फ्लाफ हुई निगम स्मार्ट सिटी की पहली बैठक

IMG-20151004-WA0005बिलासपुर— नगर निगम विकास भवन में पत्रकारों को स्मार्ट सिंटी की जानकारी देने आज विशेष बैठक का आयोजन किया गया। कुछ देर बाद मालूम हुआ कि कार्यक्रम सवाल पूछने के लिए नहीं बल्कि शहर को स्मार्ट सिटी बनाने की दिशा और दशा जानने के लिए पत्रकारों को बुलाया गया। करीब एक घंटे तक महापौर और आयुक्त के साथ पत्रकारों की बैठक, सुझाव आने से पहले ही खत्म हो गयी।

                         विकास भवन में आज पत्रकारों के साथ निगम महापौर किशोर राय और आयुक्त की बैठक हुई। कार्यक्रम में महापौर करीब आधे घंटे देरी से पहुंचे। इस बीच निगम कमिश्नर ने पत्रकारों को स्मार्ट सिटी की दिशा और दशा पर चर्चा की और सुझाव मांगे। महापौर के पहुंचते ही कंसल्टटेंट ने स्मार्ट सिटी और उसके निर्माण की परिकल्पना को प्रोजेक्टर के जरिए सबके सामने रखा।

                               इस दौरान पत्रकारों ने कार्यक्रम की रूपरेखा को लेकर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि हमें पता नहीं था कि सुझाव भी मांगे जाएंगे। जबकि उन्हें पत्रवार्तों के हिसाब से बुलाया गया था। तमाम वाद –विवादों के बीच निगम ने प्रोजेक्टर के जरिए स्मार्ट सिटी परिकल्पना को सबके सामने रखा।

                 पहली बार लोगों को समझ में आया कि जिस स्मार्ट सिटी की परिकल्पना की जा रही थी। वैसा कुछ है नहीं। निगम कमिश्नर रानू साहू ने बताया कि स्मार्ट सिटी पूरे शहर को ना लेते हुए किसी क्षेत्र विशेष को विकसित करने की योजना है। स्मार्ट सिटी टाप 20 में शामिल होने के लिए लोगों के विचारों का साथ होना बहुत जरूरी है। इसलिए हमने पत्रकारों के साथ बैठक कर स्मार्ट सिटी योजना पर सुझाव मांगा है। उन्होंने बताया कि शहर के लोगों से भी आने वाले कुछ दिनों में संवाद किया जाएगा।

             रानू साहू ने बताया कि स्मार्ट सिटी की रूप रेखा मूलतः तीन बातों को ध्यान में रखकर तैयार किया जाएगा। बिलासपुर को स्मार्ट सिटी बनाने के लिए हरित क्षेत्र, रिट्राफिटिंग या फिर पुनर्रविकास के तरीकों का अनुशरण करना होगा ।

              सीजी वाल के सवाल पर रानू साहू ने कहा कि तीन में से किसी एक को ही चुनकर हमें नियमानुसार स्मार्ट सिटी की दिशा में आगे बढ़ना है। उन्होंने बताया कि रिट्रोफिटिंग के लिए शहर में कुल पांच सौ एकड़ जमीन की जरूरत होती है। ग्रीन फिल्ड में 250 एकड़ और रीडेवलपिंग का क्षेत्र से पचास एकड़ का होना जरूरी है। इसके अलावा पैन सिटी योजना भी है। इस योजना का लाभ प्रायोजित स्मार्ट शहर के अलावा शहर के अन्य भागों में आधारभूत संरचना विकसित करने का काम किया जाएगा। इसमें बिजली, पानी, नाली ,पेयजल, वेस्ट मैनेजमेंट जैसी समस्या शामिल होंगी।

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