रोती बिलखती रही,लेकिन नहीं रूकी तोड़फोड़ मशीन और इशारों ही इशारों में ढह गयी दीवार

IMG-20171208-WA0001बिलासपुर।वाह रे नगर निगम…और उसके अधिकारी…दीवार गिराने से पहले कम से कम गरीब परिवार को नोटिस तो थमा दिए होते। लेकिन नहीं..क्योंकि पूर्व पार्षद को खुश करना था। क्योंकि पूर्व पार्षद की खुशी समस्या सुलझाने में नहीं बल्कि गरीब परिवार को रोते बिलखते और तड़पते देखने में थी। जबकि नापजोंख में केवल 8 इंच सरकारी जमीन पर दीवार खड़ी थी। परिवार ने छेनी हथोड़ी से सुरक्षित तरीके से दीवाल तोड़ने का वादा भी किया। लेकिन पूर्व पार्षद और भाजपा निगम नेताओं के इशारे पर पूरी दीवार को कुछ मिनटों में जमीदोज कर दिया गया। पीड़ित परिवार की हालत कुछ ऐसी है कि पहले चूल्हे की आग को महत्व दें या फिर टूटी दीवार को खड़ा करे…। यदि निगम की ऐसी कार्रवाई उन लोगों के खिलाफ भी होती ..जिन्होने पूरी सड़क को ही घेरकर रखा है तो तालियां जरूर मिलती।
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जी हां..हम बात कर रहे हैं गांधी चौक के पास सिटी डिस्पेंसरी के बगल में गरीब अग्रवाल परिवार के साथ हुई निगम अधिकारियों की ज्यादती की। निगम तानाशाही के सामने गरीब अग्रवाल परिवार की ही नहीं बल्कि किसी की भी नहीं चली। पहले तो निगम तोड़ फोड़ दस्ते के कर्मचारियों ने बताया कि पूरी बाउंड्री सड़क पर है। लोगों के प्रयास से नाप जोख की कार्रवाई हुई। मालूम हुअा कि केवल आठ इंच दीवार सरकारी जमीन पर है। जहां से नाली को निकाला जाना है। स्थानीय पार्षद शैलेन्द्र ने तोड़ फोड़ दस्ते को समझाया कि दो एक दिन में छेनी हथौड़ी से दीवार को हटा दिया जाएगा। पहले तो दस्ते ने समझाइश को गंभीरता से लिया। लेकिन लोगों के हटते ही दीवार को एक्सीवेटर लगाकर जमीदोज कर दिया। घर की महिला चीखती चिल्लाती रही..लेकिन चीख पुकार भी एक्सीवेटर की आवाज में गुम हो गयी।

गरीब अग्रवाल परिवार की महिला ने बताया कि दीवार हटाने से पहले निगम ने ना तो लिखित और ना ही मौखिक जानकारी दी है। निगम ने तानाशाहों की तरह बिना नोटिस के मात्र 8 इंच जमीन के लिए दीवार को तोड़ डाला। तोड़ फोड़ दस्ते के एक अधिकारी ने बताया कि हम नहीं चाहते कि किसी का नुकसान होष  लेकिन निगम के एक बड़े नेता ने स्पष्ट कहा कि दीवार को गिरा कर ही आना । इसलिए हमें दीवार तोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा।

शैलेन्द्र जायसवाल समेत स्थानीय लोगों ने बताया कि कुछ दिनों पहले महापौर मौके पर आए थे। उन्होंने बाउंड्री वॉल तोड़ने का आदेश दिया था। महापौर ने बिना जांच पड़ताल के किसके इशारे पर फैसला लिया। सबको समझ में आ चुका है। इसी तरह कुछ दिनों पहले मिट्टी तेल गली में गरीबों के मकान को गिराया गया। सिंधी समाज के लोगों के मकानों को तोड़ा गया। जबकि इतनी तोड़फोड़ की आवश्यकता नहीं थी।

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