संघ के आंदोलन का असरःजबरिया रिटायरमेंट से पहले कर्मचारियों को दिया जा रहा सुनवाई का मौका

PRYADAV_MARCH_FILE_VSरायपुर । छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से शुरू की गई जबरिया सेवानिवृत्ति की नीति का छत्तीसगढ़ प्रदेश  तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ लगातार विरोध कर रहा है। इस सिलसिले में संघ के प्रताध्यक्ष पी.आर. यादव की अगुवाई में राजधानी और न्यायधानी में धरना प्रदर्शन किया जा चुका है। संघ ने इस सिलसिले में मांगे नहीं माने जाने पर काम बंद हड़ताल की भी चेतावनी दे रखी है। उधर आंदोलन का सरकार पर असर शुरू हो गया है और शसन ने अपनी नीति में बदलाव करते हुए अब कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई से पहले 15 दिन का नोटिस जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। ऐसा ही एक नोटिस बिलासपुर के आदिवासी  विभाग के कर्मचारी को जारी किया गया है।
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                                 छत्तीसगढ़ प्रदेश तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ के प्रांताध्यक्ष पी. आर. .यादव ने पहले की कहा था कि जबरिया सेवानिवृत्ति को लेकर शासन की कार्रवाई नैसर्गिक न्याय के सिद्धांत के खिलाफ है। चूंकि इसमे कर्मचारी को अपनी बात रखने का मौका नहीं दिया जा रहा है औऱ एकतरफा जबरिया रिटायर किया जा रहा है। इसे लेकर संघ ने आँदोलन शुरू किया है। और अब तक रायपुर -बिलासपुर में धरना प्रदर्सन किए जा चुके हैं। संघ ने चेतावनी दे ऱखी है कि अगर शासन इस बारे में संघ की माँगों के अनुसार कार्रवाई की प्रक्रिया में बदलाव नहीं करती है तो आगो चलकर आँदोलन का विस्तार किया जाएगा। जिसके तहत कलमबंद हड़ताल भी की जा सकती है।

                                         उधर संघ के आँदोलन का असर शासन स्तर पर दिखाई देने लगा है और अब कार्रवाई से पहले कर्मचारियों को नोटिस जारी किए जा रहे हैं। ऐसा ही एक नोटिस बिलासपुर में कार्यालय कलेक्टर ( आदिवासी विकास) की ओर से जारी किया है। भृत्य के पद पर काम कर रहे एक कर्मचारी के नाम से शासकीय कार्यों में उदासीनता बरते जाने के संबंध में यह पत्र जारी किया गया है।जारी किए पत्र में कहा गया है कि-” प्रायः देखा गया है कि आपके द्वारा अपने शासकीय कार्यों का निर्वहन न कर शासकीय कार्यों मे हमेशा उदासीनता बरती जाती है। आपका यह कृत्य छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के नियम 03  की कंडिका 1,2, 3के विपरीत है।जिसके लिए आपके विरुद्ध शासन द्वारा जारी नीति -50 वर्ष की आय़ु या 20 वर्ष की सेवा नियामांतर्गत आवश्यक कार्यवाही करने पर विचार किया जा सकता है। अतः आपको प्रथम नोटिस के रूप में 15 दिवस का समय दिया जाता है। जिसमें आप अपना आचरण-व्यवहार एक शासकीय सेवक के मापदण्डों के अनुरूप प्रदर्शित करे। अन्यथा की स्थिति में आपके विरुद्ध विधि पूर्वक कार्यवाही की जाएगी। “

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