सामने आयी सिम्स की लापरवाही..आदिवासी की मौत

cimsबिलासपुर—चैतुरगढ से उपचार कराने आये एक मरीज ने चिकित्सकों की लापरवाही से दम तोड़ दिया। मरने वाले व्यक्ति का नाम शिवकुमार गोंड़ है। पेंड़ से गिरने का कारण उसके सिर में गंभीर चोट पहुंची थी। प्राथमिक स्वाथ्य केन्द्र ने उसे सिम्स के लिए रिफर किया था। समय पर इलाज नहीं होने के कारण उसकी आज मौत हो गयी है।

                   चैतुरगढ़ से उपचार कराने सिम्स पहुंची एक मरीज ने दम तोड़ दिया है। कोरबा जिले के चैतुरगढ़ स्थित बारी उमराव गांव तहसील पाली में 22 अप्रैल को शिव कुमार गोंड़ पेंड से गिर कर घायल हो गया। पाली स्वास्थ्य केन्द्र में इलाज के बाद उसे सिम्स रिफर किया गया। लेकिन डॉक्टर की लापरवाही का शिकार हो गया। जानकारी के अनुसार शिवकुमार गोंड़ रोज की तरह 22 अप्रैल को पत्नी बुत कुंवर गोड़ के साथ भैंस चराने जंगल गया। इसी दौरान वह चार खाने पेड़ पर चढ गया। पेंड़ की टहनी टूटने से नीचे गिर गया। घबरायी पत्नी ने इसकी जानकारी अपने परिजनों को दी। लोगो के सहयोग से शिवकुमार गोंड को उपचार के लिए पाली सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में भर्ती करवाया।

                शिवकुमार की हालत नाजुक होते देख डॉक्टरों ने उसे सिम्स रिफर कर दिया। सर में अंदरूनी चोट के चलते अचेत शिव कुमार को 22 तारीख को दाखिल कराया गया था। सिम्स के न्यूरोलाजिस्ट ए. एण्डे ने उसका ठीक से इलाज नहीं किया। बताया जा रहा है कि एण्डे शिवकुमार के उपचार में गंभीरता नहीं दिखाते हुए किसी ना किसी बात को लेकर उपचार में लेट लतीफी करने कर रहे थे। बुत कुंवर के भाई मंगल सिंह को बाहर से दवाई लाने को कहा जाता था।

                    लेकिन मंगल और शिवकुमार की पत्नी के पास दवाइयो के लिए तीन हजार पांच सौ रूपये नहीं ते। पैसों का इंतजाम करने में बुत कुंवर और उसके भाई को 9 दिन लग गये। सिम्स की संवेदनहीनता तब पार गयी कि हॉस्पिटल में उपचार के दौरान चिकित्सकों ने पाइप और ग्लब्स तक मरीज के परिजनो से खरीदवाया।

                    परिजनों के काफी गिड़गिड़ाने के बाद डॉक्टर ए. एण्ड्रे ने रविवार को शिव कुमार का आपरेशन किया। आज सुबह 11 बजे शिवकुमार की मौत हो गयी। मृतक के साले का डॉक्टर पर आरोप है कि अगर सही समय पर आपरेशन या इलाज हो जाता तो शिव कुमार की जान बचायी जा सकती थी। लेकिन आपरेशन के लिए बाहरी दवाइयों के चक्कर में शिवकुमार की जान चली गयी। बहरहाल गरीब परिजन पोस्टमार्टम के बाद शव को लेकर चुपचाप घर चले गये।

मालूम हो कि डॉक्टर ऐण्ड्रे पर उपचार में लापरवाही बरतने का यह पहला मामला नही है। पहले भी मनेन्द्रगढ़ के पास हुए दुर्घटना में घायल को उपचार के लिए लाया गया था। उस समय भी परिजनो ने डॉक्टर एण्ड्रे से उपचार करने के लिए हाथ पांव जोडे थे। बावजूद इसके डॉक्टर ए. ऐण्ड्रे ने मरीज को देखना भी मुनासिब नहीं समझा था। उसकी भी उपाचर के दौरान मौत हो गई थी।

प्रभारी सिम्स अधीक्षक ने मामले में डॉक्टर का बचाव करते हुए कहा कि सिम्स से किसी प्रकार की लापरवाही नहीं हुई है।मरीज की हालत गंभीर थी। इसलिए उसका निधन हो गया।

सेटअप तैयार नहीं

सिम्स में न्यूरोलाजिस्ट तो है लेकिन उपचार के लिए सेटअप तैयार नही है। एमआईए इसके लिए कोई अलग से व्यवस्था को मान्य नही करती। जिसके चलते परेशानी होती है। डॉक्टर बाहर से तभी दवाएं लिखते है जब उन्हे जरूरत होती है। मुख्यमंत्री ने स्मार्ट कार्ड और हेल्थ कार्ड से उपचार की व्यवस्था की है लेकिन अधिकांश मरीज हेल्थ कार्ड या बीपीएल कार्ड लेकर नही आते। जिसके चलते ऐसी स्थिति उत्पन्न होती है।

सिम्स अधीक्षक..बिलासपुर

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