बिना बिजली बजती है मोबाइल…संसदीय सचिव का अनोखा गांव…चार्ज होने जाते हैं मध्यप्रदेश

IMG-20170915-WA0037 कवर्धा— (सुरज मानिकपुरी)–कवर्धा जिला का दुर्गम वनांचल क्षेत्र….आज भी 18 वीं शताब्दी को जी रहा है….। तेलियापानी धोबे गांव को देखने के बाद एकबारगी से विश्वास ही नहीं होता कि हम 21 वीं शताब्दी की जिन्दगी जी रहे हैं। विश्वास नहीं होता कि…हमने मंगल की धरती पर मंगलयान को उतारा है। जबकि जमीन पर आज भी हम बिजली पानी और सड़क के लिए तरस रहे हैं। सुनने में शायद कानों को विश्वास ना हो…लेकिन यह सच है…। तेलियापानी धोबे गांव में सब कुछ ऐसा ही है…जैसा हमने 18 वीं शताब्दी की जिन्दगी को किताबों में पढ़ा है।

                  तेलियापानी धोबे गांव का नाता छत्तीसगढ़ सरकार के संसदीय सचिव से है। मतलब राज्य स्तर दर्जा प्राप्त मंत्री से जुड़ा है गांव तेलियापानी धोबे…। जिस तरह की समस्याओं से यह गांव जूझ रहा है उसे शब्दों में समेटना दुश्वार भले हो…लेकिन कुछ तो लिखा जा सकता है। कुछ ऐसा कि लोग पढ़ें…समझें…और गुने कि सुविधाहीन आदिवासी अंचल में जिन्दगी की गाड़ी कैसे चलती है।

             तेलियापानी धोबे गांव पहुंचने के बाद ऐसा लगता है कि ग्रामीणों की समस्याओं से किसी को सरोकार नही है…सरकार को भी नहीं…कर्मचारियों को तो कतई नहीं है….। पांच साल में एक बार नेताओं का गांव से नाता जुड़ता है। चुनाव खत्म होते ही वह रिश्ता भी कच्चें धागों की तरह टूट जाता हैं। टूट जाती है ग्रामीणों की विश्वास की डोर…। यहां आज भी सडक, पानी, स्वास्थ्य सुविधा के लिए लोग तरस रहे हैं। गांव के लोग इतने भोले हैं कि समस्या का समाधान कहां होगा यह भी नहीं जानते। लेकिन उन्हें  मालूम है कि जो पांच साल में एक बार आते हैं उन्हें जनप्रतिनिध कहते हैं । उनमें पक्का विश्वास है कि ईवीएम बटन दबाने के बाद जनप्रतिनिधि फिर पांच साल बाद ही मुड़कर देखेंगे। यदि इतना भी विश्वास ना करें…तो सामाजिक और जंगली होने में बहुत अंतर नहीं रह जाएगा।

                          तेलियापानी धोबे गांव कवर्धा जिले के पंडरिया विकासखंड का हिस्सा है। छतीसगढ़ राज्य का सीमावर्ती गाँव है। जो मध्यप्रदेश के धुरकुटा गांव से मात्र 6 किलोमीटर दूर है। पिछले चार महीनों से तेलियापानी धोबे से बिजलीरानी नाराज है। बिजली के खम्भे जमीन से उखड़ गये हैं। उखड़े भी क्यों नही, क्योकि खम्भों को जमीन में गाड़ा नहीं…बल्कि फंसाया जो गया था।  मतलब कुछ एक दो फिट के गड्ठों में खम्भों को धंसा दिया गया था। IMG-20170915-WA0036

                   खंम्भों के रास्ते मुश्किल से साल भर पहले गांव को जगमग करने बिजली आई। 50 दिन बाद बिजलीरानी नाराज भी हो गयीं। वही हुआ जो होना था…नाराजगी ऐसी कि बिजली चार महीने बाद भी नहीं लौटी। ग्रामीण आज भी बिजली रानी का इंतजार कर रहे हैं।

                   गांव से बिजली के रूठने की मुख्य वजह भ्रष्टाचार को बताया जा रहा है। सम्न्धित विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों ने कुछ अधिक पैसा बचाने के लिए गुणव्त्ताहीन काम को अंजाम दे दिया। खम्भे जमीन पर लोटपोट कर रहे हैं। गांव की बदनसीबी कहें या व्यवस्था को दोष दें…सरप्लस बिजली वाले राज्य के एक छोटे से गांव का मुंह तेलियापानी धोबे से कुछ दूर मध्यप्रदेश का पिद्दा सा गांव मुंह चिढ़ाता है। वहां रात में भी दिन जैसा माहौल रहता है। खंभो पर बिजली के लट्टू तेलियापानी धोबे वासियों का मुंह चिढ़ाता है। तेलियापानी में समस्या बिजली की होती तो बात अलग थी.. यहां ना तो साफ पानी की व्यस्था है और ना ही यहां की सडकों को पक्के तौर पर ठीक कहा जा सकता है।

                                      कहने का मतलब है कि यदि किसी को आदिम जीवन देखना है तो वे लोग तेलियापानी धोेबे जरूर आएं….। अपने ज्ञान को पैना करें। महसूस करें कि 18 वीं सदी का जीवन कैसा होता है। हम 21 वीं सदी में…मंगल की धरती पर उतरने वाले विशाल भारत के एक छोटे से राज्य के…एक छोटे से जिले में… एक छोटे से विकासखण्ड के…. एक छोटे से गांव की स्थिति को…. करीब से देखे। देखें और महसूस करें कि…. जिन्दगी का नरक होना किसे कहते हैं।

            IMG-20170915-WA0038           तेलियापानी गांव छत्तीसगढ़ सरकार में संसदीय मंत्री मोतीराम चन्द्रवंशी के विधानसभा क्षेत्र का हिस्सा है। गांव में राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र बैगा और अन्य दूसरी जनजातियों के अलावा सामान्य लोगों का भी घर है। आदिवासी बहुल गांव की जनसंख्या करीब 500 है। यहां के लोग मोबाइल के शौकीन हैं। लेकिन चार्ज करने मध्यप्रदेश जाते हैं।

           चार महीने पहले भ्रष्टाचार से नाराज होकर गाँव से रूठकर बिजली चली गयी। ग्रामीणों को मोटी चमड़ी वाले भ्रष्ट कर्मचारियों के करतूतों का खामियजा भुगतना पड़ रहा है। रात होते ही जहरीले जीव जन्तु विचरण करने लगते हैं। पिछले  चार महीनों में जहरीले जीव जन्तुओं ने कई ग्रामीणों को शिकार बनया। गाँव में मीडिल स्कूल भी है। स्कूल दिन में ही लगता है। लेकिन घर की पढ़ाई देर रात तक चिमनी में होती है। क्योंकि शाम होते ही अंधेरा कायम हो जाता है।

बिजली छत्तीसगढ की…जलती है मध्यप्रदेश में

            मुख्यमंत्री ने बार-बार, हर बार और कई बार कहा है कि छत्तीसगढ में सरप्लस बिजली उत्पादन होता है। मतलब खपत से अधिक बिजली की पैदावार छत्तीसगढ़ में होती है। लेकिन तेलियापानी धोबे के लोग मध्यप्रदेश राज्य से मोबाइल चार्ज करते हैं। जबकि सबको मालूम है कि मध्यप्रदेश में जलने वाली बिजली छत्तीसगढ में बनती है। तेलियापानी धोबे छत्तीसगढ़ राज्य का अंतिम छोर का गाँव है | मोबाइल प्रेमियों को पावर चार्ज के लिए मध्यप्रदेश राज्य के जिला डिंडोरी समनापुर ब्लाक के धुरकुटा गाँव जाना होता है। गांव की दूरी 6 किलोमीटर है | सडक के एक किनारे मध्यप्रदेश….दूसरा किनारा छतीसगढ़ का होता है |

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