बागी विधायक राय ने राहुल गाँधी को भेजा नोटिस का जवाब…जोगी मेरे आदर्श…प्राइवेट लि. कंपनी की तरह काम कर रही पीसीसी

रायपुर । कांग्रेस के बागी विधायक आर.के. राय ने राज्यसभा चुनाव के सिलसिलें में पार्टी की ओर से मिली नोटिस का जवाब कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी के नाम भेजा है। जिसमें उन्होने स्थिति स्पष्ट की है कि क्यों उन्होने राज्यसभा चुनाव के बहिष्कार का फैसला किया और अपना वोट नहीं डाला ।  साथ ही अपने जवाब में उन्होने पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी को अपना नेता बताते हुए उन्हे अपना आदर्श बताया है। आर.के. राय ने अपने जवाब में प्रदेश कांग्रेस कमेटी पर बीजेपी के साथ सांठगांठ कर प्राइवेट  लिमिटेड कंपनी की तरह काम करने का आरोप लगाया है।

( विधायक आऱ.के. राय का जवाब जस-का-तस प्रकाशित कर रहे हैं )

प्रदेश कांग्रेस कमेटी का एक पत्र मिला, राज्यसभा चुनाव को लेकर हमे पार्टी ने जो नोटिस दिया है, उस नोटिस का कोई ठोस कारण या औचित्य प्रतीत नहीं होता। राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस के पराजय की दोषी स्वयं कांग्रेस पार्टी है। आपने व्हिप का उल्लेख किया है। आप स्वयं इस बात से परिचित हैं कि राज्यसभा चुनाव में व्हिप लागू नहीं होता। अगर होता, तो स्वयं आपकी पार्टी दूसरी पार्टी के लोगों को उसका उल्लंघन करने के लिए नहीं उकसाती। व्हिप लागू न होने के बावजूद, हमने भाजपा को हराने के उद्देश्य से, कोई भी तथाकथित व्हिप जारी होने के पूर्व ही कांग्रेस प्रत्याशी को अपना समर्थन देने की सार्वजनिक घोषणा कर दी थी। जबकि राजनितिक आचार और शिष्टाचार के नाते ही सही, हमसे कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष या नेता प्रतिपक्ष ने कांग्रेस प्रत्याशी को समर्थन देने के लिए धन्यवाद करना तो दूर, हमे समर्थन मांगने तक के लिए संपर्क करना भी आवश्यक नहीं समझा। खैर, हम दोनों विधायकों ने इस बात को नजरंदाज किया और यह तय किया कि राज्यसभा चुनाव के लिए हम प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के साथ अपने आपसी मतभेद छोड़कर, केवल और केवल भाजपा प्रत्याशी को हराने की मंशा से, स्वयं आगे बढ़कर कांग्रेस प्रत्याशी को निशर्त समर्थन देने का प्रण लिया।

किन्तु चुनाव के ठीक तीन दिन पूर्व, छत्तीसगढ़ के कांग्रेस प्रभारी पी.एल. पुनिया छत्तीसगढ़ प्रवास पर आये और हमारे परम आदर्श और छत्तीसगढ़ के जनप्रिय नेता माननीय अजीत जोगी जी के विरुद्ध अनर्गल और अभद्र टिप्पणी की, जोगी जी का अपमान किया। प्रदेश के सह-प्रभारी कमलेश्वर पटेल ने भी अपने राजनितिक कद से बहुत ऊँचा जाकर जोगी जी के विरुद्ध अशोभनीय बातें कहीं,उन्हें गाली दी। यह अत्यंत दुखद था। हमसे यह सब सहन नहीं हुआ और इन्ही कारणों से हमने निर्णय लिया कि जब तक उपरोक्त नेता द्वय श्री जोगी से माफी नहीं माँगते, हमने  चुनाव को बायकाटकरने का मन बनाया। ऐसा करते हुए हमे दुःख भी हुआ किन्तु राजनीति में संस्कार, सम्मान और विचार से बड़ा कोई व्हिप नहीं होता। जोगी जी हमारे आदर्श हैं, पूरे छत्तीसगढ़ के आदर्श हैं, हम आज से नहीं बल्कि वर्षों से उनसे वैचारिक रूप से जुड़े हैं। हमारे लिए उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश से आये इम्पोर्टेड लोगों द्वारा छत्तीसगढ़ और छत्तीसगढ़िया का अपमान सहन करने का प्रश्न ही नहीं उठता था। यही कारण है कि हमने चुनाव का बहिष्कार किया।

कांग्रेस पार्टी अपनी लकीर लम्बी करने के बजाय, जोगी जी की लकीर छोटी करने में लगी है। पुनिया जी, डॉक्टर रमन सिंह नहीं बल्कि जोगी जी के विरुद्ध टिप्पणी करते हैं मानो जोगी जी प्रदेश के मुख्यमंत्री हों। स्वाभाविक है कि यह वो कांग्रेस पार्टी नहीं है जिसमे मतभेद तो होते थे, मनभेद भी हुएलेकिन पार्टी के अंदर राजनीति का स्तर इतना नीचे कभी नहीं गिरा। भाजपा के कुछ नेताओं के साथ मिलकर घृणा और द्वेष की ओछी राजनीति के तहत गंदा खेल खेला जा रहा है। यह हमारी कांग्रेस पार्टी नहीं रही, ये बघेल एंड संस कंपनी बन चुकी है।

आपके माध्यम से हमे ये नोटिस “प्रदेश कांग्रेस कमिटी” ने नहीं बल्कि “बघेल एंड संस कंपनी” ने भेजा है। ये वो कंपनी है जो भाजपा के साथ सांठ-गांठ कर कांग्रेस पार्टी को अपनी बपौती समझ कर चला रही है। कांग्रेस का नकाब ओढ़े तो बघेल एंड संस प्राइवेट लिमिटेड कंपनीज चल रही है । रायपुर का गांधी भवन तो कंपनी का केवल रजिस्टर्ड ऑफिस है। मेन ऑफिस तो भिलाई-3 है। छत्तीसगढ़ में पार्टी का रिमोट कण्ट्रोल नंदकुमार बघेल के पास है।

कांग्रेस पार्टी को अगर आगे बढ़ना है तो वो पहले बघेल एंड संस कंपनी के चंगुल से निकले और कांग्रेस पार्टी बने। दुर्भावना और द्वेष के प्रेरित होकर कुछ लोगों को नोटिस देकर एक पक्षीय कार्यवाही करने के बजाय, उनको भी नोटिस दे जिनके विरुद्ध मामले दर्ज हुए हैं। कुरूदडीह के आदिवासियों कीजमीन हड़पने के मामले में क्यों आज तक आपने कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष  को नोटिस नहीं थमाया? अंबिकापुर में तीरपन एकड़ तालाब पर कब्जा करने के मामले में आपने नेता प्रतिपक्ष को क्यों अब तक नोटिस नहीं थमाया ? आप यह तर्क अवश्य देंगे कि इन दोनों मामलों में न्यायिक तौर पर कुछ प्रमाणित नहीं हुआ है, यह केवल आरोप है। अगर यह केवल आरोप हैं तो फिर आपने विधायक अमित जोगी को किस न्यायिक आदेश या प्रमाणिकता के आधार पर नोटिस दिया था और उन पर कार्यवाही की थी ?

उत्तर प्रदेश और कर्नाटक से आये इम्पोर्टेड नेताओं द्वारा भाजपा विरोधी राजनीति के बजाय जोगी विरोधी राजनीति करना पार्टी को बहुत भारी पड़ेगा। ये बात पार्टी को चुनाव के बाद समझ में आएगी। और तभी शायद कांग्रेस पार्टी, बघेल एंड संस के चुंगल से बाहर आकर कांग्रेसपार्टी बनेगी।

उम्मीद है कि आपके नोटिस के जवाब के बाद हमे जल्द ही आजादी मिलेगी।(आर. के. राय)

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