मानवीय व्यहार में सकारात्मक बदलाव की जरूरत ..प्रो.प्रसन्न कुमार ने कहा..बिगड़ते ग्रामीण इकोसिस्टम को बचाने..लेना होगा दृढ़ संकल्प

बिलासपुर—-छत्तीसगढ़ भूगोल परिषद् के बैनर तले ग्रामीण पारिस्थतिक तंत्र के पुनर्बहाली  विषय पर राष्ट्रीय वेबीनार का आयोजन किया गया। वेबीनार में मुख्य अतिथि और वक्ता डा. डब्ल्यू.जी. प्रसन्न कुमार चेयरमैन महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण शिक्षा परिषद् हैदराबाद ने विशेष रूप से शिरकत किया। प्रो. संदीप कुमार महरोत्रा विभागाध्यक्ष प्राणीशास्त्र और पर्यावरण अध्ययन शाला प्रयाग विश्वविद्यालय प्रयाग ने विषय पर प्रकाश डाला। वेबीनार में देश के लगभग 300 भूगोलविद् और शोध छात्रों ने भी शिरकत किया। 
 
              वेबीनार में स्वागत भाषण छत्तीसगढ़ भूगोल परिषद् के संरक्षक प्रो. एच.एस. गुप्ता सेवानिवृत्त विभागाध्यक्ष भूगोल अध्ययन शाला, पं. रविशंकर शुक्ला विश्वविद्यालय रायपुर ने पेश किया। प्रोफेसर गुप्ता ने कहा कि विषय अत्यत प्रासंगिक है। संयुक्त राष्ट्र संघ ने इस दशक को पारिस्थितिकी तंत्र पुनर्बहाली दशक मनाने की घोषणा किया है। गुप्ता ने भूगोल के प्रादेशिक और क्षेत्रीय सर्वेक्षण उपकरण के माध्यम से कार्य करने के लिए उत्साहित किया। 
 
           छत्तीसगढ़ भूगोल परिषद् के अध्यक्ष प्रो. टी.एल. वर्मा ने छत्तीसगढ़ भूगोल परिषद् के प्रमुख उद्देश्यों पर प्रकाश डाला ।उन्होने बताया कि प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों में भूगोल विषय को विज्ञान संकाय अंतर्गत समाहित किए जाने की जरूरत है। इस दिशा में लगातार प्रयास भी किया जा रहा है।
 
            मुख्य अतिथि एवं प्रमुख वक्ता डाॅ. प्रसन्न कुमार चेयरमेन एम.जी.एन.सी.आर.ई., हैदराबाद ने कहा कि ग्रामीण पारिस्थितिकी तंत्र के पुनर्बहाली के लिए आज आवश्यकता है कि मनुष्य अपनी यूज एण्ड थ्रो कल्चर को छोड़े। ग्रीन कल्चर पर कार्य करने के साथ विश्वास भी करे। मनुष्य का पर्यावरण से अभिन्न नाता है। सभी को घी, दूध, फल, मांस की तरह खुली हवा की हमेशा से आवश्यकता है। लेकिन गांव की पारिस्थितिकी तंत्र तेजी से बिगड़ रहा है। इसके लिए हम सभी जिम्मेदार है। संरक्षण को लेकर हम सबको गंभीरता से ना केवल विचार बल्कि सकारात्मक काम करने की जरूरत है। डॉ. प्रसन्न ने वेबीनार के आयोजन को सफल बताया।
 
                    दूसरे प्रमुख वक्ता प्रो. संदीप कुमार महरोत्रा प्रयाग विश्वविद्यालय ने अपने उद्बोधन में ग्रामीण पारिस्थितिकी तंत्र के पुनर्बहाली पर जोर दिया। उन्होने इस दौरान अपने निर्देशन में किए गए कई कार्यों को नजीर के रूप में पेश किया। उन्होने बताया कि ग्रामीण अंचल में आज सतही जल स्त्रोत तीव्र गति से संकुचित हो रहा है। मनुष्य  प्राकृतिक तत्वों का अपने लाभ के लिए तेजी से दोहन कर रहा है। ग्रामीण पारिस्थितिकी तंत्र के पुनर्बहाली के लिए मनुष्य के वर्तमान व्यवहार को नियंत्रित और संतुलित करना बहुत ही जरूरी है।
 
           वेबीनार में प्रो. एस.के. शुक्ला सेवानिवृत्त विभागाध्यक्ष भूगोल अध्ययन शाखा के केन्द्रीय विश्वविद्यालय सागर और प्रो. व्ही.के. गुप्ता विभागध्यक्ष प्राणीशास्त्र सी.एम. दुबे महाविद्यालय ने भी अपने विचार प्रस्तुत किया।
 
                वेबीनार का संचालन संयोजक डाॅ. पूर्णिमा शुक्ला विभागाध्यक्ष भूगोल दुर्ग महाविद्यालय ने किया। उन्होने ग्रामीण पारिस्थितिकी तंत्र पुनर्बहाली विषय पर प्रकाश डालते हुए  वेबीनार में उपस्थित सभी अतिथियों का स्वागत किया। आयोजन मण्डल के मुख्य संरक्षक प्रो. एच.एस. गुप्ता, भुगोल परिषद् के अध्यक्ष प्रो. टी.एल. वर्मा, डाॅ. मधु कामरा प्राचार्य दुर्ग महा. रायपुर, डाॅ. संजय सिंह, प्राचार्य सी.एम. दुबे महा. विद्यालय तथा दुर्ग महा. प्रबंध समिति के चेयरमेन श्री. एस.एस. शुक्ला तथा सी.एम. दुबे महाविद्यालय बिलासपुर के शासी निकाय के चेयरमेन पं. संजय दुबे के मार्गदर्शन और शुभकामनाओं का अभिनन्दन किया।
 
                  कार्यक्रम समापन से पहले उपस्थित सभी अतिथियों का आभार सह-संयोजक डाॅ. पुरूषोत्तम चन्द्राकर विभागाध्यक्ष भूगोल सी.एम. दुबे ने किया।

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