वनांचल क्षेत्रों में राजीव गांधी ग्रामीण भूमिहीन कृषि मजदूर न्याय योजना के क्रियान्वयन से खेतिहर मजदूर परिवारों में खुशी,आदिवासी क्षेत्र के गांवों में योजना की खूब हो रही चर्चा

नारायणपुर।मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में खेती को लाभ का व्यावसाय बनाने के प्रयास सरकार बनते ही प्रारंभ किये थे। सरकार बनते ही किसानों की कर्जमाफी, समर्थन मूल्य पर धान खरीदी, सिंचाई कर माफी, राजीव गांधी किसान न्याय योजना, गोधन न्याय योजना, सिंचाई क्षमता में वृद्धि, सिंचाई सुविधाओं का विस्तार कर खेती का सिंचित रकबा बढ़ाना, किसानों के लिए किये गये प्रयासों के बदौलत ही आज छत्तीसगढ़ का किसान सफलता का नया कीर्तिमान स्थापित कर रहा है और किसान इस सरकार को अपनी सरकार महसूस कर रहा है। छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा प्रारंभ की गयी राजीव गांधी ग्रामीण भूमिहीन कृषि मजदूर न्याय योजना से ग्रामीण भूमिहीन कृषि मजदूर परिवारों को प्रत्येक वर्ष 06 हजार रूपये की अनुदान सहायता राशि देने का निर्णय लिया गया है।

राजीव गांधी ग्रामीण भूमिहीन कृषि मजदूर न्याय योजना के क्रियान्वयन से खेतो में मजदूरी कर अपना जीवनयापन करने वाले परिवारों में खुशी देखने को मिल रही है। षहर से लेकर गांवों तक सभी की जुबान में राजीव गांधी ग्रामीण भूमिहीन कृषि मजदूर न्याय योजना की ही चर्चा है। जहां भूमिहीन परिवारों को इस योजना से उनको आर्थिक सहारा मिलेगा। नारायणपुर जिले के ग्राम ब्रेहबेडा के कृषि मजदूर अनिल कुमार ने अपने ग्राम पंचायत में जाकर निर्धारित प्रपत्र में आवेदन भरा और अपना पंजीयन कराया। अनिल कुमार दूसरो के खेतो में मजदूरी करता है।

सीजन में ही उन्हे काम मिलता है। बाकी समय अपने परिवार के गुजर-बसर के लिए अपने गांव से दूर जाकर काम करके जीवन यापन करते हैं। अनिल ने बताया कि पंचायत के माध्यम से उन्हें इस योजना के बारे में जानकारी मिली। अनिल का कहना है कि हम जैसे गरीबों के लिए यह बहुत अच्छी योजना है। इसी गांव के 60 वर्षीय महिला सरस्वती यदु ने बताया कि वह भी खेत मे मजदूरी करके अपना जीवन यापन करते है। उनके पास कोई जमीन नही है।

वनांचल क्षेत्र के गरीब भूमिहीन आदिवासियों को राजीव गांधी ग्रामीण भूमिहीन कृषि मजदूर न्याय योजना के क्रियान्वयन से सहारा मिलेगा। खेती-किसानी छत्तीसगढ़ का आधार है। समूचा विश्व कोरोना महामारी को झेल चुका है, इसका प्रभाव हमारे रोज़मर्रा के जीवन पर भी पड़ा है और समाज के सभी वर्ग इससे प्रभावित हुए हैं। अर्थव्यवस्था के लिए बेहद चुनौती का समय होने के बाद भी किसानों एवं खेतिहर भूमिहीन मजदूरों के हितों पर कोई आँच न आए, इसका ध्यान मुख्यमंत्री द्वारा बखूबी रखा जा रहा है। वास्तव में किसानों एवं भूमिहीन मजदूरों के हितों की रक्षा के लिये मुख्यमंत्री सदैव संकल्पित रहे हैं और यह उनकी नीतियों में भी निरंतर प्रतिबिंबित होती है। कोरोना महामारी के संकटकाल में छत्तीसगढ़ के मजदूर जिनके पास आय के न साधन थे, न ही उनके पास कृषि करने के लिए भूमि, वे अन्य शहरों तथा दूसरे प्रदेशों में शारीरिक श्रम करके अपना जीवन यापन करते थे।

कोरोना काल में हुए लाकडॉउन के कारण वे अपने घर की ओर लौट आये। वे मजदूर अपने गाँव या आसपास में शारीरिक श्रम करके अपना जीवन यापन कर रहे थे उनकी समस्याओं को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने अब ग्रामीण भूमिहीन कृषि मजदूर परिवारों के अंतर्गत चरवाहा, बढ़ई, लोहार, मोची, नाई, धोबी, पुरोहित जैसे पौनी-पसारी व्यवस्था से जुड़े परिवार, वनोपज संग्राहक , जिसकी जीविका का मुख्य साधन शारीरिक श्रम करना है, उन्हें इस योजना का लाभ दिया जाएगा।

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