किसी ने कहा.जीवन शैली..किसी ने दरबेश..पुण्यतिथि पर वक्ताओं ने बीआर को बताया..सच्चा पत्रकार.. ऐसा मंत्री जिसने सबको साथ लेकर चलना सिखाया

BHASKAR MISHRA
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बिलासपुर—बीआर यादव बिलासा की मिट्टी में पैदा हुए..इस बात को लेकर हमें गर्व है। वह सर्वसमाज के सच्चे और प्रिय नेता थे। मंत्री रहते हुए भी हमेशा पत्रकारिता को जीया। वे कभी राजा और रंक दोनों ही थे। यही उनकी विशेषता थी। दरअसल बीआर यादव कोई व्यक्ति नहीं बल्कि जीवनशैली का नाम है। उन्होने हमेशा तख्त और ताज को ठोकरों पर रखा..। इस बात की कभी परवाह नहीं की कि वे मंत्री हैं। यही कारण है कि आमजन में बीआर यादव की छवि आज भी दरबेश के रूप में कायम है। यह बातें अविभाज्य मध्यप्रदेश के पूर्व मंत्री स्वर्गीय बीआर यादव की पुण्यतिथि पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान दिग्गज बुद्धिजीवियों ने कही। रावत नाच महोत्सव समिति और मड़ई परिवार की ओर से आयोज़ित  पुण्यतिथि कार्यक्रम को प्रमुख वक्ता सीजी वाल प्रधान संपादक रूद्र अवस्थी समेत समाजवादी चिंतक आनन्द मिश्रा, डॉ.कालीचरण यादव , वरिष्ठ पत्ररकार पियूष कांति मुखर्ज़ी औऱ  पूर्व विधायक चन्द्रप्रकाश वाजपेयी ने संबोधित किया। सभी ने बीआर यादव से जुड़े तमाम संस्मरणों को साझा किया। 

                बृहस्पति बाजार स्थित बीआर यादव गार्डन में पूर्व मंत्री स्वर्गीय बीआर यादव की  पुण्यतिथि पर विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बतौर प्रमुख वक्ता सीजीवाल के प्रधान संपादक रूद्र अवस्थी ने शिरकत किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता समाजवादी चिंतक आनन्द मिश्रा ने किया। पूर्व विधायक चन्द्रप्रकाश वाजपेयी, डॉ.कालीचरण यादव, वरिष्ठ पत्रकार पीयूषकांत मुखर्जी ने संबोधित किया।

                  मड़ई पत्रिका के संपादक और रावत नाच महोत्सव के संयोजक डॉ.कालीचरण यादव ने  बीआर यादव से जुड़े तमाम  यादों को सबके सामने रखा। उन्होने बताया कि रावत नाच महोत्सव की रूप रेखा औऱ देश विदेश में उसकी ख़्याति में बीआर यादव का सबसे ब़ड़ा योगदान है। उन्होने बताया कि आम से खास बन गए बीआर यादव ने हमेशा अपनी ज़ड़ को पकड़ कर रखा। वह व्यक्तित्व थे। वह कल भी प्रासंगिक थे..और आज भी हैं।

                     वरिष्ठ पत्रकार पीयूषकांत बनर्जी ने बीआर यादव के साथ पत्रकारिता के दौर को याद किया। बताया कि यादव जी खास होकर भी आम जैसा रहे। अच्छे शिक्षक और अच्छे पत्रकार के साथ अच्छे नेता थे। ताउम्र सबको साथ लेकर चले।

               पूर्व विधायक चन्द्रप्रकाश वाजपेयी ने अपने और बीआर यादव परिवार के ताने बाने को सबके सामने रखा। वाजपेयी ने बताया कि राजनीति का ककहरा बीआर यादव के साए में सीखा है। उनकी पारखी नजर का कमाल था कि..एक अदना से इंसान को विधायक बना दिया। इस दौरान वाजपेयी ने मध्यप्रदेश विधानसभा में दिए गए भाषण को याद किया। फुटहा कालेज की स्थिति को सबके सामने पेश किया। सदन में ही बीआर यादव ने जो कहा वह आज भी कानों में बज रहा है। 

            कार्यक्रम के प्रमुख वक्ता रूद्र अवस्थी ने बीआर यादव के कई सुने अनसुने पहलुओं को सबके सामने रखा। वरिष्ठ पत्रकार ने बीआर यादव को दरबेश बताया। उन्हें ना तो ताज की चिन्ता थी..और ना ही खास बनने की इच्छा। वह तो सबको साथ लेकर चलने वाले सम्पूर्ण व्यक्तित्व थे। उन्होने अपना सारा  जीवन पढ़ने और सीखने के साथ सेवा में खर्च कर दिया। वह लोगों से अलग लकीर खींचने वाले बड़े दिल के बड़े इंसान और बिलासा माता के पुत्र थे। 

                           रूद्र अवस्थी ने बताया कि बीआर यादव को पत्रकारिता की गहरी समझ थी। उन्होने अपना जीवन पढ़ते और शोध करने के साथ सेवा में खर्च किया। जनसेवक रहते हुए  उन्होने बिलासुपर के लिए हमेशा कुछ नया सोचा। स्थिति यह भी रही कि हमने उनसे बिना पूछे शहर के लिए जो भी लिखा..उन्होने बिना किसी प्रतिक्रिया के लिखे को अपना बयान समझा। और उसे  धरातल पर उतारने का संकल्प लिया। और पूरी ईमानदारी से निभाया।

                वरिष्ठ पत्रकार ने बताया कि तमाम व्यस्ताओं के बीच उनके माथे पर कभी शिकन देखने को नहीं मिली। राजा और रंक की दूरियों को ना केवल खत्म किया। बल्कि सर्वसमाज को साथ लेकर चलने का हुनर लोगों ने उन्ही से सीखा है। वे बहुत बड़े इंसान थे।

            सीजी वाल प्रधान संपादक ने व्याख्यान के दौरान पत्रकारिता बदलते स्वरूप पर काफी सकारात्मक विचार भी रखे। उन्होने कहा कि मूल्यों को संरक्षित रखते हुए परिवर्तन का यादव जी ने हमेशा स्वागत किया। आज पत्रकारिता का स्वरूप बदला है। चारो तरफ समामचारों का जाल ही जाल है। राज्य बनने के बाद प्रदेश का तेजी से विकास हुआ है। ना केवल पत्रकार बल्कि बिलासपुर का हर इसान बीआर यादव के सपनों को साकार कर रहा है।

                 उपस्थित लोगों को समाजवादी चिंतक आनन्द मिश्रा ने संबोधित किया। उन्होने बताया कि बीआर याद़व़  पठन पाठन के शौकीन पत्रकार और मंत्री थे। पढ़ने वालों को उनका हमेशा आशीर्वाद मिला। मुझे जब भी मौका मिला..मंत्री यादव के निवास पहुंचकर कई पत्र – पत्रिकाओं के ज़रिए  देश दुनिया के बारे में समझते रहे । उन्होने ऐसा करने का मौका भी दिया। आज जब भी हम विपरीत स्थिति में अपने आपको पाते हैं..तब बीआर यादव का संदेश और सादगी भरा जीवन हमें नया रास्ता देता है। 

                  आनन्द मिश्रा ने संस्मरण साझा करते हुए कहा कि बिलासपुर के किसी भी व्यक्ति को किसी भी जरूरत को लेकर बीआर यादव के रहते कभी भी चिन्तित नहीं देखा गया। लोगों की हर चिन्ता की एक ही चाभी..बीआर यादव थे। उन्होने सब की चिन्ताओं को अपनी जिम्मेदारी समझकर दूर किया। चाहे शादी में हण्डा की कमी की हो या फिर आर्थिक और सामाजिक परेशानी ही क्यों ना हो। 

               आज चारो तरफ सूचनाओं का संजाल है। लेकिन संवेदनाएं कहीं नजर नहीं आती है। यादव जी के दौर में संवेदनाओं का महत्व था। आज भी इस कमी को शिद्दत के साथ महसूस किया जा सकता है।

                      कार्यक्रम में मेयर रामशरण यादव, ज़िला पंचायत अध्यक्ष अरुण चौहान, बिलासपुर सहक़ारी गृह निर्माण समिति के अध्यक्ष   शेखर मुदलियार, बीआर यादव के पुत्र कृष्ण कुमार यादव . कांग्रेस नेता महेश दुबे-टाटा समेत कई दिग्गज शामिल हुए। उपस्थित लोगों की संख्या भी भरपूर नजर आयी।     

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