सीपत से सरकारी महकमों को भी मिलती है‘एनर्जी’ .? पोस्टिंग के लिए पहली पसंद से बन रही थाने की नई पहचान…

बिलासपुर–(रियाज अशरफी)–सीपत में एनटीपीसी का बिजली घर बनने के बाद से यहां से देश में दूर-दूर तक उर्ज़ा मिल रही है और ऊर्ज़ा के क्षेत्र में सीपत की नई पहचान बनी है । यह बात सभी को पता है। लेकिन लोगों को यह नहीं पता चल सका है कि सीपत कब और कैसे सरकारी महकमे के लोगों को भी एनर्ज़ी देने लगा है। सीपत के पुलिस थाने में ऐसे कई उदाहरण सामने आए हैं, जिन्हे देख़कर लगता है कि यह पुलिस कर्मियों के लिए भी ऊर्जा के केन्द्र के रूप में स्थापित हो गया है। जिसके चलते कई कांस्टेबल तबादले के बाद भी घूम-घूमकर वापस सीपत लौटते हैं और इसे नई पहचान दे रहे हैं।  
                         पिछले कुछ अरसे से देख़ा जा रहा है कि कुछ आरक्षकों के लिए सीपत सबसे पसंदीदा थाना बना हुआ है  । तभी तो यहां से दूसरे थानो में ट्रांसफर होने के चंद महीनों बाद ही उनकी वापसी हो जाती है। एसपी कार्यालय से क्यों उनकी फ़िर से सीपत पोस्टिंग हो जाती है, इस सवाल पर लोगों की दिलचस्पी बनी हुई है। बता दें कि कुछ दिन पूर्व प्रशासन ने कानून व्यवस्था को चुस्त दुरुस्त रखने के लिए कई पुलिस अधिकारियों के साथ आरक्षकों को इधर से उधर किया था ।  लेकिन सीपत में यह फार्मूला क़ारगर नज़र नहीं आ रहा है। 
                               सीपत थाने में कुछ आरक्षकों की जिस तरह बार-बार पोस्टिंग हो रही है   , उससे कई सवाल भी अपनी ज़गह क़ायम हैं। अहम् सवाल यह भी है कि सीपत में बड़ा उद्योग लगने के बाद अपराधों के तौर तरीक़े में जो बदलाव सामने आया है, उसका रिश्ता भी सीपत थाने के प्रति आरक्षकों के प्रेम से जुड़ा हुआ है।  जिसकी वज़ह से सीपत थाना उनके लिए अब पहली पसंद है। मिसाल के तौर पर   एक नव आरक्षक ने  2014 में पहली बार सीपत थाना में ज्वाइन किया  । ट्रेनिंग पूरी करने के बाद से लगातार तीन साल ड्यूटी कर ली । एक मामले में सीपत में ही  2018 में उन्हे निलंबित किया गया।अब फिर से 9 जनवरी 2022 को तोरवा से सीपत थाने में उनकी वापसी हो चुकी  है। सीपत में उनकी यह तीसरी पारी है।
                                इसी तरह एक आरक्षक का जुलाई 2021 को सीपत से पचपेड़ी ट्रांसफर हुआ । वहां अवैध शराब विक्रेताओं से वसूली के मामले में उन्हे लाइन अटैच किया गया । अब फिर से कल 20 जुलाई  को सीपत में वापसी हो गई है। एक आरक्षक 2018 से दिसम्बर 2021 तक 3 वर्ष सीपत में पदस्थ रहे। उन्हे तबादले में रतनपुर भेजा गया था ।  लेकिन वहां से 3 माह बाद ही 12 अप्रैल 2022 को फिर से सीपत में उनका ट्रांसफ़र हो गया और  तब से सीपत में ही पदस्थ हैं।
 
इसी तरह एक आरक्षक  की पोस्टिंग 2018 से जून 2021 तक 3 वर्ष सीपत में थी। यहां से ट्रांसफर के बाद सिरगिट्टी थाना भेजे गए। अब कल 20 जुलाई  से फिर सीपत थाने में उन्होने आमद दी है। एक अन्य आरक्षक लंबे समय से सीपत थाना में पदस्थ रहे । फिर अक्टूबर 2021  में  सीपत से उनकी बदली हुई और पचपेंड़ी थाना भेजे गए । वहां से महज़ चार महीने के बाद  26 मार्च 2022 को उनकी सीपत वापसी हो गई। 
आरक्षकोँ के सीपत प्रेम का यह उदाहरण इस इलाक़े के लोंगों के बीच तो चर्चा का विषय है ही….। बल्कि लोग इसे सीपत इलाके में हो रहे बदलाव से भी जोड़कर देख रहे हैं।जहां बिजली घर बनने के बाद आम जनजीवन में भी बदलाव आया है और ज़ाहिर सी बात है कि जुर्म-ज़रायम की दुनिया भी बदली है । जिसकी वज़ह से सीपत ने पुलिस जवानों की पहली पसंद के रूप में अपनी पहचान बना ली है…।

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