मनरेगा में प्रतिदिन तीन सौ रुपए मजदूरी मिले और साल में दो सौ दिन काम, राज्य सभा में उठी मांग

सार्वजनिक वितरण मंत्री रामविलास पासवान,उपभोक्‍ता संरक्षण कानून-1986,उपभोक्‍ता संरक्षण विधेयक-2018 पारित,नईदिल्ली।राज्यसभा में आज ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सुनिश्चित करने वाली महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) में कम से कम 300 रुपए प्रति दिन मजदूरी तथा साल में कम से कम 200 दिन काम देने की मांग की गयी।तृणमूल कांग्रेस के मानस रंजन भूईंया ने सदन में शून्यकाल के दौरान मनरेगा का मामला उठाते हुए कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन की यह महत्वपूर्ण है और इस पर सरकार को लगातार ध्यान देना चाहिए। ग्रामीण क्षेत्रों के विकास में यह योजना महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। उन्होंने कहा कि देश की सामाजिक आर्थिक परिस्थितियां बदल रही है। इसी के अनुरुप योजना में भी बदलाव किया जाना चाहिए।सीजीवाल डॉटकॉम के व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए यहां क्लिक करे

उन्हाेंने कहा कि मनरेगा के तहत कम से कम 300 रुपए प्रति दिन मजदूरी तय होनी चाहिए। इसके अलावा साल में कम से कम 200 दिन काम देना भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार की हालत में सुधार होगा अौर लोगों की आर्थिक हालत बेहतर होगी।

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी की झरना दास वैद्य ने कहा कि महिलाओं को सरकारी नौकरियों और प्रतिष्ठित रोजगारों में कम से कम 50 प्रतिशत आरक्षण होना चाहिए। उन्होंने कहा कि महिलाओं अधिकतर सेवा क्षेत्रों में काम करती हैं। महिलाओं को ऐसे रोजगार क्षेत्रों में काम मिलता है जो अपेक्षा के रुप से कम प्रतिष्ठित माने जाते हैं। सरकार को इस दिशा में गंभीरता से सोचना चाहिए। कांग्रेस की विप्लव ठाकुर, समाजवादी पार्टी के जया बच्चन और अन्नाद्रमुक की विजिला सत्यानाथन ने भी समर्थन किया।

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