देश का बजट जनता के साथ छलावा– जोगी

IMG-20160301-WA0008रायपुर– अजीत जोगी ने रायपुर में पत्रकार वार्ता में कहा कि भारत सरकार का आम बजट घोर निराशावादी और जनता के साथ छलावा है। बजट से गरीब, मिडिल क्लास और अमीर किसी को भी कुछ नही मिलने वाला है। प्रधान मंत्री के वादे के अनुसार जनता को बजट से बहुत कुछ उमीदें थी लेकिन सबको केवल निराशा हाथ लगी है।

                किसानों की आय 2022 तक दुगनी करने की घोषणा ज़रूर हुई है लेकिन यह कैसे करेंगे इसका न कोई जिक्र है और ना ही कोई कार्य योजना है। २०२२ मतलब अब से ६ वर्षों बाद यह आय दुगुनी होगी। इन ६ वर्षों में मुद्रास्फृति की दर की वजह से उनका व्यय भी बढ़ेगा। किसानों को वास्तविकता में लाभ पहुंचाने के लिए एमएसपी बढ़ाया जाना चाहिए था।  बोनस की घोषणा होनी चाहिए थी। कर्ज माफ़ी  के लिए कुछ छूट दी जानी चाहिए थी।  फसल बीमा के लिए और राशि की जरुरत थी। किसानों की खेती में लगी लागत और उनको हुए नुकसान के बीच का फासला बहुत ज्यादा है। सिंचाई के लिए आबंटित  की गयी 86500 करोड़ की राशि से सिंचित रकबे में १ प्रतिशत से ज्यादा की वृद्धि नहीं होगी। इन सबसे यह साफ़ मालूम होता है कि किसानों को सिर्फ कागज़ी राहत प्रदान की गयी है ।

                 सर्विस टैक्स में 0.5 % कृषि कल्याण के माध्यम से वृद्धि की गयी है। इस वृद्धि की वजह से सर्विस टैक्स अब  15% हो गया। प्रत्येक वस्तु महंगी हो जायेगी। खाना, मोबाइल पर बात करना, ट्रेन या विमान से आवागमन करना सब महंगा। जोगी ने बताया कि इन्कम टैक्स स्लैब में किसी प्कार का बदलाव नहीं किया गया है। जनता को उम्मीद थी की ५ लाख तक सालाना आय वाले लोग करमुक्त हो जाएंगे। आयकर छूट पाने के लिए 80 C के तहत किये गए निवेश की सीमा भी नहीं बढ़ाई गयी।

                                नौकरी पेशा  व्यक्ति की जीवनभर की  सबसे बड़ी जमा पूंजी उसकी भविष्य निधि रकम  होता है।  इसी रकम से वह अपने बच्चों की उच्च शिक्षा, उनका विवाह आदि करता है।  नौकरी पेशा वयक्ति आयकर भी पूरी ईमानदारी के साथ भरता है।  ऐसे में पीएफ के ६०% पैसे को आयकर के दायरे में लाना न केवल नौकरी पेशे से जुड़े लोगों के भविष्य से खिलवाड़ है बल्कि बहुत अमानवीय भी है।

                               हाउस रेंट में दी गयी छूट भी एक दिखावा ही है।  इस छूट को सालाना 24000 से बढ़ा कर 60000 ज़रूर किया गया है लेकिन यह सिर्फ ऐसे कर्मचारियों पर लागू होगा जिनके वेतन में एचआरए शामिल नहीं है।

                    विभिन्न सेक्टरों  में रोज़गार बढ़ाने के लिए भी कोई ठोस कदम नहीं उठाये गए हैं।  सूचना तकनिकी सेक्टर सर्विस सेक्टर में सर्वाधिक नौकरी है।  इसके बावजूद इसके लिए कोई रियायतें नहीं दी गयी हैं। बैंकों में ५ लाख करोड़ के एनपीए  हैं। ऐसे में इनको दी गयी २५००० करोड़ की राशि नाकाफी है। टेक्सटाइल में महंगे गारमेंट्स पर टैक्स बढ़ा। यह सेक्टर प्रतिवर्ष ६ लाख नए रोज़गार देता है। ऑटोमोबाइल में कर बढ़ा दिया गया है। पहले से मंद चल रहे इस  सेक्टर की परेशानियां और बढ़ जाएंगी।  ऐसे में किसी भी सेक्टर के लिए नयी नौकरियां देना बहुत ज्यादा संभव नहीं हैं।

              जोगी ने कहा कि प्रधान मंत्री की स्किल इन्डिया के तहत नए प्रशिक्षण सेंटर खोलने की घोषणा जरूर हुई है लेकिन गौर करने वाली बात यह है कि वर्तमान में प्रधान मंत्री कौशल विकास योजना के तहत प्रशिक्षित युवाओं को रोजगार  बहुत ही काम संख्या में मिल रहा है।  क्या खाली प्रशिक्षण केंद्र खोल देने से और उनमें कुछ युवाओं को प्रशिक्षण मात्र दे देने से सरकार का दायित्व पूरा हो जाता है?

                   जोगी ने कहा कि अमीरों पर भी अतिरिक्त टैक्स की मार पड़ी है। १ करोड़ से ऊपर सालाना आय पर ३% अधिक सरचार्ज लगाया गया है । १० लाख से ज्यादा के  डिविडेंड पर भी १०% टैक्स लग गया है । यदि इस अतिरिक्त टैक्स की राशि ज़रूरतमंदों तक पहुँचती तो किसी को कोई भी आपत्ति नहीं होती। लेकिन यहाँ तो गरीबों और माध्यम वर्गीय परिवारों को भी कोई लाभ नहीं पहुचाया गया है।

            उन्होने कहा कि प्रदेश के लगभग ३५० उद्योग अत्यधिक मंदी के दौर से गुज़र  रहे हैं।  कोयले के दामों में करों की वजह से होने वाली वृद्धि के कारण पावर और स्टील उद्योग की उत्पादन लागत बढ़ जायेगी । ऐसे में उद्योगों के बंद हो जाने पर प्रदेश के १ लाख से ज्यादा लोगों पर बेरोज़गारी का संकट खड़ा हो जाएगा।

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