राहुल गांधी ने..कहा लाकडाउन का लक्ष्य अधूरा..पूछा मजदूरों और गरीबों के लिए क्या कर रही सरकार.. जिला अध्यक्षों को लिंक भेजा..मांगा सुझाव

BHASKAR MISHRA
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बिलासपुर—  कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने जिला कांग्रेस अध्यक्षों को लिंक भेजकर लाकडाउन का परिणाम, प्रबाव और सुझाव मांगा है। कुछ इसी तरह का लिंक जिला कांग्रेस अध्यक्ष विजय केशरवानी को भी आया है। विजय केशरवानी ने बताया कि निश्चित रूप से लाकडाउन बिना किसी तैयारी के साथ लाया गया है। जिसका प्रभाव बुरा प्रभाव आम जनजीवन पर पड़ा है। लेकिन भूपेश सरकार ने स्थितियों को गंभीरता से लेते हुए जैसा काम किया उसे इतिहास में  नजीर के रूप में पेश किया जाएगा। सीजीवालडॉटकॉम के व्हाट्सएप NEWS ग्रुप से जुडने के लिए यहाँ क्लिक कीजिये

               जिला कांग्रेस अध्यक्ष विजय केशरवानी ने बताया कि राष्ट्रीय कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने कांग्रेस नेताओं को लिंक साझा किया है। लिंक के माध्यम से राष्ट्रीय नेता ने कई सवाल किए हैं और जवाब भी मांगे है। उसका जवाब दिया जाएगा।

           केशरवानी ने कहा कि निश्चित रूप से लाकडाउन को केन्द्र सरकार बिना किसी तैयारी के लायी है। लाकडाउन के पहले प्रवासी मजदूरों का व्यवस्थापन को लेकर चिंतन नहीं किया गया। इस पीड़ा को कभी भुलाया नहीं जा सकता है। यदि रणनीति के तहत लाकडाउन को लागू किया जाता तो कोरोना संक्रमितों की पहचान भी जल्दी होती। लेकिन केन्द्र सरकार ने मध्यप्रदेश सरकार बनाने और विदेशी मेहमान के स्वागत में समय बरबाद किया है। जिसका खामियाजा आज पूरे देश को उठाना पड़ रहा है। 

           केशरवानी ने कहा कि केन्द्र सरकार ने लाकडाउन के समय मजदूरों की परेशानियों को नजरअंदाज किया। प्रवासन की व्यवस्था हुई  लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। ताज्जुब होता है कि जब मजदूरों ने पलायन या घर लौटना शुरू किया तो केन्द्र सरकार ने उलट फैसला लिया। उद्योगो को खोलने का एलान किया । सरकार के फैसले से मोहम्मद बिन तुलगत की रूह झांकती है। यानि फैसले में कही भी समझदारी नजर नहीं आ रही है। जब मजदूर ही नहीं रहेंगे तो उद्योगों का संचालन कैसे होगा। यदि मजदूरों को लाक डाउन के पहले घर भेज दिया जाता तो संभव था कि उद्योग धंधों का संचालन धीमे ही सही लेकिन शुरू होता। मजदूर जरूर लौटते। जबकि अभी वह अपने घर भी नहीं पहुंचे हैं। 

                  विजय ने बताया कि केन्द्र सरकार के झूठ और लफ्पाजी से जनता परिचित हो चुकी है। लेकिन प्रदेश के मुखिया ने राज्य के मजदूरों का पूरा ख्याल रखा। जब मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रवासी मजदूरों के लिए रेल की मांग की तो रेल मंत्री बगले झांकने लगे। इसका असर आज राज्य सरकार पर देखा जा सकता है।  भूुपेश सरकार ने मजदूरों को घर तक पहुंचाने अपने स्तर जितना प्रयास किया उसे आने वाले समय में बेहतर व्यवस्था के रूप में याद किया जाएगा। घर पहुंच बस सेवा के साथ सभी प्रवासियों की निशुल्क भोजन की व्यवस्था सरकार ने बेहतर तरीके से अंजाम दिया है।  

           इतना ही नहीं छाता, पानी, जूता चप्पल का भी प्रदेश सरकार ने वितरण किया। दुख की बात है कि इस विपरीत परिस्थितियों में भाजपा के नेता गरीबों का आंसू पोछते कहीं नजर नहीं आए। निश्चित रूप से बिना सोझे समझे उचित व्यवस्था के लाकडाउन के लागू होने से गरीबों की कमर टूटी है। अर्थ व्यवस्था जर्जर हुई है। कोरोना संक्रमितों की संख्या भी बढ़ी है। शायद इस तरह की परेशानी आजादी के समय भी पलायन करने वालों को भी नहीं उठानी पड़ी होगी। 

                     केन्द्र सरकार पूरी तरह से फेल साबित हुई है। इसका खामियाजा राज्य सरकार को उठाना पड़ा है। बावजूद इसके राज्य सरकार अपने स्तर पर प्रवासी मजदूरों का आंसू पोछने में कामयाब हुई है। लेकिन केन्द्र सरकार से अभी तक वांछित सहयोग नहीं मिला है।

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