’छेर-छेरा पुन्नी’ की बधाई के साथ किसानो का हौसला बढ़ाया

5thramanरायपुर। आकाशवाणी से रविवार को  प्रसारित  मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की मासिक रेडियो वार्ता ’रमन के गोठ’ की पांचवीं कड़ी में कुपोषित बच्चों और कुपोषित गर्भवती माताओं और बहनों के स्वास्थ्य और प्रदेश के सूखा पीड़ित किसानों के प्रति उनकी गहरी चिन्ता और संवेदनाओं की झलक मिली। डॉ. सिंह ने बच्चों और महिलाओं को कुपोषण से मुक्त करने और सूखा प्रभावित किसानों को राहत पहुंचाने के लिए राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे उपायों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने किसानों का हौसला बढ़ाते हुए उनसे कहा कि जीवन में उतार-चढ़ाव, सुख-दुःख तो आते ही रहते हैं, लेकिन ऐसे क्षणों में हमें हिम्मत से काम लेना होगा। मैं और मेरी पूरी सरकार आपके साथ खड़ी है। सूखे जैसी प्राकृतिक आपदा में भी घर-परिवार में  सामाजिक-मांगलिक कार्यों को नहीं रोका जा सकता। इसे ध्यान में रखकर डॉ. सिंह  ने कहा – सूखा प्रभावित किसान भाईयों की विवाह योग्य बेटियों के हाथ पीले करने के मांगलिक कार्य के लिए मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत अब तक दी जा रही 15 हजार रूपए की सहायता को दोगुना बढ़ाकर 30 हजार करने का निर्णय हमने लिया है।

raman ke gothमुख्यमंत्री ने रेडियो प्रसारण में बताया – आंगनबाड़ी गुणवत्ता उन्नयन अभियान’ अभियान में प्रदेश सरकार के मंत्रियों और जनप्रतिनिधियों सहित जनभागीदारी से आंगनबाड़ी के कार्यों की गुणवत्ता का परीक्षण किया जा रहा है । परीक्षण के बाद सुधार के कदम उठाए जाएंगे। इस अभियान के दौरान ‘आंगनबाड़ी-मित्रों’ और ‘बाल-मित्रों’ द्वारा भी बड़ी भूमिका निभाई जा रही है। कुपोषित बच्चों को स्वेच्छा से गोद लेने हेतु प्रेरित किया जा रहा है। अभियान के दौरान पोषण आहार का वितरण आंगनबाड़ी एवं कुपोषित बच्चों को गोद दिलाने का क्रियान्वयन, रेडी टू ईट यूनिट तथा आंगनबाड़ी केन्द्रों के निरीक्षण और पोषण मेले का आयोजन भी किया जा रहा है। साथ ही संबंधित समुदाय आंगनबाड़ी केन्द्रों व बच्चों के कुपोषण तथा अन्य संबंधित विषयों पर चर्चा भी की  जा रही है।

डॉ. सिंह ने कहा कि राज्य में विगत दस वर्ष में आंगनबाड़ी केन्द्रों की संख्या 21 हजार से बढ़कर 50 हजार हो गयी है। इन केन्द्रों में पूरक पोषण आहार से प्रतिदिन लाभान्वित हो रहे बच्चों और महिलाओं की संख्या 13 लाख से बढ़कर 25 लाख हो गयी है। इसके फलस्वरूप प्रदेश में कुपोषण की दर 52 प्रतिशत से घटकर 32 प्रतिशत हो गई है, जबकि इस वर्ष 2016 में इसे और भी घटाकर 25 प्रतिशत तक लाने का लक्ष्य है।  डॉ. रमन सिंह ने प्रदेश के सूखा पीड़ित किसानों को सम्बोधित करते हुए कहा कि 117 तहसीलों में सूखे की स्थिति है, जहां जरूरतमंद लोगों को मनरेगा के तहत 150 दिनों के साथ-साथ 50 अतिरिक्त दिनों का रोजगार देने का निर्णय लिया गया है।  इस प्रकार उन्हें 200 दिनों का रोजगार मिलेगा। प्रदेश भर में मनरेगा के तहत आठ हजार से अधिक ग्राम पंचायतों में रोजगारमूलक कार्य शुरू कर दिए गए हैं, जिनमें दस लाख से ज्यादा ग्रामीणों को रोजगार मिल रहा है। मुख्यमंत्री ने सूखा पीड़ित किसानों को राहत पहुंचाने के लिए राज्य सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की भी जानकारी दी।

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