फास्ट ट्रैक कोर्ट का फैसला..अलग-अलग मामलों में अपराधियों को सश्रम कारावास..पीड़ितों में खुशी

बिलासपुर–(रियाज अशरफी)– सीपत थाना प्रभारी प्रशिक्षु आईपीएस के प्रयास से समय गिरफ्तार किए आरोपियों के खिलाफ जिला सत्र न्यायालय फास्ट ट्रैक कोर्ट ने आरोपियों के खिलाफ सजा मुकर्रर कर दिया है। कोर्ट के फैसले के बाद पीड़ितो ने ना केवल संतोष जाहिर किया है। बल्कि पुलिस के प्रति आभार भी प्रकट किया  है।
               जिला अपर सत्र न्यायालय फास्ट ट्रेक  कोर्ट ने पॉक्सो एक्ट के आरोपियों के खिलाफ सजा मुकर्रर कर दिया है। प्रशिक्षु आईपीएस विकास कुमार ने बताया कि हिर्री थाना मस्तुूरी निवासी विशाल कुमार साहू को कोर्ट ने आईपीसी की धारा 363 के तहत एक साल का सश्रम कारावास और 100 रूपए का अर्थदंड निर्धारित किया है।
        इसी तरह कोर्ट ने आरोपी के खिलाफ आईपीसी की 366(क) में 1 वर्ष का सश्रम कारावास और 100 का अर्थदंड, धारा 05(L) और 6 पॉक्सो एक्ट में 10 वर्ष का सश्रम कारावास के अलावा रुपए 300 का अर्थदंड दंडित किया है।
           इसके अलावा कोर्ट से एनटीपीसी सीपत निवासी ओम प्रकाश खरे को आईपीसी की धारा 363 के तहत 5 वर्ष का सश्रम कारावास के साथ 250 रूपए अर्थदण्ड की सजा मिली है। आईपीसी की धारा 366(क) में 05 वर्ष का सश्रम कारावास और अर्थदंड, धारा 323 में 500 का अर्थदंड और धारा 5(L),6 पोक्सो एक्ट में 10 वर्ष का सश्रम कारावास, 500 रूपए का अर्थदंड कोर्ट ने किया है।
          एक अन्य मामले में फास्ट ट्रैक कोर्ट ने फुलवारी राजनगर जिला अनूपपुर मध्य प्रदेश निवासी अमिश चौधरी के खिलाफ धारा 363 में 5 वर्ष का सश्रम कारावास की सजा मिली है। इसके साथ ही कोर्ट ने 250 का अर्थदंड लगाया है। धारा 366  में 05 वर्ष का सश्रम कारावास और 250 का अर्थदंड भी लगाया गया है।  धारा 05(L), 06 पोक्सो एक्ट में 20 वर्ष का सश्रम कारावास और 500  रूपए के अर्थदंड से दंडित किया है। कोर्ट ने बताया कि  सभी धाराएं साथ-साथ चलेंगी।
        थाना प्रभारी सीपत के अनुसार पंधी निवासी भूपेंद्र कुमार सूर्यवंशी के खिलाफ कोर्ट ने आईपीसी की धारा 354  में 3 वर्ष का सश्रम कारावास का फैसला किया है। साथ में 300 का अर्थदंड और 8 पोक्सो एक्ट में03 वर्ष का सश्रम कारावास की सजा मुकर्रर किया गया है। 300 रुपए अर्थदंड भी लगाया गया। 
               देवरी निवासी  राजेश डहरिया के खिलाफ कोर्ट ने अलग अलग धाराओं के तहत तीन तीन साल का कारावास के अलावा अर्थदण्ड लगाया है। विकास कुमार ने बताया कि कोर्ट के फैसले से पीड़ितों को न्याय मिला है। 

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