कलेक्टर दूर करें संवादहीनता

mantra_rprरायपुर—लम्बे अंतराल के बाद सरकार को मीडिया की उपयोगिता महसूस होने लगी। मंत्रालय ने महसूस किया है कि मीडिया और प्रशासन को मिलकर काम करना होगा। तभी जनता तक योजनाओं  और नीतियों की जानकारी पहुंचेगी। मंत्रालय ने कलेक्टर को आदेश दिया है कि  नियमित प्रेस रीलिज के साथ महीने में पत्रकारों से संवाद भी करें।

                           सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार मंत्रालय के आलाधिकारिय़ों ने कलेक्टर को निर्देश दिया है कि शासन की जो भी योजनाएं और नीतियां हो उसे गंभीरता के साथ पत्रकारों के सामने रखें। महीने में प्रेसवार्ता करें। साथ ही स्थानीय स्तर की सभी जानकारी सरकार तक पहंचाएं।

                                    सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार वीडियों काफ्रेंसिंग के जरिए मुख्य सचिव विवेक ढांड, मुख्यमंत्री सचिव अमन सिंह, जनसंपर्क सचिव गणेश शंकर मिश्रा और जनसम्पर्क संचालक राजेश टोप्पो ने प्रदेश के कलेक्टर को निर्देश दिया है कि मंत्रियों और अधिकारियों को लेकर मीडिया में जमकर लिखा और पढ़ा जा रहा है। इससे शासन की छवि धूमिल हो रही है। जिला अधिकारी इस बारे में ना तो कुछ कहते हैं और ना ही खंडन करते हैं। इसे गंभीरता से लेने की जरूरत है। कलेक्टर पत्रकारों को अवगत कराएं कि पीछे सच्चाई क्या है। जैसा लिखा जा रहा है वह सच नहीं है।

                      उच्च अधिकारियों ने चिंता जाहिर करते हुए कहा है कि पत्रकारों से लगातार बढती दूरियों के चलते शासन की नीतियों का सही जानकारी जनता तक नहीं पहुंच रही है। इसलिए जरूरी है कि कलेक्टर अपने जिलों में पत्रकारों के साथ पत्रवार्ता करें।पूछे गए प्रश्नों को बेहतर ढंग से उत्तर भी दे।

                          मालूम हो कि असे सात आठ साल पहले जिले तक हमेशा जिला प्रशासन और पत्रकारों के बीच पत्रवार्ता एक अहम् हिस्सा हुआ करता था। समय के साथ प्रशासन और पत्रकारों के बीच दूरियां बढ़ीं जिसके चलते संवादहीनता का माहौल बना। एक बार फिर प्रशासन को अहसास होने लगा है कि इस संवाददीनता से सरकार की छवि धूमिल हुई है। जिसके मद्देनजर मंत्रालय ने एक बार फिर प्रशासन और पत्रकारों के बीच संवाद को नियमित चलाने का मन बनाया है। देखते हैं यह अभियान कहां तक सफल होता है।

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