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Congress Chintan Shivir- महंगाई और ज्ञानवापी मस्जिद के सर्वे पर चिदंबरम का Modi सरकार पर निशाना,कही ये बात

P Chidambaram on Modi Government:  राजस्थान के उदयपुर में जारी कांग्रेस के चितंन शिविर का आज दूसरा दिन है. इस बीच पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की और महंगाई, वाराणसी के ज्ञानपावी मस्जिद में हो रहे सर्वे को लेकर केंद्र की मोदी सरकार पर निशाना साधा. एक सवाल के जवाब में चिदंबरम ने कहा कि भारत में श्रीलंका जैसी स्थिति का डर नहीं है. मंहगाई केंद्र सरकार की गलत नीतियों की वजह से बढ़ रही है.  उन्होंने कहा कि राज्यों को मिलने वाली GST अनुदान व्यवस्था को कम से कम 3 साल के लिए बढ़ाया जाए जो इस साल जून में खत्म होने वाली है.

डॉलर के मुकाबले कमजोर होते रुपये पर चिदंबरम ने कहा कि 2014 में नरेंद्र मोदी प्रति डॉलर रेट 40 रुपये पर लाने का वादा करते थे, जबकि एक्सचेंज रेट बाजार के हिसाब से बदलता है. चिदंबरम ने कहा कि बढ़ती मंहगाई और बढ़ते ब्याज दर के कारण डॉलर बाहर जा रहा है. स्थिति संभालने में सरकार नाकाम है. 

कांग्रेस ने ज्ञानवापी मस्जिद में सर्वे पर सवाल उठाए हैं. पी चिदंबरम ने कहा कि 1991 में नरसिम्हा राव सरकार ने बेहद सोच समझ कर पूजास्थल कानून बनाया था उसका पालन होना चाहिए. किसी भी पूजास्थल में बदलाव नहीं होना चाहिए क्योंकि इससे टकराव बढ़ेगा.

कांग्रेस के नव संकल्प चिंतन शिविर का आज दूसरा दिन

उदयपुर में चल रहे कांग्रेस के नव संकल्प चिंतन शिविर का आज दूसरा दिन है. शिविर में अलग-अलग चर्चाओं के दौरान RSS और BJP की हिंदुत्व की राजनीति से लड़ने की रणनीति पर चर्चा हुई है. सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक एक प्रस्ताव में कहा गया है कि पार्टी को BJP और RSS के नैरेटिव में ना फंस कर उससे अलग विकल्प देना चाहिए और उस दिशा में राजनीतिक संघर्ष आगे बढ़ाना चाहिए.

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मिली जानकारी के मुताबिक इस प्रस्ताव में कहा गया है कि एक तरफ जब RSS और BJP हिंदुत्व की राजनीति कर रहे हैं तब कांग्रेस को उनके इस जाल में नहीं फंसना चाहिए. ऐसे में या तो कांग्रेस हिंदुत्व की राजनीति में देश को RSS/BJP से भी ज़्यादा मज़बूत कोई विकल्प दे या फिर इससे पलट राजनीतिक सोच और विकल्प देश के सामने रखे.

इस प्रस्ताव में आगे कहा गया है कि ज़ाहिर है कांग्रेस के लिए पहला विकल्प बेहतर नहीं होगा लिहाजा पार्टी को BJP और RSS के नैरेटिव में ना फंस कर उससे अलग विकल्प देना चाहिए और उस दिशा में राजनीतिक संघर्ष आगे बढ़ाना चाहिए.

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