‘शिक्षक दिवस’ के संकल्प को याद कर लीजिए साहब..!CORONA वारियर्स के रूप में स्पेशल ड्यूटी सर्विस बुक में भी दर्ज होनी चाहिए

शिक्षक,गैर शिक्षक,पदों ,भर्ती,पात्र,अपात्रों, सूची जारी,दावा आपत्ति ,समय,राजनादगांव,छत्तीसगढ़

सुरजपुर (मनीष जायसवाल)गुरु की महिमा का बखान अधिकारियों के लेख और सत्ता के नुमाइंदों ने जो शिक्षक दिवस पर किया होगा वह कोरोना काल मे नजर आता हुआ दिखाई देता है। प्रदेश के बहुत से शिक्षक कोरोना वारियर्स के रुप मे  कई मोर्चे पर अग्रीम पंक्ति में रह कर अपनी महत्वपूर्ण सेवाएं दे रहे है। इन्ही सेवाओ को आधार मान कर  बहुत से  शिक्षक शासन से मांग कर रहे है कि उनके कोरोना ड्यूटी काल को स्पेशल कार्य मानते हुए उनके सर्विस बुक में इंद्राज(एन्ट्री)किया जाना चाहिए। अभी तक शिक्षको अगर छुट्टियों के दौरान जो कार्य करते है तो उन्हे अर्जित अवकाश के एक बटा तीन लाभ मिलता है । अर्थात तीन दिन कार्य करने पर एक दिन का अर्जित अवकाश गिना जाता है।परंतु शिक्षक कोरोना काल को विशेष कार्य मान कर चल रहे है। इस लिए वे चाहते है कि उन्होंने जो एक मई से बाद कार्य किया है। उंसे  उस दिन को पूर्ण अर्जित अवकाश देना चाहिए। …. तनाव और खतरों के बीच शिक्षको ने प्रथम पंक्ति में रह कर कई मत्वपूर्ण गैर शिक्षकिय कार्य किये है।सीजीवालडॉटकॉम के व्हाट्सएप NEWS ग्रुप से जुडने के लिए यहाँ क्लिक कीजिये

इसी कड़ी में अब  यह भी चाह रहे है कि उसके लिए जिस विभाग ने उनके लिए कार्य आदेश जारी किया था । उंसे वही विभाग भविष्य में प्रमाण पत्र दे। वही जिन शिक्षको ने संकुल समन्वयकों के कहने पर कोरोना काल मे सेवाए कर चूके या कर रहे  है। उन्हें ब्लाक व जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा कार्य आदेश प्रमाणित किया जाए। 

इन्ही सब विषयो को लेकर हुई एक चर्चा में सहायक शिक्षक फेडरेशन के प्रदेश अध्यक्ष  मनीष मिश्रा का कहना है कि प्रदेश का शिक्षक  संवर्ग इस भीषण गर्मी में अपनी  जान जोखिम में डालकर देश के कोरोना हॉट स्पॉट से आये प्रवासी मजदूरों की सेवा में लगा हुआ है। इस काल खंड में शिक्षको ने अपने सामर्थ से अधिक कठिन परिस्थितियों में जो कर्म किया है वह पारितोषिक प्राधिकार रखते है। शिक्षको ने  अपने ग्रीष्मकालीन अवकाश के समय  में सेवा कार्य के बदले डबल अर्जित अवकाश की स्वीकृति प्रदान किया जाना चाहिए…!  ताकि कोरोना काल में अतिरिक्त कार्य करने वाले शिक्षको का हौसला बढ़ सके वैसे भी जब हड़ताल काल को अर्जित अवकाश से समायोजित किया जा सकता हैं तो अतिरिक्त ड्यूटी के लिए ऐसा प्रवधान क्यो नही…शिक्षक  शासन से मांग करता है  उनके कोरोना ड्यूटी काल को स्पेशल कार्य मानते हुए उनके सर्विस बुक में इंद्राज(एन्ट्री)किया  जाए। 

गवर्नमेंट एंप्लॉइज एसोशिएशन के प्रदेश अध्यक्ष कृष्ण कुमार नवरंग का कहना है कि कि शासन ने टीम लीडर की भांति कोरोना काल में सेवा दे रहे सभी कर्मचारियों को मनोबल को बढ़ाया जरूर है पर कागजो में कुछ नही दिखाई देता है। शासकीय कर्मचारियों के सरकारी दस्तावेजों में लिखे हुए आदेशों के मायने होते है। कोरोना ड्यूटी काल को स्पेशल कार्य मानते हुए उनके सर्विस बुक में इंद्राज(एन्ट्री)किया जाने के निर्देश शासन को देना चाहिए। और पूर्ण अर्जित अवकाश में गिना जाना चाहिए।

 महिला शिक्षक नेता गंगा पासी का कहना है कि  पुरुषों के साथ महिला शिक्षकों ने भी हर मोर्चे पर साथ दिया है वे भी कोरोना के खिलाफ जंग में  पुरुषों के बराबर उपयोगी साबित हुई है। किसी भी कर्मचारी के लिए सेवा पुस्तिका पूरे सेवा काल का लेखा जोखा रहता है। कोरोना काल मे किये गए सेवा का महत्वपूर्ण उलेख होना जरूरी है। हम इस विचार का समर्थन करते है। संघ में इस विषय का रखने वाले है।

loading...
loading...

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

loading...