सिटी सेन्टरः संचालक ने लगाया आवेदन…अधिकारी ने कहा फिलहाल नियमितिकरण मुश्किल..एकलपीठ ने दिया था कार्रवाई का आदेश

बिलासपुर–सिटी सेंटर के संचालक अशोक अग्रवाल ने नियमितीकरण के लिए आवेदन लगाया है। जबकि अवैध कब्जा और अवैध निर्माण को लेकर हाईकोर्ट के युगलपीठ में याचिका लंबित है। दूसरी तरफ याचिकाकर्ताओं ने नियमितीकरण के खिलाफ आवेदन लगा दिया है। मामला अब दो पाट के बीच फंस गया है।
                    प्रदेश सरकार ने जब से अवैध निर्माण के नियमितिकरण की योजना क्या लाई है भू-माफिया चांदी काटने लगे हैं। शहर का हर छोटा बड़ा भू-माफिया और बिल्डर अपने अवैध निर्माण को नियमित कराने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा रहा है। भू-माफियाओं में कुछ ऐसे बिल्डर और कालोनाईजर भी है जो सरकारी जमीन पर कब्जा कर ना केवल निर्माण कराया है बल्कि निर्माण के बाद दुकान मकान बेचकर करोड़ों कमाया भी है।
              जानकारों की माने तो अवैध निर्माण को नियमित करने के आड़ में बड़ा खेल शुरू हो गया है। ताजा मामला सिटी सेंटर का सामने आया है। सिटी सेंटर के संचालक अशोक अग्रवाल ने सिटी सेंटर को नियमित करने टीएन्डसी में आवेदन लगाया है। जबकि सिटी सेन्टर काम्पलेक्स निर्माण में भारी अनियमितता हुई है। नियमों की जमकर धज्जियांं उढ़ाई गयी है। नब्बे हजार फूट में बने सिटी सेंटर का पांच हजार वर्ग फुट निर्माण नगर निगम की जमीन में है।
                 जहां सिटी सेन्टर का निर्माण  दिनेश वर्मा की जमीन पर 14 हजार वर्ग पिट तो विनय सलूजा की जमीन पर तीन हजार फिट जमीन पर कब्जा किया गया है। दोनों का मामला सिटी सेन्टर के खिलाफ हाईकोर्ट में लंबित है। हाईकोर्ट की एकलपीठ ने नगर निगम को आदेश दिया था कि अवैध कब्जा को हटाने के लिए कार्रवाई कर सकता है। लेकिन निगम प्रशासन कार्रवाई के बजाए हाईकोर्ट की युगलपीठ में अपील कर दिया है।
                       बहरहाल मामला न्यायालयीन झमेले में फंसा हुआ है। जबकि यह जाहिर भी हो गया है कि सिटी सेन्टर निर्माण के समय अशोक अग्रवाल और अन्य ने न्यायालय में कूटरचित सीमांकन की कापी पेश किया था। इस बात की जानकारी ना केवल निकाय सचिव को है बल्कि ग्रामीण निवेश विभाग के साथ निगम प्रशासन को भी है। बावजूद इसके सिटी सेंटर को नियमिती करने अशोक अग्रवाल ने आवेदन देकर प्रशासन को चौका दिया है।
                           जानकारों की माने तो शीघ्र ही नियमितीकरण को लेकर प्रस्तुत आवेदन को समिति के सामने रखा जाएगा। समिति में कलेक्टर, निगम आयुक्त और टाउन एंड कंट्री प्लानिंग के अधिकारी संजय बागड़े रहेंगे। देखना है कि निगम आयुक्त सिटी सेंटर को लेकर वहां पर क्या आपत्ति दर्ज कराते है। और समिति मामले मेंं क्या निर्णय लेती है।
100 करोड़ का का प्रोजेक्ट
सिटी सेंटर निर्माण से जुड़े लोगों की माने तो पूरा प्रोजेक्ट सौ करोड़ रूपए का है। काम्पलेक्स में नीचे और उपर दोनों तल मिलाकर 78 दुकाने बनाई गयी हैं। इन दुकानों को दो-दो करोड़ रूपए में बेचने की तैयारी की जा रही थी। लेकिन बेजा कब्जा का खुलासा होने के बाद मामला खटाई में पड़ गया है। बताया जा रहा है कि निर्माण में संचालक ने दिनेश वर्मा की 14 हजार फिट और विनय सलूजा की तीन हजार फिट जमीन पर कब्जा कर लिया है। इसी तरह नगर निगम की पांच हजार फुट जमीन पर कब्जाकर दुकाने बनाई गई है।
नियमितिकरण का विरोध
 एक तरफ सिटी सेंटर के संचालक ने नियमितीकरण के लिए आवेदन लगाया है। दूसरी ओर सलूजा ने विरोध करते हुए मांग किया है कि निर्माण का नियमितीकरण नहीं किया जाए। उन्होने अपनी आपत्ति में लिखा है कि नगर तथा ग्राम निवेश कार्यालय ने नियमितीकरण के संदर्भ जारी पत्र में कूट रचित सीमांकन का उल्लेख नहीं किया है। इसके अलावा मामला हाईकोर्ट में लंबित भी है।
शर्तों का पालन नहीं करने पर नियमितिकरण मुश्किल
मामले में टाउन एवं कंट्री प्लानिंग के सयुक्त संचालक संदीप बांगड़े का कहना है कि यह सच है कि नियमितिकरण अभियान में बहुत से नियम और कायदों को दरकिनार किया जाता है। लेकिन यह भी सच है कि कुछ ऐसी शर्ते भी हैं जिनके आधार पर नियमितिकरण होना मुश्किल होता है। सिटी सेन्टर के साथ भी ऐसा ही कुछ है।  जब तक शासकीय जमीन पर निर्माण नहीं हटाया जाता सिटी सेंटर का नियमितीकरण मुश्किल है। आवेदन कमेंटी के पास नहीं रखा जाएगा। विचार किया जाएगा। मामला पेचीदा है। निर्माण के दौरान कई नियमों को दरकिनार किया गया है। निगम को भी इसमें निर्णय लेना है। फिलहाल सिटी सेन्टर का मामला अधर में है।
किसी भी शर्त का पालन नहीं
                       जानकारी के अनुसार शर्तों के अनुसार काम्पलेक्स तक पहुंचने के लिए सड़क की भी व्यवस्था नहीं है। बावजूद इसके संचालकों ने गलत सीमांकन पेश कर टीएनसी से प्रोजेक्ट को हरी झण्डी दिखाने को मजबूर किया।

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