कांग्रेस के आदिवासी नेता का पीएम को खत..बताया..संविधानिक प्रावधानों के खिलाफ कोल ब्लाक आबंटन प्रक्रिया.. वनवासियों के साथ हो रहा अन्याय

बिलासपुर—- कांग्रेस नेता और अखिल भारतीय विकास परिषद के छत्तीसगढ़ प्रदेश अध्यक्ष संत कुमार नेताम ने कोल खदान आवंटन को लेकर केन्द्र सरकार पर आदिवासी हितों की अनदेखी  का आरोप लगाया है। संतकुमार नेताम ने प्रधानमंत्री और भारत सरकार के आदिवासी मामले के मंत्री को पत्र लिखा है। पत्र में नेताम ने पाचवी अनुसूची क्षेत्र में कोल ब्लाक आबंटन और निलामी को रद्द किए जाने की मांग की है। 

               पांचवी और छठवी अनुसूची क्षेत्र में कोल आवंटन और निलामी की प्रक्रिया को अखिल भारतीय विकास परिषद के प्रदेश अध्यक्ष गैर जरूरी और नियम विरूद्ध बताया है। प्रदेश अध्यक्ष और कांग्रेस नेता संतकुमार नेताम ने प्रधानमंत्री और भारत सरकार आदिवासी मामले के मंत्री को पत्र लिखकर कोल आबंटन और निलामी को निरस्त किए जाने की मांग की है। नेताम ने कहा कि कोल आबंटन और निलामी की प्रक्रिया कानून और संविधान के मूल भावना के खिलाफ है। 

                          संत कुमार नेताम ने बताया कि संविधान में पाचवी और छठवी अनुसूची में आदिवासी समाज और क्षेत्र को लेकर विशेष प्रावधान है। पेसा और वन अधिकारी कानून लागूर होने के बाद अनुसूचित क्षेत्र के गांवों में ग्राम सभा के बिना अनुमति कोई भी काम नहीं कराया जा सकता है। संवैधानिक स्थिति के बावजूद केन्द्र सरकार कोल ब्लाकों की निलामी और आबंटन कर रहा है। यह अनुसूची पांच और पेसा समेत वन अधिकार कानून के खिलाफ है।

                   नेताम ने चिंता जाहिर करते हुए कहा कि पिछले पचास सालों में सार्वजनिक और निजी कम्पनियों ने जिस भी क्षेत्र में कोयला खनन को लेकर पूंची निवेश किया है। क्षेत्र में रहने वाले आदिवासियों की आर्थिक और सामाजिक स्थिति बद से बदतर हुई है। कोल कम्पनियों ने ज्यादातर नौकरियां बाहरी लोगों को दिया है। प्रत्यक्ष रोजगार के साधनों में भू-विस्थापितों और आदिवासियों की घोर उपेक्षा हुई है।

          नेता ने कहा वर्तमान समय में कोयला उत्पादन में मशीनों का सर्वाधिक प्रयोग हो रहा है। रोजगार के अवसर कम हुए हैं। वन क्षेत्रों में तेंदूपत्ता, महुआ, सालबीज, और अन्य वन उत्पादों में भारी कमी आयी है।  जबकि खेती और वन उपज ही आदिवासियों के जीविका का एक मात्र साधन है। कोयला खनन के बाद आदिवासी समाज को भारी परेशानी से गुजरना पड़ रहा है। 

                      नेताम ने बताया कि आदिवासी क्षेत्र में किसी भी कोयला ब्लाक आबंटन या निलामी के पहले क्षेत्र की ग्राम पंचायतों की सहमति जरूरी है। क्योंकि संविधान में आदिवासी क्षेत्र में आदिवासियों को विशेष अधिकारी दिया गया है। लेकिन वर्तमान में अधिकारों को सोची समझी रणनीति के तहत छीना जा रहा है। वर्तमान में घोषित कोल ब्लाक निलामी पर तुरंत रोक लगाने की जरूरत है। प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में नेताम ने कहा है कि केन्द्र सरकार राज्य सराकर को निर्देश दे कि पेसा और वन अधिकार कानून को सौ प्रतिशत लागू करे। 

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