RTI एक्टिविस्ट ने पूछा-अपने कपड़ो पर कितना खर्च करते है प्रधानमंत्री,PMO ने दिया ये जवाब

pm-modi-in-indexनईदिल्ली।नरेंद्र मोदी के पीएम बनने के कुछ ही महीनों बाद उनका एक सूट काफी विवादों में आ गया था। पीएम मोदी के इस बंद गले वाले सूट में उनका पूरा नाम नरेंद्र दामोदर दास मोदी भी लिखा हुआ था। माना जा रहा था कि यह सूट काफी महंगा है। कांग्रेस ने इस सूट के लिए पीएम मोदी की आलोचना की थी। राहुल गांधी ने इसी सूट को निशाना बनाते हुए बीजेपी सरकार को सूट बूट की सरकार कहा था। अब एक आरटीआई के जरिये देश के प्रधानमंत्रियों द्वारा कपड़ों पर खर्च की जाने वाली रकम को लेकर रोचक जानकारी आई है। इस सूचना के साथ ही पीएम मोदी के कपड़ों के साथ जुड़ा विवाद भी खत्म होता नजर आ रहा है। दरअसल प्रधानमंत्री कार्यालय ने साफ कर दिया है कि पीएम मोदी के निजी पोशाक पर खर्च की जाने वाली रकम भारत सरकार द्वारा वहन नहीं की जाती है। आरटीआई एक्टिविस्ट रोहित सभरवाल ने पीएमओ से जानकारी मांगी थी कि 1998 से लेकर अबतक देश के प्रधानमंत्रियों के कपड़े पर कितना खर्च किया गया है। इस काल अवधि में अटल बिहारी वाजपेयी और मनमोहन सिंह भी आते हैं।




पीएमओ ने अपने जवाब में स्पष्ट रूप से कहा था कि मांगी गई सूचना व्यक्तिगत किस्म की है और इसे सरकारी रिकॉर्ड में शामिल नहीं किया जाता है। पीएमओ ने जवाब में यह भी कहा कि पीएम के निजी लिबास पर खर्च की गई राशि सरकार वहन नहीं करती है। आरटीआई कार्यकर्ता रोहित सभरवाल ने कहा कि अब यह विवाद हमेशा के लिए खत्म हो गया है कि भारत सरकार प्रधानमंत्रियों के कपड़े पर भारी पैसे खर्च करती है।


इस जानकारी के बाद बीजेपी ने कहा है कि विपक्षी दलों को अब समझ जाना चाहिए कि वह बेकार में हंगामा खड़ा कर रहे थे।बीजेपी नेता जीवन गुप्ता ने टीओआई को बताया कि यदि देश का प्रधानमंत्री अच्छे कपड़े पहनता है तो इससे देश की अच्छी छवि बनती है। उन्होंने कहा कि पीएम ने मात्र एक बार ही डिजाइनर सूट पहना था, जिसे बाद में नीलाम कर दिया गया था, और इससे मिले पैसे को स्वच्छ भारत अभियान में खर्च किया गया था। बता दें कि पीएम मोदी ने अमेरिका के राष्‍ट्रपति बराक ओबामा की भारत यात्रा के दौरान यह चर्चित सूट पहना था। बाद में इसे नीलाम किया गया था। इस सूट को गुजरात के व्यापारी लालजीभाई तुलसीबाई पटेल ने खरीदा था। इसके लिए उन्होंने 4 करोड़ 31 लाख 31 हजार 311 रुपये चुकाये थे। यह बोली 20 फरवरी 2015 को लगाई गई थी।

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