सिक्ख समाज में आज नैतिक शिक्षा की जरूरत – डॉ. जसबीर सिंह साबर

♦नाम के सिमरन से शक्ति आती है – पदभूषण डॉ इन्द्रजीत कौर
♦सिक्खों सेनापति बंदा बहादुर ने मुगल शासकों के अजेय होने के भ्रम को तोड़ा – डॉ. हरभजन सिंह
रायपुर-हम नाम और शब्दों को उपमा देते हैं। यदि नाम हमारे मन में बस जाए तभी जीवन है अन्यथा जीवन व्यर्थ है। श्री गुरु नानक देव जी ने कहा था कि जब नाम हमारे मन में बस जाता है तो वह हर जगह दिखाई देने लगता है। गुरु गोबिन्द सिंह जी के अनुसार नाम एक शक्ति है। वहीं गुरु अर्जुन देव जी ने कहा था कि जिसके मन में नाम बसता है उसमें अकाल पुरख की जोत नजर आती है। नाम के सिमरन से शक्ति आती है। यह बात सिक्ख इतिहास की जानकार और अमृतसर स्थित भगत पूरण सिंह आल इंडिया सोसायटी चैरिटेबल सोसायटी की अध्यक्ष पदभूषण डॉ. इन्द्रजीत कौर ने दुर्ग के स्टेशन रोड गुरुव्दारा में आज सिक्ख इतिहास और परंपरा विषय पर आयोजित एक सेमीनार में कही। सिक्ख इतिहास और परंपरा विषय पर पहली बार यह आयोजन छत्तीसगढ़ सिक्ख ऑफिसर्स वेलफेयर एसोसियेशन व्दारा किया गया था। सेमीनार में अमृतसर के सिक्ख सिक्ख विद्वान डॉ. जसबीर सिंह साबर और देहरादून से आए विद्वान लेखक डॉ. हरभजन सिंह ने अपने विचार व्यक्त किए।

सेमीनार में अमृतसर से आए सिक्ख विद्वान डॉ. जसबीर सिंह साबर ने कहा कि सिक्ख समाज में आज नैतिक शिक्षा की जरूरत है। नई तकनीक और नई सोच ही हमें आगे बढ़ाता है इसे अपनाने की जरूरत है। डॉ. जसबीर सिंह साबर ने कहा कि आज के जमाने में माता – पिता ही बच्चों के रोल मॉडल हैं। बच्चों को संस्कारित बनाने के लिए माता – पिता को ही संस्कारित होना होगा। इतिहास यह बताता है कि सिक्ख संस्कारित थे इसीलिए मुगल जनरल भी सिक्खों की इज्जत करते थे। सिक्ख अपने पहले गुरु श्री गुरुनानक देव जी के सेवा, सिमरन की कसौटी में हमेशा ही खरे उतरे हैं। डॉ. जसबीर ने आगे कहा कि मुगल शासकों के अत्याचारों के विरुध्द सिक्ख जरनल जस्सा सिंह आहुलवालिया ने महत्वपूर्ण भूमिका अदा की। उन्होंने मुगल शासक अहमद शाह अब्दाली चंगुल से महिलाओं को छुड़ा कर उनके घरों तक पहुंचाया। जस्सा सिंह को रामगढ़िया का तख्खलुस मिला। यदि आज सिक्ख दुनिया में आगे है तो इसका कारण है कि वह हमेशा से जिन्दगी के प्रति सकारात्मक रहा है।

सिक्खों ने हमेशा ही मानव कल्याण की दिशा में त्वरित गति से आगे आ कर कार्य किया है। मानवता के उद्देश्य को आत्सात करते हुए सिक्खों ने सेवा भाव से गुरुव्दारे ही नहीं वरन अपने घर के व्दारा भी लोगों के खोले है। उन्होंने ऋषिकेश के एक स्कूल का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां बुनियादी शिक्षा के साथ नैतिक शिक्षा भी दी जा रही है। नैतिक शिक्षा आज की जरूरत है। सब में जोत, जोत ही सोए श्लोको को उध्द्त करते हुए उन्होंने कहा कि नई तकनीक और नई सोच ही आगे बढ़ाता है इसे अपनाने की जरूरत है।

सेमीनार में देहरादून से आए सिक्ख विद्वान डॉ. हरभजन सिंह ने कहा कि सिक्ख इतिहास में गुरु साहिबानों के बाद बाबा बंदा बहादुर के जैसा कोई दूसरा व्यक्ति पैदा नहीं हुआ है। बंदा सिंह बहादुर बैरागी सिक्ख फौज के सेनापति थे जिन्होंने मुगल शासकों के अजेय होने के भ्रम को तोड़ा। बंदा सिंह बहादुर का पहले का नाम था माधोदास। उन्होने 13 सितंबर 1708 ई. को सिक्खों के दसवें श्री गुरु गोबिन्द सिंह से प्रेरणा ले कर सिक्ख धर्म अपनाया।

माधोदास को सिक्ख बना कर उनका नाम बंदा बहादुर सिंह रखा गया। श्री गुरु गोबिन्द सिंह जी के आदेश के बाद बाबा बंदा सिंह बहादुर ने गुरु गोबिन्द सिंह जी के सात और नौ वर्ष के साहिबजादों के हत्यारे मुगल शासक नवाब वजीर खान से बदला लिया। उन्होनें सरहिंद को जीत कर सतलुज नदी के दक्षिण में लोहगढ़ में सिक्ख राज्य की स्थापना की। बाद में उन्होनें खालसा के नाम से शासन किया और गुरुओ के नाम के सिक्के चलवाए। उन्होंने निम्न वर्ग के लोगों की उच्च पद दिलाया और हल वाहक किसान-मज़दूरों को ज़मीन का मालिक बनाया।

छत्तीसगढ़ में सिक्ख इतिहास और परंपरा पर आज आयोजित इस सेमीनार में छत्तीसगढ़ सिक्ख ऑफिसर्स वेलफेयर एसोसियेशन के संयोजक सरदार जी.एस. भामरा, छत्तीसगढ़ अल्प संख्यक आयोग के अध्यक्ष सररदार सुरेन्द्र सिंह केम्बों, जगदीश सिंह जब्बल, आर. एस. आजमानी, हरबक्श सिंह बी.एस. सलूजा, दीप सिंह जब्बल, सी.एस. बाजवा, एस.एस.खनूजा, परमजीत सिंह जुनेजा, अमोलक सिंह छाबड़ा, ए.एस. गिल, अजीत राजपाल, भजन सिंह छाबड़ा, दीप सिंह जब्बल, एच.एस. धींगरा, छत्तर सिंह, तेजपाल सिंह हंसपाल, दुर्ग स्टेशन रोड गुरुव्दारा के अध्यक्ष सरदार हरमीत सिंह भाटिया, तरसेम सिंह ढिल्लों, बलबीर सिंह अरोरा, परमजीत सिंह भुई, पूरन सिंह सैनी उपस्थित थे। सरदार कुलदीप सिंह छाबड़ा ने धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम का संचालन बलबीर सिंह भाटिया ने किया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *