अपोलो और एसईसीएल ने दबाए करोड़ों रूपए

IMG_20150826_131148बिलासपुर— अपोलो और एसईसीएल के खिलाफ आज लिंगियाडीह सरपंच ने कलेक्टर से मिलकर मूल्यांकन राशि जमा नहीं किया जाने की शिकायत की है। सरपंच अनिल राठौर का आरोप है कि अपोलों और एसईसीएल ने पिछले पांच छः साल से पंचायत में राजस्व का भुगतान नहीं किया है। बार बार पत्र व्यवहार के बाद भी प्रबंधन मामले को अनसुना कर रहा है।

                     लिंगियाडीह सरपंच अनिल राठौर ने सीजी वाल को बताया कि साल 2009 से 2015 के बीच एसईसीएल ने पंचायत को करोंड़ों रूपए का राजस्व नहीं दिया है। अपोलो प्रबंधन ने भी बार-बार कहे जाने के बाद भी पंचायत को साल 2013 से 2015 तक राजस्व का भुगतान नहीं किया है। राठौर ने बताया कि पंचायत की बातों को दोनों ही प्रबंधन गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। जिसके चलते पंचायत को करोंड़ों रूपए का नुकसान हो रहा है।

               अनिल राठौर के अनुसार शर्तों के अनुसार एसईसीएल को प्रतिवर्ष राजस्व के तौर पर लगभग चार लाख पचास हजार रूपए पंचायत को दिया जाना चाहिए। पिछले सात साल से एसईसीएल ने एक रूपए का भी भुगतान नहीं किया है। लिंगियाडीह सरपंच ने बताया कि एसईसीएल का 60 प्रतिशत महत्वपूर्ण वसाहट वाला हिस्सा लिंगियाडीह पंचायत की जमीन में है। मात्र चालिस प्रतिशत हिस्सा ही निगम क्षेत्र में आता है। ऐसी सूरत में पंचायत के हिस्से में मूल्यांकन राशि काफी कम है। राठौर के अनुसार लिंगियाडीह में एसईसीएल का क्षेत्र अधिक हिस्से में है बावजूद प्रतिवर्ष सिर्फ साढ़े चार लाख रूपए ही दिये जाते हैं। जो पिछले सात साल मिल भी नहीं रहा है। जबकि मात्र चालिस प्रतिशत हिस्सा होने के बाद भी एसईसीएल निगम को प्रतिवर्ष एक करोड़ चालिस लाख रूपए का राजस्व देता है। जो हमारे साथ अन्याय है।

                अनिल राठौर ने कलेक्टर से मिलकर लिखित शिकायत में कहा कि अपोलों ने पिछले तीन साल से मूल्यांकन शुल्क जमा नहीं किया है। उसने प्रतिवर्ष तीन लाख नब्बे हजार की दर से बार बार मूल्यांकन के बाद भी रकम जमा नहीं किया है। कलेक्टर से हमने अपील की है कि इन संस्थाओं से जल्द से जल्द लिंगियाडीह पंचायत का हक ना केवल दिलाया जाए बल्कि मूल्यांकन राशि को भी बढ़ाया जाए।

                   अनिल राठौर ने कहा कि यदि हमारी बातों को अनसुना किया जाता है तो हम कोर्ट की शरण लेंगे।

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