VIDEO-पेन्ड्रा की बेटी बनी, छत्तीसगढ़ की गौरव ..विश्वविद्यालय ने किया डॉक्टरेट से सम्मानित..डॉ. गुंजन ने जताया..अपनी मातृभूमि,पिता पर अभिमान

बिलासपुर— बिलासपुर से अलग होकर बना गौरेला पेन्ड्रा मरवाही जिले की बेटी ने राष्ट्रीय स्तर पर ना केवल अपने जिला,बल्कि प्रदेश और अपने घर परिवार का नाम रोशन किया है। आर्थाभाव में पली बढ़ी और तमाम बाधाओं को चीरकर गुंजन मिश्रा ने सफलता की छलांग लगाते हुए पेन्ड्रा का मान बढ़ाया है। उत्तरी अमेरिका महाद्वीप स्थित कैरेबियन देश हैती के थियोफेनी विश्वविद्यालय ने गुंजन मिश्रा को शिक्षा जगत में बेहतर काम करने को लिए डॉक्टरेट की मानद उपाधि से सम्मानित किया है। डॉक्टरेट उपाधि लेने के बाद पत्रकारों से डॉ.गुंजन मिश्रा ने कहा कि मुझे अपनी भारत माता, छत्तीसगढ़ महतारी और खासकर पेन्ड्रा की धरती से अगाध प्यार है। डाक्टरेट की उपाधि पिता नारायण प्रसाद मिश्रा और पति विजयसेन को समर्पित है। 

              जानकारी देते चलें कि उत्तरी अमेरिका महाद्वीप की कैरबियन देश हैती स्थित थियोफेनी विश्वविद्यालय ने पे्ड्रा मूल निवासी गुंजन मिश्रा को शिक्षा  के क्षेत्र में शानदार काम के लिए  डॉक्टरेट की उपाधि से सम्मानित किया है। कार्यक्रम का आयोजन गाजियाबाद स्थित एक भव्य पंचतारा भव्य प्रतिष्टान में किया गया। कार्यक्रम में दुनिया की नामचीन हस्तियों ने शिरकत किया। इस दौरान विश्व के कई हस्तियों को अपने क्षेत्र में किए गए कार्य को केन्द्र में रखकर डाक्टरेट की उपाधि से सम्मानित भी किया गाय।

                   बताते चलें कि गुंजन मिश्रा पेन्ड्रा की रहने वाली है। पिता नारायण प्रसाद मिश्रा की तीन बेटियों में गुंजन मिश्रा का क्रम तीसरा है। गुंजन मिश्रा के तीन भाई भी हैं। नारायण प्रसाद मिश्रा का परिवार आज भी पेन्ड्रा में जीविकोपार्जन करता है। गुंजन मिश्रा आबकारी अधिकारी विजयसेन शर्मा की पत्नी है।

           अपने भाई बहनों में बचपन से ही होशियार गुंजन मिश्रा योग शिक्षिका भी हैं। राष्ट्रीय अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर योग शिक्षा देने का काम करती हैं। बचपन से अच्छी चित्रकार गुंजन मिश्रा का जीवन अर्थाभाव में गुजरा है। लेकिन उन्होने  अर्थाभाव को ही सफलता की सीढियां बना लिया है। गरीबों की सेवा और निशुल्क शिक्षा देना गुंजन मिश्रा की आदतों में शुमार है। हमंमुख मिजाज गुंजन मिश्रा ने डाक्टरेट की उपाधि लेने के बाद पत्रकारों को बताया कि उन्होने कुछ हासिल किए जाने को लेकर कभी काम नहीं किया। इस दौरान खट्टा मीठा जो भी मिला उसे स्वीकार कर लिया। भावुक होते हुए डॉ.गुंजन ने कहा कि आज हमारे बीच मां होती तो इस उपलब्धि को देकर खुश होती। लेकिन उन्हें इस बात का विश्वास है कि मां हमेशा उनके साथ है।

            डॉक्टर गुंजन मिश्रा ने बताया कि हैती की थियोफेनी विश्वविद्यालय के इस सम्मान से अभिभूत हूं। सम्मान ने मुझे कुछ बेहतर करने की दृढ़ इच्छाशक्ति को मजबूत किया है। मुझे अपनी मातृभूमि, खासकर पेन्ड्रा और पिता पर अभिमान है। इनके बिना मैं केवल और केवल शून्य हूं।

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