मेरा बिलासपुर

SBR कालेज मैदान को बचाने मैदान में उतरे छात्र…प्रशासन पर लगाया लापरवाही का आरोप..कहा..मैदान को बचाने हर संभव करेंगे प्रयास

छात्रों ने कहा...बच्चों के पक्ष को शासन ने कोर्ट में पेश नहीं किया

बिलासपुर—प्रदेश के दूसरे सबसे पुराने और बड़े कालेज के मैदान को बचाने एसबीआर यानि जमुना प्रसाद वर्मा महाविद्यालय के छात्रों अब मोर्चा खोल दिया है। कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर छात्रों ने लिखित पीड़ा जाहिर कर बताया कि मैदान की बिक्री..छात्रों के साथ बहुत बड़ा अन्याय है। जिला प्रशासन से निवेदन है कि छात्रों के भविष्य को देखते हुए मैदान को बचाए। दुख की बात है कि कोर्ट में मैदान को बचाने के लिए जिला प्रशासन ने किसी प्रकार का गंभीर प्रयास नहीं किया गया। बेहतर होगा कोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील किया जाए। हर संभव मैदान को बचाया जाए।
              शासकीय जेपी वर्मा कॉलेज  का खेल मैदान आक्शन के फैसले के खिलाफ महाविद्यालय के छात्रों ने विरोध किया है। छात्रों ने हाईकोर्ट का फैसला आने के बाद जिला प्रशासन से लिखित निवेदन कर कालेज मैदान को बचाने की गुहार लगाई है। छात्रों ने जिला प्रशासन को बताया कि महाविद्यालय का खेल मैदान बिलासपुर रायपुर नेशनल हाईवे पर स्थित है। कोर्ट ने एसबीआर ट्रस्ट जमीन को बेचने का आदेश दिया है। यदि ऐसा किया जाता है  तो कॉलेज के करीब चार हजार छात्र छात्राओं के साथ विश्वासघात है। हजारों विद्यार्थियों को एक बंद बिल्डिंग में अध्ययन करने को मजबूर होगा पड़ेगा। यह जानते हुए भी कि कालेज में मैदान की क्या अहमियत होती है। 
स्वाभाविक तथ्य है कि बिना खेल मैदान के किसी भी शिक्षण संस्थान की कल्पना नहीं की जा सकती। शिक्षा व्यवस्था में खेलकूद को शैक्षणिक गतिविधियां का हिस्सा माना जाता है। जब मैदान ही बिक जाएगा तो खेलकूद कैलेन्डर के क्या मायने रह जाएंगे। छात्रों ने बताया कि बिना मैदान के कॉलेजों की मान्यता नहीं मिलती है। नैक की टीम जब ग्रेडिंग के लिए आती है तब खेल मैदान और
खेल सुविधाओं की जांच पड़ताल होती है। लेकिन यहां तो मैदान को ही बेचा जा रहा है। ऐसे में कालेज की अहमियत ही क्या रह जाएगी।
संभव है कि कॉलेज के हजारों छात्रों से उनका खेल मैदान छीन लिया जाएगा। ऐसा लगता है कि प्रशासन ने पूरी प्रक्रिया के दौरान केवल ट्र्स्ट के हितों का ध्यान रखा है। यह कितना बड़ा झूठ है कि एसबीआर ट्रस्ट.. शिक्षा की उन्नति के लिए ही मैदान बेचकर शहर के बाहर मैदान के लिए 10 एकड़ जमीन खरीदेगा। दरअसल यह छात्रों के साथ बहुत बड़ी साजिश है। हम इसे हरगिज बर्दास्त नहीं करेंगे।
 
 छात्रों ने बताया कि जिला प्रशासन की तरफ से कोर्ट में छात्र हित में एक भी शब्द नहीं बोला गया। यह जानते हुए भी कि ट्र्स्ट फर्जी तरीके से सिर्फ इसलिए बनाया गया। ताकि करोड़ों की जमीन हथियाकर जमीन माफिया अपनी जेब भर सकें। छात्र अपने आप को ठगा महसूस कर रहा है। लेकिन हम अपने कॉलेज के खेल मैदान को हरगिज बिकने नहीं देंगे। जरूरत पड़ी तो उग्र आंदोलन करेंगे।

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