स्कूली बच्चों में नोरोवायरस के 2 मामले, जानें कितना खतरनाक है ये वायरस

दिल्ली।देश में पैर पसार रहे कोरोना संकट के बीच केरल में एक बार फिर से (Norovirus) के केस मिलने शुरू हो गए हैं. आधिकारिक सूत्रों की माने तो जून महीने में केरल के विझिंजम (Vizhinjam) में स्कूल जाने वाले 2 बच्चे नोरोवायरस के संक्रमित पाए गए हैं. विझिंजामी केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम में पड़ता है. वहीं केरल की हेल्थ मिनिस्टर वीना जॉर्ज ने बताया कि दोनों संक्रमित बच्चों की हालत फिलहाल स्थिर है. अभी सैंपल लेकर बाकी एतिहात बरती जा रही हैं.

क्या है नोरोवायरस?
सेंटर फोर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के मुताबिक, नोरोवायरस संक्रामक संक्रमण है. ये डायरिया, उल्टी, मतली और पेट दर्द की वजह बनता है. पब्लिक हेल्थ इंग्लैंड ने कहा, “संक्रमित लोगों या दूषित सतह के संपर्क में आने से ये आसानी से फैल सकता है लेकिन संक्रमित लोगों में से मात्र कुछ ही दूसरे शख्स को बीमार कर सकते हैं.” पब्लिक हेल्थ इंग्लैंड ने उसे ‘विंटर वोमिटिंग बग’ बताया है और आम तौर से सर्दी के महीनों में हमला करता है. अधिकतर संक्रमण की वजह बीमार लोगों के संपर्क या दूषित सतह या दूषित फूड या ड्रिंक का सेवन होता है. नोरोवायरस बहुत संक्रामक है और उल्टी, डायरिया का कारण बनता है, हालांकि ये आम तौर से कुछ दिनों में खत्म हो जाता है. सीडीसी के मुताबिक, इस संक्रामक वायरस से संक्रमित होने वाले लोग संक्रमण होने के 1-3 दिनों के अंदर ठीक हो जाते हैं. 

नोरोवायरस के लक्षण
सीडीसी की तरफ से सूचीबद्ध किए गए नोरोवायरस के लक्षणों और संकेतों में डायरिया, उल्टी, मतली, पेट दर्द, बुखार, सिर दर्द और बदन दर्द शामिल हैं. कुछ मामलों में, वायरस पेट या आंतों के गंभीर सूजन का कारण बन सकता है.  

कैसे बरतें सावधानी?
हमारे शरीर के अंदर वायरस को दाखिल होने से रोकने के लिए स्वच्छता का पालन जरूरी है. पानी और साबुन का इस्तेमाल करते हुए हाथों की नियमित सफाई करें. कोविड-19 की तरह, अल्कोहल युक्त सैनेटाइजर नोरोवायरस को नहीं मारते हैं, इसलिए साबुन और पानी सबसे अच्छे विकल्प हैं.

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