एसबीआर कालेज जमीन पर बिल्डरों की नजर…ट्रस्टी परिवार का दावा..फर्जी दस्तावेज से रजिस्ट्री की तैयारी…जाएँगे कोर्ट..बेनकाब होंगे बाहुबली

बिलासपुर— एसबीआर कालेज के सामने करोड़ों  की जमीन को फर्जी ट्रस्ट और दस्तावेज में कूट रचना कर जमीन हथियाने का मामला सामने आया। इसके पहले  ट्रस्ट की जमीन हाथ से निकल जाए परिवार के सदस्यों ने एसडीएम और कलेक्टर समेत कमिश्नर से मिलकर रजिस्ट्री रोकने की गुहार लगाई है।

                      शुक्रवार को शंकरलाल बजाज के वारिश अमित बजाज ने बताया कि परिवार के सदस्य कमल बजाज ने कूट रचना कर फर्जी दस्तावेज एसडीएम के सामने पेश किया। ट्रस्ट का फर्जी अध्यक्ष बनकर कमल ने करोड़ों की जमीन को बिल्डरों को बेचने की योजना तैयार किया है। कमल बजाज ने बिल्डरों से सौदे में करीब चालिस लाख रूपए भी लिया है। जबकि पूर्वजों ने जमीन को धर्माथ के लिए दान में दिया है। हम लोग दान दी गयी जमीन को निजी कार्यों में उपयोग के खिलाफ हैं।

धर्मार्थ के लिए बना ट्रस्ट

                    प्रेसवार्ता में अमित बजाज ने बताया कि साल 1944 में शिवभगवान रामेश्वरलाल ने धर्माथ काम के लिए एक लाख रूपए का दान दिया। उसी एक लाख रूपयों से तात्कालीन समय वर्तमान एसबीआर कालेज की जमीन को खरीदा गया। सम्पत्ति की सुरक्षा और उद्देश्यों को पूरा करने शिवभगवान रामेश्वर लाल चैरिटी ट्रस्ट बनाया गया। तत्कालीन समय ट्रस्ट के लोगों ने फैसला किया कि सम्पत्ति का उपयोग केवल धर्मार्थ कार्यों में होगा।

                         इसी क्रम में वर्तमान एसबीआर कालेज की स्थापना हुई। कालेज संचालन की जिम्मेदारी महाकौशल एजुकेशन सोसायटी को दी गयी। 1972 में कालेज को शासन ने ले लिया। इसके बाद कालेज महाकौशल की भूमिका भी खत्म हो गयी।

             अमित बजाज ने पत्रकारों के सवाल के जवाब में जानकारी दी कि एसबीआईर ट्रस्ट का सम्बन्ध सामाजिक सरोकार से है। इसलिए महाविद्यालय से लगी खाली… जिसका उपयोग सामाजिक कार्यों को ध्यान में रखकर ट्रस्ट को करना था।वर्तमान में महाविद्यालय और मुख्य मार्ग के बीच कालेज की वाउंड्रीवाल से घिरा हुआ है। सुरक्षित भी है। वर्तमान में खाली जमीन का उपयोग कालेज मैदान के रूप में हो रहा है।

                            ट्रस्ट बनने के बाद सबकी जानकारी में परम्परानुसार अध्यक्ष समेत अन्य पदाधिकारियों का चुनाव होता रहा। ट्रस्ट की गाइडलाइन के अनुसार रामेश्वर लाल पहले अध्यक्ष बने। निधन के बाद दूसरे अध्यक्ष अमोलक चन्द बजाज को बनाया गया। तीसरे अध्यक्ष बाबूलाल बजाज और चौथे अध्यक्ष की जिम्मेदारी शंकरलाल बजाज को मिली।

बना दिया फर्जी ट्रस्ट

                                 एक सवाल के जवाब में अमित बताया कि शंकर लाल बजाज का निधन साल 2007 में हो गया। नियमानुसार परिवार से ट्रस्ट का अध्यक्ष बनना था। लेकिन व्यस्तता के कारण चुनाव नहीं हो सका। बाद में लोग देश के कोने कोने में अपने काम धाम में लग गए। इस दौरान किसी ने ट्रस्ट की तरफ ध्यान नहीं दिया। मौके का फायदा उठाकर कमल बजाज ने गाइडलाइन के खिलाफ दान दी गयी खाली जमीन को हथियाने खेल शुरू किया। तात्कालीन सचिव को जानकारी दिए बिना खुद को अध्यक्ष घोषित कर दिया। अपने दो बेटों को सदस्य बनाया। और एक नजदीकी रिश्तेदार को भी सदस्य के रूप शामिल कर लिया।

शासन को अंधेरे में रखा

                            कमल ने 13 जून 2019 को शासन से आदेश भी पारित करवा लिया कि बजाज परिवार छोड़ी गयी जमीन को निजी कार्यों में उपयोग करना चाहता है। इसलिए जमीन का नामांतरण और रजिस्ट्री उनके नाम किया जाए। अमित बजाज ने पत्रकारों को बताया कि ऐसा करना ट्रस्ट के सिद्धान्तों के खिलाफ है। यह जानते हुए भी कि जिस ट्रस्ट को फर्जी तरीके से बनाया गया है…सदस्यों का मनोनयन नियम के खिलाफ हुआ है। ट्रस्ट में कम से कम सात सदस्यों का होना अनिवार्य है। इस बात से कमल बजाज ने प्रशासन को अंधेरे में रखा। यद्यपि स्थानीय अखबार में जमीन नामांतरण और रजिस्ट्री को लेकर इस्तहार निकाला गया। जिसकी जानकारी हम तक नहीं पहुंची।

चालिस लाख में एडवांस

                                      अमित बजाज ने यह भी बताया कि कमल बजाज ने शिवनारावयण रामेश्वरलाल चैरिटेबल ट्रस्ट को बिना सूचना दिए बिल्डरों से 40 लाख लिए हैं। मामले में जिला  प्रशासन समेत रजिस्ट्र्री कार्यालय को अवगत करा दिया है। लेकिन जिला प्रशासन से अब तक किसी प्रकार का सहयोग नहीं मिला है। जिला प्रशासन पूरे मामले को लेकर उदासीन है। बताया जा रहा है कि जमीन कोई बाहुबली कमल के सहारे हथियाना चाहता है। शायद यही कारण है कि जिला प्रशासन विवाद से बचने चुप्पी साध रखा है।

बेनकाब होगा बाहुबली

बजाज के अनुसार मामले के खिलाफ हम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे। उम्मीद है कि न्याय जरूर मिलेगा। आरोपियों और खासकर पर्दे के पीछे सक्रिय जमीन माफियों के साथ उस बाहुबली का भी चेहरा बेनकाब होगा जो करोड़ों रूपए की धर्मार्थ हितों की जमीन को बेईमानी से हड़पना चाहता है।

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