बढ़ने लगे चांवल के दाम…… मिडिल क्लॉस परिवारों की बढ़ रही परेशानी

रामानुजगंज (पृथ्वीलाल केशरी ) छत्तीसगढ़ प्रदेश में मध्यम वर्गीय परिवारों को अब राशन के लिए अधिक खर्च करना पड़ सकता है। जानकारो कि माने तो जिस तरह से राज्य की नवनिर्वाचित कांग्रेस सरकार ने धान का समर्थन मूल्य बढ़ाने की घोषणा की है, उससे चावल की कीमतों में इजाफा होने की पूरी संभावना है। क्योंकि करीब 50 से 70 प्रतिशत लोगों को चावल खरीद कर खाना पड़ता है। हालांकि शासन  बीपीएल कार्डधारी परिवार के प्रत्येक हितग्राही को सात किलो चावल दे रही हैं  जो कि काफी नहीं है। वहीं किसानों का यह भी आशंका है कि धान का समर्थन मूल्य बढ़ने से किसानी भी थोड़ी महंगी होगी। शासन खाद,दवा आदि महंगा कर सकती है।

धान की खरीदी शुरू होने के बाद बाजार में अब चावल की कीमत का असर दिखने लगा है। बाजार में 25 से 29 रुपये प्रति किलो बिकने वाला मोटा चावल अब 32 रुपये किलो बिकने लगा है। चावल की कीमत में हुई बढ़ोतरी का सीधा असर मध्यम वर्गीय परिवार के बजट पर पड़ेगा। वहीं पतले चावल की कीमत बाजार में 50 से 65 रुपये है। वहीं जिले में छोटे किसानों की संख्या अधिक है। जिनके पास सालभर तक खाने के लिए उपज नहीं हो पाती,ऐसे में अगर राशन में जेब ढीली करने से बचना है तो उन्हें अपना एक-एक दाना संभाल कर रखना होगा। पिछले वर्षों तक भाजपा सरकार की ओर से मोटा धान 1550 व पतले की कीमत 1570 तय थी, जिस पर केंद्र सरकार ने समर्थन मूल्य पर 200 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ोतरी कर दी थीं इस प्रकार मोटा धान 1750 व पतला 1770 हो गया। उसमें भाजपा सरकार ने 300 बोनस देना शुरू कर दिया। जिससे 2050 रुपये किसानों के खाते में पहुंचना शुरू हो गया था। चूंकि अब कांग्रेस की सत्ता आने पर उन्होंने अपने वादे अनुसार धान का समर्थन मूल्य 2500 रुपये कर दिया है। ऐसे में उन किसानों को लाभ मिलेगा, जिनके पास आवश्यकता से अधिक जमीन है। जिन किसानों के खेत में साल भर के खाने के लिए ही धान मिलता है। वे बिक्री के फायदे से वंचित रहेंगे और अतिरिक्त चावल महंगे में खरीदकर खाएंगे।

वर्तमान सरकार ने घोषणा की थी  कि प्रत्येक बीपीएल परिवार को 35 किलो चावल दिया जाएगा। घोषित मात्रा से कम पाने वाले हितग्राहियों में उत्साह है। वहीं जिन्हें 40 से 45 किलो मिलता है। उन्हें अभी से चिंता होने लगी हैं। सार्वजनिक वितरण प्रणाली में अब तक शासन स्तर से कोई परिवर्तन नहीं किया गया है। फेरबदल की स्थिति में जिनके चावल में कटौती होगी, उन्हें अधिक कीमत में चावल की खरीदी करनी होगी। शासन जनवरी तक धान खरीदी करेगा, उसके बाद बिचौलिए जिन्होंने धान खरीदी की है। उसे ज्यादा दाम पर बेचेंगे। कई छोटे किसान अधिक कीमत मिलने की लालच में उपार्जन केंद्र में अपना धान तो बेच देंगे। लेकिन जब खुद के खाने के लिए खरीदना होगा। तो उन्हें अधिक कीमत देनी पड़ेगी। वहीं किराना एवं चाँवल व्यवसायी की माने तो चावल के दामों में अभी से तेजी आनी शुरू हो गई है। आने वाले दिनों में इसमें और इजाफा हो सकता है। जो मध्यम परिवार के लिए परेशानीयो का सबब बन जायेगा।

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