जब किसानों ने कहा…पटवारी डांटता है…कर्ज मिलना हुआ मुश्किल…एनओसी के नाम 150 रूपए मांग रहे बैंकर

बिलासपुर—मस्तूरी जनपद पंचायत के जोंधरा सेवा सहकारी पंचायत के किसानों ने  कलेक्टर से राजस्व प्रशासन की शिकायत की है। किसानों ने कलेक्टर को बताया कि क्षेत्र में आज भी 90 प्रतिशत आनलाइन रिकार्ड दुरूस्त नहीं है। मानसून सिर पर है…राजस्व रिकार्ड दुरूस्त नहीं होने से खाद बीज का मिलना मुश्किल हो गया है। जिसके कारण किसानों में भारी निराशा है।

                        सेवा सहकारी समित जोंधरा के किसानों ने आज कलेक्टर कार्यालय पहुंंचकर पटवारी के अलावा राजस्व कर्मचारियों की शिकायत की है। किसानों ने बताया कि मानसून सिर पर है…राजस्व रिकार्ड दुरूस्त नहीं होने से सहकारी बैंक से खाद बीज मिलना मुश्किल हो गया है।

                    लिखित शिकायत में किसानों ने जानकारी देते हुए कहा कि जोंधरा क्षेत्र का 90 प्रतिशत रिकार्ड आनलाइन नहीं हुआ है। जिसके चलते किसानों को सेवा सहकारी संस्था से खाद बीज के लिए ऋण नहीं दिया जा रहा है। इस बात को लेकर किसानों में भारी मायूसी है।

                                        किसानों ने बताया कि हल्का पटवारी मामले को लेकर रोज घूमा रहा है। उत्तर सही नहीं दिया जाता है। बात बात पर अपमानित करता है। किसानों के अनुसार ऋण पुस्तिका में खेत,रकबा और खसरा सब कुछ अंकित है। लेकिन ऋण लेने के लिए बी-1,पंचसाला की जरूरत होती है। तहसील कार्यालय स्थित ई.संगवारी से गलत जानकारी दी जा रही है।

                  इसलिए जरूरी है कि मानसून से पहले जोेंधरा क्षेत्र में राजस्व प्रशासन का शिविर लगाया जाए। शिविर में ही सभी किसानों की समस्या का निराकरण किया जाए।

एनओसी के नाम पर लूट

                एक अन्य मामले में जोंधरा समेत जिले के अन्य क्षेत्रों के किसानों ने बताया कि ऋण लेने की नयी व्यवस्था से गरीब किसानों का जेब काटा जा रहा है। किसानों ने बताया कि जिला सहकारी बैंक से ऋण लेने से पहले शर्तों का पालन किया जाना जरूरी है। नए निर्देश के अनुसार किसानों को खाद,बीज के लिए ऋण लेने से पहले क्षेत्र के पांच बैंकों से एनओसी जमा करना होगा।

                    काठाकोनी, मस्तूरी, बेलतरा, रतनपुर, बिल्हा, तखतपुर के किसानों बताया कि सहकारी बैंक के अादेश से जीना मुश्किल हो गया है। आदेश के अनुसार सभी किसानों को ऋण लेने के लिए क्षेत्र के किन्ही पांच बैंकों से एनओसी लाना होगा। दिनभर में बड़ी मुश्किल से दो एक बैंक से ही एनओसी मिलता है। इसके लिए प्रत्येक एनओजी के बदले 150 रूपए जमा करना होता है।

                                 किसानों ने मामले मेंं नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि हो सकता है कि सहकारी बैंक का नियम उचित हो। लेकिन अन्य बैंक वालों को किसानों की बेबसी को कैसे समझाया जाए। क्योंकि किसान जब भी क्षेत्र के बैंकों से एनओसी लेने जाता है तो …बैंक कर्मचारी एक एनओसी के लिए 120 से 150 रूपए की मांग करते हैं। जबकि सबको मालूम है कि किसानों की हालत रूपयों को लेकर कैसी होती है।

                     एक किसान ने बताया कि सहकारी बैंक एनओसी के बहाने पता लगाना चाहता है कि अन्य बैंकों में हमारी स्थिति क्या है। कर्ज लिया है या नहींं। यही कारण है कि अन्य बैंक के कर्मचारी किसानों की मजबूरी का जमकर फायदा उठाना शुरू कर दिया है। किसानों ने बताया कि मामले की शिकायत कलेक्टर से करेंगे। स्थानीय विधायक से भी एनओसी के एवज में रूपए लिए जाने की शिकायत करेंगे।

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