नेताजी युवाओं के प्रेरणा श्रोत…कांग्रेस

IMG-20160123-WA0210बिलासपुर—जिला कांग्रेस कमेटी शहर ने नेता जी सुभागष चन्द्र बोस को याद किया। सुभाष चौक सरकण्डा स्थित नेता जी की प्रतिमा पर कांग्रेसियों ने माल्यार्पण किया। इस मौके पर शहर कांग्रेस अध्यक्ष नरेन्द्र बोलर, वरिष्ठ कांग्रेस नेता जफर अली, हरीश तिवारी सहित शहर काग्रेस और ब्लाक कांग्रेस 02 के पदाधिकारी उपस्थित थे। उपस्थित कांग्रेसियों ने नेताजी श्रद्धांजली अर्पित कर बारी बारी से महान सपूत के जीवन पर प्रकाश डाला।

                    शहर अध्यक्ष नरेन्द्र बोलर ने कहा कि सुभाष चन्द्र बोस भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के अजेय योद्धा थे। उन्होने जीवन पर्यंत गुलामी स्वीकार नहीं किया। देश की आन, बान और शान के लिए मर- मिटने वाले सपूत थे। सुभाष चन्द्र बोस ने द्वितीय विश्व युद्ध में जापान और जर्मनी के सहायता से ब्रिटिश सरकार को चुनौती दी और वर्मा से लेकर कोहिमा तक ब्रिटिश सेना के दांत खट्टे कर दिये। उनके साहसी कदम से जापान ने अंडमार निकोबार द्वीप समूह को सुभाष चन्द्र बोस को प्रदान किया। सुभाष चन्द्र बोस ने दो ऐतिहासिक नारा दिये “दिल्ली चलों“ और तुम मुझे खुन दो मैं तुम्हे आजादी दूंगा। जो हमे आज भी प्रेरित करता है।
वरिष्ठ कांग्रेसी जफर अली ने सुभाष चन्द्र बोस की जीवन पर प्रकाश डालते हुये कहा कि 23 जनवरी 1897 को एक सम्पन्न और प्रतिष्ठित परिवार में कटक उडीसा प्रान्त में नेताजी का जन्म हुआ। 14 भाई बहनों में नेता जी 9 वें नम्बर के संतान थे। इंग्लैड से उन्होने सी.आई.एस. की परीक्षा पास की। पराधीनता स्वीकार नहीं किया और सी.आई.एस. का पद त्याग दिया। ब्रिटेन से आने के पश्चात् स्वतंत्रता संग्राम में भाग लिये। गांधी जी के सम्पर्क में आये और 1938 के कांग्रेस के हरिपुरा अधिवेशन में उन्हे अखिल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का अध्यक्ष चुना गया।  एक वर्ष के कार्यकाल में उन्होने विज्ञान, कृषि, उद्योग जैसे क्षेत्रों को कांग्रेस से जोड़ने का प्रयास किया।

संभागीय प्रवक्ता अभयनारायण राय ने कहा कि, नेता जी के  जीवन इतिहास को लेकर भाजपा और आर.एस.एस. ने जो भ्रम पैदा किया है देश की जनता उससे दुखी है। आर.एस.एस. कांग्रेस और आजादी से जुड़े एतिहासिक पुरूषों की जीवनी को अपने लाभ के अनुसार परिभाषित करने का प्रयास कर रही है। लेकिन नेताजी जैसे महापुरूषों का इतिहास चिर कालजयी है। आने वाली पीढ़ी को बहुत कुछ सिखने को मिलेगा।

                इस मौके पर प्रमुख रूप से माधव चिंतामन ओत्तलवार, शैलेन्द्र जायसवाल, रीता मजुमदार, सुभाष ठाकुर, निर्मल मानिकपुरी, हरमेन्द्र शुक्ला, डॉ. रमेश गुप्ता, बद्री जायसवाल, गणेश रजक, त्रिभुवन कश्यप, विनोद शर्मा, अनिल सिंह चैहान, अखिलेश श्रीवास, कुंदन राव कामले, मनोज शर्मा, भरत जुर्यानी, राकेश सोनी, प्रमोद गुप्ता, महेत राम सिंघरौल, राजकुमार यादव आदि उपस्थित थे।

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