन समय लगने की संभावना है। मंत्रियों के विभाग बंटने के बाद शीर्ष स्तर के आईएएस-आईपीएस और आईएफएस अफसरों के विभागों में हेरफेर किया जाएगा। कलेक्टर-एसपी के भी तबादले होंगे।

कहते हैं कि मंत्रियों के विभागों को लेकर शनिवार को मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, प्रदेश प्रभारी ओम माथुर और मनसुख मंडविया से चर्चा की। प्रदेश के संगठन महामंत्री पवन साय, क्षेत्रीय महासचिव (संगठन) अजय जामवाल और प्रदेश अध्यक्ष किरण देव भी दिल्ली में हैं। माना जा रहा है कि सभी से चर्चा के बाद मंत्रियों के विभाग तय किए जाएंगे। हालांकि इस बीच मंत्रियों के विभागों की फर्जी सूची खूब वायरल हो रही है। भाजपा को नतीजे आने के बाद करीब एक हफ्ते मुख्यमंत्री चयन में लगा।13 दिसंबर को मुख्यमंत्री की शपथ के बाद 22 दिसंबर को मंत्रियों की शपथ हुई। विभागों के बंटवारे में तो कुछ दिन लगेंगे ही।

नाम ही नहीं, काम के भी उपमुख्यमंत्री
वैसे तो संविधान में उपमुख्यमंत्री की भूमिका साफ़ नहीं है, मंत्रिमंडल में कैबिनेट मंत्री जैसा ही पावर है, लेकिन भाजपा राज में उपमुख्यमंत्री तमगा ही नहीं लग रहा है। भाजपा ने छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के साथ अरुण साव और विजय शर्मा को उपमुख्यमंत्री बनाया है। दोनों पहली बार के विधायक हैं। कहते हैं मुख्यमंत्री साय के साथ अरुण साव और विजय शर्मा जिस तरह बैठकों में शामिल हो रहे और दिल्ली दौरे में साथ जा रहे हैं, उससे लग रहा है कि राज्य में दोनों उपमुख़्यमंत्रियों की अहम भूमिका रहने वाली है। भूपेश बघेल सरकार में आखिरी के कुछ महीनों में टीएस सिंहदेव उपमुख्यमंत्री बने थे, तब लोगों को उपमुख्यमंत्री का रोल समझ में नहीं आया था । टीएस सिंहदेव नाम के उपमुख्यमंत्री लगे थे।

प्रांत प्रचारक की पूछपरख
कहते हैं विष्णुदेव साय की सरकार में प्रांत प्रचारक प्रेम सिदार की पूछपरख बढ़ गई है। चर्चा है कि नेता-अफसर और दूसरे लोग भी जागृति मंडल के चक्कर काट रहे हैं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और उपमुख्यमंत्री अरुण साव संघ की पृष्ठभूमि के हैं, इसलिए स्वाभाविक है कि उनका झुकाव आरएसएस के प्रति काफी रहेगा। कहा जा रहा है कि 2003 से 2018 के भाजपा शासनकाल में संघ का रोल काफी ज्यादा नहीं था। तब संगठन महामंत्री सौदान सिंह ज्यादा पावरफुल थे। खबर है कि इस बार भाजपा सरकार को लाने में आरएसएस ने काफी मेहनत की, इस कारण सरकार में संघ का प्रभाव दिखेगा ही। इसको भांपते हुए नेता-अफसर प्रांत प्रचारक के दफ्तर में हाजिरी देने लगे हैं। कई विधायकों ने मंत्री बनने के लिए भी संघ दफ्तर के चक्कर काटे। इसका उन्हें कितना लाभ हुआ, वे ही बता सकते हैं।

नुकसान में रेणुका सिंह
केंद्र में मंत्री रही रेणुका सिंह राज्य में मंत्री भी नहीं बन पाई। मुख्यमंत्री के लिए रेणुका सिंह का नाम खूब चला। लोग मानने लगे थे कि केंद्र में राज्य मंत्री और आदिवासी होने के नाते रेणुका सिंह मुख्यमंत्री बन जाएंगी। संभावनाओं को देखते हुए प्रशासन ने रेणुका सिंह की सुरक्षा भी बढ़ा दी थी। लेकिन बाजी मार गए विष्णुदेव साय।

कहते हैं परफॉर्मेंस और कार्यशैली रेणुका सिंह के रास्ते में बाधक बन गईं। यही वजह है कि भाजपा ने सरगुजा इलाके की लक्ष्मी राजवाड़े को महिला कोटे से मंत्री बनाया, पर रेणुका पर विचार ही नहीं किया। अब रेणुका सिंह विधायक बनकर समय काटेंगी। अब देखते हैं उनके अच्छे दिन कब लौटते हैं ?
(लेखक पत्रिका समवेत सृजन के प्रबंध संपादक और स्वतंत्र पत्रकार हैं।)

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